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स्वास्थ्य महकमे में नहीं रुक रहा बैकडोर से टेंडर

Sat, 25 Jan 2014 05:46 AM IST
Siddhartha nagar
Siddhartha nagar Updated Sat, 25 Jan 2014 05:46 AM IST
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सिद्धार्थनगर। स्वास्थ्य महकमे में बैकडोर से टेंडर होने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। गोलमाल के चक्कर में नियमों की अनदेखी करते हुए विभाग के कुछ लोग बैकडोर से टेंडर निकलवा रहे हैं। इनकी इस बाजीगारी में विभाग भी बखूबी साथ दे रहा है। 2013 में स्वास्थ्य महकमे ने छह करोड़ का टेंडर पास करवाया था। इस मामले में काफी विरोध भी हुआ था। इसके बाद डीएम ने इस मामले में जांच के आदेश दिए थे। इतना सब होने के बाद भी निविदा प्रकाशन में विभाग गोलमाल करने से नहीं चूक रहा है।
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विभाग के कुछ लोग भारी गोलमाल के चक्कर में बैकडोर से निविदा प्रकाशित करवा रहे हैं। यह लोग विभाग के खासमखास हैं। इनकी शह पर निविदा ऐसे अखबारों में प्रकाशित कराई जा रही है, जिनकी प्रतियां जिले में बेहद कम आती हैं। ऐसी निविदा विभाग की तरफ से पूर्व में भी प्रकाशित हो चुकी है। 2013 में हुए छह करोड़ की निविदा ऐसे अखबारों में प्रकाशित कराई गई थी, जिनकी प्रतियां जिले में आती ही नहीं थी। निविदा प्रकाशन के बाद इस मामले में विभाग की काफी किरकिरी भी हुई थी, लोगों ने इसकी जांच की मांग भी डीएम से की थी। जिस पर डीएम ने जांच के आदेश दिए थे। बाद में मामला कोर्ट के हवाले कर दिया गया था। निविदा प्रकाशन का यह जिम्मा विभाग ने एक बाबू का सौंप दिया है। यही बाबू अपने सेटिंग के बल पर निविदा प्रकाशन का काम बखूबी कर रहा है। इसके इस काम में विभाग के जिम्मेदार भी सहयोग दे रहे हैं। अभी इस टेंडर को लेकर महकमा उबरा नहीं था कि एक बार फिर जिम्मेदारों ने एनआरएचएम का टेंडर बैकडोर से पास करा दिया। जबकि एनआरएचएम को लेकर दो बार सीबीआई की टीम जिले मेें जांच के लिए पहुंच चुकी है। साथ ही कुछ फार्मासिस्टों और बाबुओं को पूछताछ के लिए दिल्ली और बनारस तलब कर चुकी है। उसके बाद भी जिम्मेदारों को इसकी कोई परवाह नहीं है। एनआरएचएम की जांच अभी भी जिले में चल रही है। उसके बाद भी जिम्मेदारों ने एनआरएचएम योजना के तहत अंधता निवारण अंतर्गत औषधियाें की आपूर्ति के लिए सील्ड बंद निविदा बैक डोर से पास करा दी। इस मामले की शिकायत डीएम से करने वाले क्यू मलिक ने बताया कि टेंडर की सूचना के लिए बीते 11 अक्टूबर को सीएमओ को पत्र दिया गया था। इस मामले में जिम्मेदारों ने 20 लाख रुपये का टेंडर अपने लोगों को पिछले वर्ष की तुलना में चार गुना रेट से ज्यादा रेट पर नौ जनवरी को करवा दिया गया। इस टेंडर के बारे में जब पता किया गया तो विभाग की तरफ से यह जानकारी दी गई कि 23 दिसंबर 2013 को ही इसका टेंडर प्रकाशित कराया जा चुका है। जिन अखबारों का नाम विभाग ने बताया उनकी प्रतियां जिले में या तो बेहद कम आती हैं, या आती ही नहीं हैं।
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सूचना विभाग निर्णय करता है निविदा
हमारा काम सूचना प्रकाशित करवाना है। सूचना विभाग निर्णय करता है कि किस अखबार को निविदा प्रकाशित करवाना है। ऐसे में हमें इसकी जानकारी नहीं है। निविदा कम सर्कुलेशन वाले अखबारों में छपी है, जो नियमत: सही नहीं है।
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डॉ. यतींद्र कुमार, सीएमओ सिद्धार्थनगर।
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