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देवरिया का है फर्जी शिक्षक भर्ती का मास्टरमाइंड
siddharthnagar/नीरज मिश्र
Updated Sun, 26 Aug 2018 10:56 PM IST
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सिद्धार्थनगर। फर्जी शिक्षक भर्ती का मास्टरमाइंड देवरिया जिले का रहने वाला है, जो जिले के बढ़नी ब्लॉक के एक प्राथमिक विद्यालय में तैनात है, लेकिन 38 शिक्षकों की बर्खास्तगी के बाद भी अभी तक उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है। उसका जिले में तैनात कई बीएसए से साठगांठ है।
शिक्षकों की बर्खास्तगी के बाद बीएसए कार्यालय एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कहा जा रहा है कि फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर एक साल से अधिक समय तक नौकरी करना विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर संभव नहीं है। साठगांठ की वजह से ही फर्जी शिक्षकों को बिना सत्यापन ही वेतन दिया जाता रहा। मामला तब बिगड़ा जब शिकायतकर्ता अजय यादव ने डीएम से जांच कराने की मांग की। इसके बाद छानबीन शुरू हुई और फर्जी शिक्षकों का वेतन रोका गया, लेकिन उन लोगों ने जुगाड़ लगाकर वेतन बहाल करा लिया। विभागीय सूत्रों की माने तो मास्टरमाइंड ने एक बार इस्तीफा दे दिया था, जिसे विभाग ने स्वीकार नहीं किया। ऐसा मास्टरमाइंड का बीएसए से सेटिंग की वजह से हुआ। बताया जा रहा है कि आठ सालों में जितने भी बीएसए जिले में तैनात रहे हैं, उन्हें मास्टरमाइंड तमाम तरह की सुविधाएं पहुंचाता रहा है। इस संबंध में बीएसए राम सिंह ने बताया कि बर्खास्त शिक्षकों पर केस दर्ज कराया जाएगा। जांच चल रही है।
कई बीएसए व लिपिकों की भूमिका संदेह के घेरे में
- फर्जी शिक्षकों की बर्खास्तगी के बाद कई बीएसए व लिपिकों की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। सूत्र बताते हैं कि अगर मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी दई तो कई लोगों की गर्दन फंसेगी। 2016-17 में हुई नियुक्ति के मामले से भी पूर्व में कई फर्जी शिक्षक पकड़े जा चुके हैं, लेकिन तब विभाग ने फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया था।
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618 सीटों पर होनी थी नियुक्ति
- जिले में 618 सीटों पर शिक्षकों की नियुक्ति होनी थी। 649 लोगों की काउंसिलिंग के बाद 618 लोगों की नियुक्ति हुई। इसमें से 38 फर्जी शिक्षक बर्खास्त किए जा चुके हैं। शिकायतकर्ता अजय यादव का कहना है कि फर्जी शिक्षकों की संख्या इससे अधिक है। 45 शिक्षकों की डिग्री संदेह के घेरे में है।
भाई बर्खास्त, बहन की नौकरी बरकरार
- बर्खास्त हुए शिक्षकों में कई रिश्तेदार हैं। सबसे अधिक शिक्षक देवरिया जिले के एक ही थाना क्षेत्र के हैं। इसमें एक शिक्षक ऐसा भी है, जो बर्खास्त हो गया है, लेकिन उसकी बहन को विभाग ने बख्श दिया है। फर्जी शिक्षकों की सूची में उसका नाम भी था। जांच के दौरान से ही भाई-बहन फरार हैं।
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शिक्षकों की बर्खास्तगी के बाद बीएसए कार्यालय एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कहा जा रहा है कि फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर एक साल से अधिक समय तक नौकरी करना विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर संभव नहीं है। साठगांठ की वजह से ही फर्जी शिक्षकों को बिना सत्यापन ही वेतन दिया जाता रहा। मामला तब बिगड़ा जब शिकायतकर्ता अजय यादव ने डीएम से जांच कराने की मांग की। इसके बाद छानबीन शुरू हुई और फर्जी शिक्षकों का वेतन रोका गया, लेकिन उन लोगों ने जुगाड़ लगाकर वेतन बहाल करा लिया। विभागीय सूत्रों की माने तो मास्टरमाइंड ने एक बार इस्तीफा दे दिया था, जिसे विभाग ने स्वीकार नहीं किया। ऐसा मास्टरमाइंड का बीएसए से सेटिंग की वजह से हुआ। बताया जा रहा है कि आठ सालों में जितने भी बीएसए जिले में तैनात रहे हैं, उन्हें मास्टरमाइंड तमाम तरह की सुविधाएं पहुंचाता रहा है। इस संबंध में बीएसए राम सिंह ने बताया कि बर्खास्त शिक्षकों पर केस दर्ज कराया जाएगा। जांच चल रही है।
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कई बीएसए व लिपिकों की भूमिका संदेह के घेरे में
- फर्जी शिक्षकों की बर्खास्तगी के बाद कई बीएसए व लिपिकों की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। सूत्र बताते हैं कि अगर मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी दई तो कई लोगों की गर्दन फंसेगी। 2016-17 में हुई नियुक्ति के मामले से भी पूर्व में कई फर्जी शिक्षक पकड़े जा चुके हैं, लेकिन तब विभाग ने फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया था।
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618 सीटों पर होनी थी नियुक्ति
- जिले में 618 सीटों पर शिक्षकों की नियुक्ति होनी थी। 649 लोगों की काउंसिलिंग के बाद 618 लोगों की नियुक्ति हुई। इसमें से 38 फर्जी शिक्षक बर्खास्त किए जा चुके हैं। शिकायतकर्ता अजय यादव का कहना है कि फर्जी शिक्षकों की संख्या इससे अधिक है। 45 शिक्षकों की डिग्री संदेह के घेरे में है।
भाई बर्खास्त, बहन की नौकरी बरकरार
- बर्खास्त हुए शिक्षकों में कई रिश्तेदार हैं। सबसे अधिक शिक्षक देवरिया जिले के एक ही थाना क्षेत्र के हैं। इसमें एक शिक्षक ऐसा भी है, जो बर्खास्त हो गया है, लेकिन उसकी बहन को विभाग ने बख्श दिया है। फर्जी शिक्षकों की सूची में उसका नाम भी था। जांच के दौरान से ही भाई-बहन फरार हैं।