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#LadengeCoronaSe: एक परिवार के पांच सदस्य हुए थे कोरोना पॉजिटिव, अब लोगों की मदद में जुटे लोग

Tue, 25 May 2021 05:01 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, सिद्धार्थनगर।
अमर उजाला नेटवर्क, सिद्धार्थनगर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Tue, 25 May 2021 05:01 PM IST
सार

कोरोना का जख्म भरने में जुटा एक कुनबा, चीफ फार्मासिस्ट, डॉक्टर और अधिवक्ता बेटी जुटी है मदद में

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Five members of a family got corona positive in siddharth nagar
शुभांगी द्विवेदी ने जरूरतमंदों की भूख मिटाने में जुटी है। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सिद्धार्थनगर जिले में कोरोना की दूसरी लहर की तबाही के दौर में नौगढ़ के एक परिवार ने दूसरों का दर्द दूर करने का बीड़ा उठाया है। इस परिवार के पांच सदस्य कोरोना संक्रमित हुए, होम आइसोलेट रहे और सभी ने कोरोना को मात दे दी। इसके बाद उन्होंने दूसरों लोगों का हौसला बढ़ाने में जुट गए। इस नेक कार्य में शामिल है एक परिवार के फार्मासिस्ट, डॉक्टर और अधिवक्ता बेटी।

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नौगढ शहर के शेखनगर के रहने वाले रमेश चंद्र द्विवेदी जिले के राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल कटकी में फार्मासिस्ट पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनके बेटे डॉ. रंबीत चंद्र द्विवेदी केजीएमयू लखनऊ में रेंजीडेंट डॉक्टर हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में वे, उनकी पत्नी मीना द्विवेदी, पुत्र डॉ. रंबीत और डॉक्टर बहू पूजा द्विवेदी और इंजीनियर मंजीत कोरोना पॉजिटिव हो गए।
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डॉक्टर की सलाह के अनुसार वे होम आइसोलेट रहें, नियमित दवा ली। इसके साथ आयुर्वेद और योग का सहारा लिया है। फिलहाल सभी सदस्यों की रिपोर्ट कोरोना निगेटिव आ गई हैं। फिलहाल रमेशचंद्र और उनके बेटे कोरोना संक्रमण के दौर में अस्पताल में ड्यूटी कर रहे हैं।
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काला कोट रखा किनारे, बना रहीं रोटी

जिला एवं सत्र न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाली शुभांगी द्विवेदी ने जरूरतमंदों की भूख मिटाने में जुटी हैं। कोरोना काल में उन्होंने काला कोट किनारे रख दिया है। बीते 25 दिनों से वह गुरु गोविंद सिंह गुरुद्वारा की ओर से जिला अस्पताल में संचालित बुद्ध रसोई में रोटियां बना रही हैं। यहां से भोजन के पैकेट बनाकर मरीजों, तीमारदारों एवं जरूरतमंद लोगों में बांटा जा रहा है।

खूब किया डांस और कोरोना को हराया
मीना द्विवेदी बताती हैं कि परिवार में चार लोग कोरोना पॉजिटिव थे और डॉक्टर बेटा लखनऊ में पॉजिटिव था। बुरे दिनों में वो सभी सदस्यों का हौसला बढ़ाती रहीं। नियमित काढ़ा, भाप लेना और नाक में अणु का तेल डालने का प्रयोग किया। सभी पॉजिटिव लोग थे तो एक दूसरे से दूर रहते थे। बारी-बारी से सभी डांस करते थे और अन्य सदस्य दर्शक की भूमिका में ठहाके लगाते थे और खूब तालियां बजाते थे। हमारे परिवार की खुशी के आगे कोरोना ने दम तोड़ दिया।

चार साल के मासूम भी निकला समझदार
बीएएमएस एमडी पूजा द्विवेदी ने बताया कि उन्हें चार साल के बेटा युवान की बहुत चिंता थी लेकिन परिवार के लोगों के समझाने पर युवान ने भी समझदारी का परिचय दिया। वह बात मान गया और जब वे आइसोलेट थी तो बच्चे ने अपनी नर्स बुआ शिवांगी के साथ रहा। बुजुर्ग दादी को खुश देखकर बच्चे भी खूब डांस किया।

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