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हल्लौर गांव में निकाला गया अमारी का जुलूस
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 06 May 2016 11:43 PM IST
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टाउन इंटर कालेज से पुरानी पेंशन नीति बहाल करने के लिए मशाल जुलूस निकालते शिक्षक।
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शुक्रवार को जुमे की नमाज अदायगी के बाद शिया बाहुल्य गांव हल्लौर में अकीदतमंदों ने इमाम हुसैन के कर्बला के सफर की याद में अमारी व जुलजनाह का जुलूस निकाला। इसमें अकीदतमंद अलम लेकर नौहा व मातम करते हुए पूरे गांव में घूमने के बाद कर्बला पहुंचकर देर शाम समाप्त हो गया। इस दौरान बाहर से आए जायरीनों व जुलूस में शामिल लोगों के लिए जगह-जगह जलपान की भी व्यवस्था की गई थी।
अपराह्न करीब 3 बजे डुमरियागंज-इटवा मुख्य मार्ग पर स्थित इमाम-ए-बारगाह हुसैनिया कनीज रव्वाब में पहुंचे। इस दौरान यहां एक मजलिस का आयोजन किया गया। इसका आगाज साहिद आलम व उनके हमनवां ने मर्सिया पढ़कर की।
मजलिस को खेताब करते हुए मौलाना वसीम रजा जैदी ने कहा कि आज ही के दिन इमाम हुसैन अपने 72 साथियों के साथ मदीना से कर्बला के लिए रवाना हुए थे। मजलिस में मौलाना जैदी ने अकीदतमंदों को कर्बला की दास्तां विस्तार से सुनाया, जिसे सुनकर अकीदतमंदों की आंखें भर आई।
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मजलिस समाप्त होने के बाद अंजुमन गुलदस्ता व फरोग मातम के मातमदारों और अकीदतमंदों ने अपने हाथों में विशाल अलम लेकर गांव के मुख्य गेट से होते हुए बड़ी मस्जिद पहुंचे। वहां से जुलूस कर्बला में देर शाम 7 बजे पहुंचकर समाप्त हुआ। इस दौरान जुलूस में अमारी और इमाम हुसैन की सवारी जुलजनाह की शबीह भी शामिल थी। जिसका अकीदतमंदों ने बोसा लिया।
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अपराह्न करीब 3 बजे डुमरियागंज-इटवा मुख्य मार्ग पर स्थित इमाम-ए-बारगाह हुसैनिया कनीज रव्वाब में पहुंचे। इस दौरान यहां एक मजलिस का आयोजन किया गया। इसका आगाज साहिद आलम व उनके हमनवां ने मर्सिया पढ़कर की।
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मजलिस को खेताब करते हुए मौलाना वसीम रजा जैदी ने कहा कि आज ही के दिन इमाम हुसैन अपने 72 साथियों के साथ मदीना से कर्बला के लिए रवाना हुए थे। मजलिस में मौलाना जैदी ने अकीदतमंदों को कर्बला की दास्तां विस्तार से सुनाया, जिसे सुनकर अकीदतमंदों की आंखें भर आई।
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मजलिस समाप्त होने के बाद अंजुमन गुलदस्ता व फरोग मातम के मातमदारों और अकीदतमंदों ने अपने हाथों में विशाल अलम लेकर गांव के मुख्य गेट से होते हुए बड़ी मस्जिद पहुंचे। वहां से जुलूस कर्बला में देर शाम 7 बजे पहुंचकर समाप्त हुआ। इस दौरान जुलूस में अमारी और इमाम हुसैन की सवारी जुलजनाह की शबीह भी शामिल थी। जिसका अकीदतमंदों ने बोसा लिया।