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टीबी के मरीजों को कोई भी ले सकेगा गोद
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टीबी के मरीजों को कोई भी ले सकेगा गोद
सिद्धार्थनगर। अब कोई भी व्यक्ति टीबी मरीज को गोद ले सकता है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इच्छुक लोगों के आवेदन पर मरीज को गोद दिया जाएगा। वे लोग मरीजों को नियमित दवा लेने और सेहत का विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित करेंगे। जब मरीज की सेहत बेहतर हो जाएगी तो गोद लेने वाले व्यक्ति को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
टीबी बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए सरकार ने अभियान तेज कर दिया है। वर्ष 2023 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उन्हें बीमारी के लक्षण बताए जा रहे हैं ताकि लोग लक्षण दिखते ही मरीज की जांच कराने के साथ इलाज शुरू कर सकें।
टीबी मरीजों को सहयोग करके अच्छे कार्य करने वाले लोगों को सूची बनाई जा रही है।
गोद लेने के पीछे उद्देश्य है कि संबंधित व्यक्ति उस मरीज से समय-समय पर मिलेगा। उसे नियमित दवा खाने के लिए प्रेरित करेगा। गोद लेने वाला व्यक्ति ऐसे मरीजों की आर्थिक मदद भी कर सकता है। छह माह की दवा में जब मरीज पूर्ण रूप से स्वस्थ्य हो जाएगा तो स्वास्थ्य महकमा गोद लेने वाले व्यक्ति को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित करेगा।
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गोद लेने में देनी होगी जानकारी
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, टीबी रोगी को बीमारी से मुक्त कराने के लिए कोई भी नागरिक उसे गोद ले सकता है। इसमें संबंधित व्यक्ति को अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर या पेशा के बारे में ब्यौरा देना होगा। इसके बाद विभाग की ओर से मरीज को गोद दिया जाएगा। गोद लेने वाले व्यक्ति को मरीज के बारे में और उसका नाम किसी को शेयर नहीं करना होगा। वह उसकी देखभाल के साथ ही मदद भी कर सकता है।
दो घंटे में मिल जाती है रिपोर्ट
टीबी कोई असाध्य बीमारी नहीं है। टीबी मुक्त भारत बनाने के लिए अभियान तेज कर दिया गया है। मरीजों की देखभाल के लिए उन्हें गोद लेने की योजना शुरू हुई है। इसमें कोई भी नागरिक एक या एक से अधिक मरीज को गोद लेकर उनकी देखभाल और मदद कर सकते हैं। पंकज त्रिपाठी, जिला समन्वयक
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सिद्धार्थनगर। अब कोई भी व्यक्ति टीबी मरीज को गोद ले सकता है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इच्छुक लोगों के आवेदन पर मरीज को गोद दिया जाएगा। वे लोग मरीजों को नियमित दवा लेने और सेहत का विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित करेंगे। जब मरीज की सेहत बेहतर हो जाएगी तो गोद लेने वाले व्यक्ति को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
टीबी बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए सरकार ने अभियान तेज कर दिया है। वर्ष 2023 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उन्हें बीमारी के लक्षण बताए जा रहे हैं ताकि लोग लक्षण दिखते ही मरीज की जांच कराने के साथ इलाज शुरू कर सकें।
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टीबी मरीजों को सहयोग करके अच्छे कार्य करने वाले लोगों को सूची बनाई जा रही है।
गोद लेने के पीछे उद्देश्य है कि संबंधित व्यक्ति उस मरीज से समय-समय पर मिलेगा। उसे नियमित दवा खाने के लिए प्रेरित करेगा। गोद लेने वाला व्यक्ति ऐसे मरीजों की आर्थिक मदद भी कर सकता है। छह माह की दवा में जब मरीज पूर्ण रूप से स्वस्थ्य हो जाएगा तो स्वास्थ्य महकमा गोद लेने वाले व्यक्ति को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित करेगा।
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गोद लेने में देनी होगी जानकारी
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, टीबी रोगी को बीमारी से मुक्त कराने के लिए कोई भी नागरिक उसे गोद ले सकता है। इसमें संबंधित व्यक्ति को अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर या पेशा के बारे में ब्यौरा देना होगा। इसके बाद विभाग की ओर से मरीज को गोद दिया जाएगा। गोद लेने वाले व्यक्ति को मरीज के बारे में और उसका नाम किसी को शेयर नहीं करना होगा। वह उसकी देखभाल के साथ ही मदद भी कर सकता है।
दो घंटे में मिल जाती है रिपोर्ट
टीबी कोई असाध्य बीमारी नहीं है। टीबी मुक्त भारत बनाने के लिए अभियान तेज कर दिया गया है। मरीजों की देखभाल के लिए उन्हें गोद लेने की योजना शुरू हुई है। इसमें कोई भी नागरिक एक या एक से अधिक मरीज को गोद लेकर उनकी देखभाल और मदद कर सकते हैं। पंकज त्रिपाठी, जिला समन्वयक