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विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का एलान
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 17 Feb 2017 11:09 PM IST
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परसा में मतदान वहिष्कार का एलान करते ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
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परसा। बढ़नी ब्लॉक के खैरी शीतल प्रसाद ग्रामसभा के तीन टोलों के मतदाताओं ने 27 फरवरी को होने वाले विधानसभा के चुनाव के बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। मतदाताओं ने विद्युतीकरण का कार्य कर रहे कंपनी के क्षेत्रीय ठेकेदारों द्वारा विद्युतीकरण कार्य में लापरवाही का आरोप लगाते हुए बहिष्कार का निर्णय लिया।
विद्युतीकरण से वंचित मजरों में बिजली पहुंचाने के केंद्र सरकार के दीनदयाल उपाध्याय जीवन ज्योति योजना के तहत विभिन्न गांवों और टोलों का चयन हुआ था। खैरी शीतल प्रसाद ग्रामसभा के करौता और चिरहगना टोलों में विद्युतीकरण करने वाली गोपी-कृष्णा कंपनी ने पोल भी गिरवा दिए थे लेकिन ग्राम प्रधान के कागजात पर दस्तखत न करने के कारण दोनों ही टोले विद्युतीकरण से वंचित हैं। टीकर टोले में बहुत समय पहले विद्युतीकरण हुआ था परन्तु वषज् 2009 में आयी तेज आंधी में कुछ पोल गिर गए तबसे लेकर आजतक यहा की सप्लाई ठप है। तीनों टोलों के रहने वाले मतदाताओं ने सामूहिक रुप से विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का निर्णय लिया है। करौता की सोनमती का कहना है कि आठ-आठ वर्ष तक बिजली न मिलने को क्या कहा जाए। हमने सभी अधिकारियों-कर्मचारियों के दरबार में गुहार लगायी।
नेता चुनाव के वक्त आते हैं लेकिन उसके बाद दिखाई नहीं देते। कोदई का कहना है कि जब ग्रामसभा के समस्त टोलों में विद्युतीकरण होना था तब केवल करौता और चिरहगना टोले ही क्यों शेष छोड़ा गया। बुट्टा का कहना है कि हमारा पूरा ग्रामसभा हर वर्ष बाढ़ से प्रभावित रहता है। सुविधा के नाम पर टोले को कुछ नहीं मिला है। राजेंद्र का कहना है कि हर सरकारी कामों में लापरवाही की जाती है। बूढ़ी राप्ती नदी पर टीकर और करौता टोले के बीच पुल बना है। एप्रोच पर पत्थर लगवाया जा रहा जो दोयम दर्जे का है।
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विद्युतीकरण से वंचित मजरों में बिजली पहुंचाने के केंद्र सरकार के दीनदयाल उपाध्याय जीवन ज्योति योजना के तहत विभिन्न गांवों और टोलों का चयन हुआ था। खैरी शीतल प्रसाद ग्रामसभा के करौता और चिरहगना टोलों में विद्युतीकरण करने वाली गोपी-कृष्णा कंपनी ने पोल भी गिरवा दिए थे लेकिन ग्राम प्रधान के कागजात पर दस्तखत न करने के कारण दोनों ही टोले विद्युतीकरण से वंचित हैं। टीकर टोले में बहुत समय पहले विद्युतीकरण हुआ था परन्तु वषज् 2009 में आयी तेज आंधी में कुछ पोल गिर गए तबसे लेकर आजतक यहा की सप्लाई ठप है। तीनों टोलों के रहने वाले मतदाताओं ने सामूहिक रुप से विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का निर्णय लिया है। करौता की सोनमती का कहना है कि आठ-आठ वर्ष तक बिजली न मिलने को क्या कहा जाए। हमने सभी अधिकारियों-कर्मचारियों के दरबार में गुहार लगायी।
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नेता चुनाव के वक्त आते हैं लेकिन उसके बाद दिखाई नहीं देते। कोदई का कहना है कि जब ग्रामसभा के समस्त टोलों में विद्युतीकरण होना था तब केवल करौता और चिरहगना टोले ही क्यों शेष छोड़ा गया। बुट्टा का कहना है कि हमारा पूरा ग्रामसभा हर वर्ष बाढ़ से प्रभावित रहता है। सुविधा के नाम पर टोले को कुछ नहीं मिला है। राजेंद्र का कहना है कि हर सरकारी कामों में लापरवाही की जाती है। बूढ़ी राप्ती नदी पर टीकर और करौता टोले के बीच पुल बना है। एप्रोच पर पत्थर लगवाया जा रहा जो दोयम दर्जे का है।
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