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भारतीय डब्लूएलएल का नेपाल में इस्तेमाल

Thu, 12 Dec 2013 05:42 AM IST
Siddhartha nagar
Siddhartha nagar Updated Thu, 12 Dec 2013 05:42 AM IST
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सिद्धार्थनगर। नेपाल की तराई में बीएसएनएल के डब्लूएलएल (वायरलेस लोकल लूप) फोन खतरे की घंटी बजा रहे हैं। इसके सहारे विदेश में बैठकर भी भारतीय क्षेत्र में लोकल दर पर काल की जा रही है। सुरक्षा के लिहाज से इसे बेहद संवेदनशील बताया जा रहा, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही से इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। डब्लूएलएल के कारोबार से जुड़े लोग फर्जी नाम पते पर इसे जारी कराकर नेपाल पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
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नेपाल में भारतीय टेलीफोन की घनघनाहट सुरक्षा में सेंधमारी है। मोबाइल सेवा के विस्तार के बाद आई इस समस्या का समाधान आज तक नहीं हो सका है। नेपाल में बीस किमी अंदर तक भारतीय मोबाइल कंपनियों के नेटवर्क को लेकर जब सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों ने गृह मंत्रालय तक पहुंचाई तो सरकार भी गंभीर हुई और बार्डर पर लगे निजी संचार कंपनियों का बीटीएस बंद करा दिया। गृह मंत्रालय के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई में बीएसएनएल ने अपना बीटीएस बंद तो नहीं किया लेकिन इससे निकलने वाली फ्रिक्वेंशी को कम कर दिया। नेपाल में नेटवर्क की समस्या आई तो लोगों ने इसका उपाय भी ढूंढ़ निकाला और चाइनीज बूस्टर लगाकर सिग्नल एम्पलीफाई कर लिया।
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भारत से अधिक नेपाल में डब्लूएलएल की मांग
नेपाल सीमा में बीएसएनएल मोबाइल और डब्लूएलएल फोन की संख्या काफी अधिक है। जिले में करीब छह हजार डब्लूएलएल फोन हैं। इनमें चार हजार सक्रिय हैं तो दो हजार के करीब डेड हैं। अधिकतर डब्लूएलएल सीमावर्ती क्षेत्रों में ही हैं। भारतीयों से ज्यादा डब्लूएलएल की मांग नेपालियों में है और विभाग भी इसका जमकर फायदा उठाता है। विभाग की मिलीभगत से जिम्मेदार फर्जी नाम पते पर कनेक्शन जारी कराते हैं और उसे नेपाल पहुंचा देते हैं। बढ़नी बार्डर से लगे नेपाल के कृष्णानगर, चंद्रौटा, बहादुरगंज सहित अन्य कई गांवों में बीएसएनएल डब्लूएलएल अधिक संख्या में काम कर रहे हैं। इसी तरह खुनुवा बार्डर और अलीगढ़वा, ककरहवा, हरिवंशपुर बार्डर से सटे नेपाली कस्बों में भी भारतीय टेलीफोन की घनघनाहट होती है। यह टेलीफोन आम नेपाल के हाथ में है या फिर अपराधियों के हाथ इसका कोई अता पता नहीं है।
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बीएसएनएल को भी नहीं मालूम कहां घनघना रहे फोन
भारतीय डब्लूएलएल टेलीफोन जिले में चल रहे हैं या फिर इसका इस्तेमाल नेपाली कर रहे हैं? इसकी जानकारी बीएसएनएल के जिम्मेदारों के पास भी नहीं है। विभाग का कहना है कि जिले के लोगों की आईडी पर ही डब्लूएलएल फोन दिए गए हैं। इसे नेपाल में चलाया जा रहा है तो कनेक्शन लेने वाला दोषी है। एसडीओ दुर्गेश सिंह ने बताया कि इस संबंध में सूचनाएं मिली हैं। लोग इसकी शिकायत विभाग के पास कर सकते हैं। इस संबंध में कार्रवाई की जाएगी।

खुफिया एजेंसियां कई बार उठा चुकी हैं सवाल
नेपाल सीमा पर तैनात खुफिया एजेंसियां कई बार भारतीय टेलीफोन के नेपाल में इस्तेमाल को लेकर सवाल उठा चुकी हैं। वह लगातार इसकी शिकायत भी कर रही हैं लेकिन इस पर प्रभावी रुप से अंकुश नहीं लग पा रहा है। खुफिया तंत्र की रिपोर्टो का ही असर है कि प्रदेश का पुलिस महकमा इन दिनों इसे लेकर काफी गंभीर हुआ है। एडीजी के निर्देश पर पुलिस प्रशासन मोबाइल फर्जीवाड़ा पर अंकुश लगाने में जुट गया है।

कोट,
नेपाल में भारतीय टेलीफोन की घनघनाहट सुरक्षा के लिहाज से काफी गंभीर मामला है। इसे लेकर एसएसबी गंभीर है और इसकी रिपोर्ट समय-समय पर उच्चाधिकारियों तक पहुंचाई जा रही है। टेलीफोन नेपाल में न जाए इसे लेकर जवानों को कड़ा निर्देश दिए हैं।
अमित शर्मा, कमांडेंट एसएसबी।
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