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Siddharthnagar News: अधिवक्ताओं ने डीएम के खिलाफ की नारेबाजी
Wed, 06 Mar 2024 11:52 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 06 Mar 2024 11:52 PM IST
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सिद्धार्थनगर। सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने बुधवार को कार्य से विरत रहकर जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर नारेबाजी की।
बुधवार को सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन ने ग्रामीण न्यायालय की स्थापना के विरोध में रणनीतिक कदम उठाने के लिए आम सभा की बैठक बुलाई थी। आम सभा की बैठक में शामिल होने की वजह से अधिवक्ताओं की व्यस्तता हो गई। इससे वे न्यायिक कार्य करने से विरत रहे। कार्य से विरत रहने का प्रस्ताव पारित करके कार्यकारिणी ने सभी न्यायालयों एवं अधिकरणों में पहुंचवा दिया। इसके बावजूद डीएम न्यायालय में न्यायिक कार्य करने लगे।
इसकी सूचना मिलने पर अध्यक्ष राधेश्याम मिश्रा एडवोकेट, महामंत्री सिद्धनाथ पांडेय एडवोकेट की अगुवाई में लामबंद होकर भारी संख्या में सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन एवं जिला बार एसोसिएशन के अधिवक्ता जिलाधिकारी नारे लगाते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किए। इस दौरान दिनेश श्रीवास्तव, देवेंद्र नाथ त्रिपाठी, कृपाशंकर त्रिपाठी, संतोष मिश्रा सहित सैकड़ों अधिवक्ता उपस्थित रहे।
सामान्य सभा ने लिया निर्णय, ग्रामीण न्यायालय का विरोध रहेगा जारी
सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन की आमसभा की बैठक में अधिवक्ताओं ने ग्रामीण न्यायालय का विरोध जारी रखने का निर्णय लिया है। बुधवार को सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन के बार भवन में आमसभा की बैठक हुई। बैठक में अधिवक्ताओं ने चर्चा करते हुए कहा कि जनपद में ग्रामीण न्यायालय के गठन की प्रक्रिया चल रही है। इटवा में ग्रामीण न्यायालय भवन करीब करीब पूर्ण होने की कगार पर है और वहां बिजली की वायरिंग का कार्य चल रहा है। सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन के अधिवक्ता ग्रामीण न्यायालय के विरोध में माह के पहले व तीसरे शनिवार को न्यायिक कार्य से विरत रहकर ग्रामीण न्यायालय के गठन का विरोध करते थे। उक्त विरोध का प्रस्ताव सामान्य सभा की बैठक करके लिया गया था जो कई वर्षों से जारी था, जिसकी वजह से जनपद में ग्रामीण न्यायालय के गठन में शिथिलता बरती जा रही थी। महामंत्री सिद्धनाथ पांडेय ने बताया कि कतिपय कारणों से सामान्य सभा के उक्त प्रस्ताव को मात्र कार्यकारिणी ने प्रस्ताव करके वापस ले लिया था। इससे अधिवक्ताओं के विधि व्यवसाय पर दुष्प्रभाव पड़ेगा और न्यायिक अधिकारी का मनमानापन बढ़ने की संभावना को देखते हुए आमसभा की बैठक करके ग्रामीण न्यायालय के गठन को निष्प्रभावी करने के लिए सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि माह के पहले व तीसरे शनिवार को न्यायिक कार्य से विरत रहकर ग्रामीण न्यायालय की स्थापना का विरोध जारी रखा जाएगा।
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बुधवार को सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन ने ग्रामीण न्यायालय की स्थापना के विरोध में रणनीतिक कदम उठाने के लिए आम सभा की बैठक बुलाई थी। आम सभा की बैठक में शामिल होने की वजह से अधिवक्ताओं की व्यस्तता हो गई। इससे वे न्यायिक कार्य करने से विरत रहे। कार्य से विरत रहने का प्रस्ताव पारित करके कार्यकारिणी ने सभी न्यायालयों एवं अधिकरणों में पहुंचवा दिया। इसके बावजूद डीएम न्यायालय में न्यायिक कार्य करने लगे।
इसकी सूचना मिलने पर अध्यक्ष राधेश्याम मिश्रा एडवोकेट, महामंत्री सिद्धनाथ पांडेय एडवोकेट की अगुवाई में लामबंद होकर भारी संख्या में सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन एवं जिला बार एसोसिएशन के अधिवक्ता जिलाधिकारी नारे लगाते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किए। इस दौरान दिनेश श्रीवास्तव, देवेंद्र नाथ त्रिपाठी, कृपाशंकर त्रिपाठी, संतोष मिश्रा सहित सैकड़ों अधिवक्ता उपस्थित रहे।
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सामान्य सभा ने लिया निर्णय, ग्रामीण न्यायालय का विरोध रहेगा जारी
सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन की आमसभा की बैठक में अधिवक्ताओं ने ग्रामीण न्यायालय का विरोध जारी रखने का निर्णय लिया है। बुधवार को सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन के बार भवन में आमसभा की बैठक हुई। बैठक में अधिवक्ताओं ने चर्चा करते हुए कहा कि जनपद में ग्रामीण न्यायालय के गठन की प्रक्रिया चल रही है। इटवा में ग्रामीण न्यायालय भवन करीब करीब पूर्ण होने की कगार पर है और वहां बिजली की वायरिंग का कार्य चल रहा है। सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन के अधिवक्ता ग्रामीण न्यायालय के विरोध में माह के पहले व तीसरे शनिवार को न्यायिक कार्य से विरत रहकर ग्रामीण न्यायालय के गठन का विरोध करते थे। उक्त विरोध का प्रस्ताव सामान्य सभा की बैठक करके लिया गया था जो कई वर्षों से जारी था, जिसकी वजह से जनपद में ग्रामीण न्यायालय के गठन में शिथिलता बरती जा रही थी। महामंत्री सिद्धनाथ पांडेय ने बताया कि कतिपय कारणों से सामान्य सभा के उक्त प्रस्ताव को मात्र कार्यकारिणी ने प्रस्ताव करके वापस ले लिया था। इससे अधिवक्ताओं के विधि व्यवसाय पर दुष्प्रभाव पड़ेगा और न्यायिक अधिकारी का मनमानापन बढ़ने की संभावना को देखते हुए आमसभा की बैठक करके ग्रामीण न्यायालय के गठन को निष्प्रभावी करने के लिए सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि माह के पहले व तीसरे शनिवार को न्यायिक कार्य से विरत रहकर ग्रामीण न्यायालय की स्थापना का विरोध जारी रखा जाएगा।
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