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पंजीयन 40 का और चल रहे 200 से अधिक नर्सिंग होम
सिद्धार्थनगर/ ब्यूरो
Updated Wed, 11 Jan 2017 11:23 PM IST
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नर्सिंग होम
- फोटो : amarujala
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सिद्धार्थनगर। जिलेे की बदहाल सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच निजी नर्सिंग होम का कारोबार तेजी से फल फूल रहा है। जिला मुख्यालय सहित पूरे जिले में 200 से अधिक निजी नर्सिंग होम चल रहे हैं, मगर सरकारी दस्तावेजों में सिर्फ 40 का ही पंजीयन है। बाकी के नर्सिंग होम बिना परमिशन के चल रहे हैं और स्वास्थ्य महकमा सब कुछ जानकर भी मौन साधे बैठा है।
जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है। सामुदायिक और प्राथमिक चिकित्सालयों के भवन पूरे जिले में हैं पर सरकारी चिकित्सकों की अनुपलब्धता के बीच यहां निजी चिकित्सालयों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पूरे जनपद में दो सौ अधिक नर्सिंग होम चल रहे हैं जो मानकों पर खरे नहीं उतरते। निजी नर्सिंग होम खोलने के लिए उच्च स्तर से नियम कानून तय किए गए हैं वहीं जिले में इन कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। भवन निर्माण से लेकर उपलब्ध सुविधा सहूलियत की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का नियम है पर जिले में दो कमरे के मकान को भी नर्सिंग होम की शक्ल दे दी गई है। ऐसे नर्सिंग होम चल रहे हैं जो पर्दे की ओट में ऑपरेशन थियेटर की सुविधा मुहैया करा रहे हैं। यहां न तो वाहनों को पार्क करने की समुचित व्यवस्था है और न ही मरीजों और परिजनों के लिए वेटिंग हाल। नर्सिंग होम के लिए जरूरी है कि उपलब्ध सेवाओं के विवरण और तय शुल्क को दर्शाता हुआ ग्लोशाइन बोर्ड लगाएं पर किसी भी निजी चिकित्सालय ने इस नियम के पालन की जरूरत नहीं समझी। इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेंद्र कपूर ने कहा कि गैर पंजीकृत चिकित्सालयों के खिलाफ जांच अभियान शुरू होगा। नियम का उल्लंघन मिला तो कार्रवाई तय समझें।
वेस्ट डिस्पोजल सिस्टम नहीं
डॉ. विपिन चौधरी का कहना है कि पर्यावरण सुरक्षा और संक्रमण को देखते हुए बायो मेडिकल वेस्ट के लिए डिस्पोजल सिस्टम की अनिवार्यता है पर कोई भी नर्सिंग होम इसका अनुपालन नहीं कर रहे। खुले में अथवा नगर पालिका के माध्यम से ही मेडिकल वेस्ट का निपटान हो रहा है जो मैनेजमेंट एंड हैंडलिंग एक्ट 2000 का उल्लंघन हैं ऐसे नर्सिंग होम पर कार्रवाई आवश्यक है जो इलाज के साथ बीमारियां बांट रहे हैं।
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बाहरी डॉक्टरों का भरोसा
निजी चिकित्सालय बाहर के चिकित्सकों के भरोसे चल रहे हैं। चिकित्सालयों में गोरखपुर, बांसगांव, देवरिया, बस्ती, संतकबीरनगर और महराजगंज जिले से आने वाले डॉक्टरों की भरमार है। चिकित्सक इन्हीं चिकित्सालयों में तय फीस पर सलाह और आपरेशन की सेवा दे रहे हैं। इन चिकित्सकों को भी सीएमओ ऑफिस में पंजीयन कराना होता है पर इसकी अनदेखी हो रही है।
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जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है। सामुदायिक और प्राथमिक चिकित्सालयों के भवन पूरे जिले में हैं पर सरकारी चिकित्सकों की अनुपलब्धता के बीच यहां निजी चिकित्सालयों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पूरे जनपद में दो सौ अधिक नर्सिंग होम चल रहे हैं जो मानकों पर खरे नहीं उतरते। निजी नर्सिंग होम खोलने के लिए उच्च स्तर से नियम कानून तय किए गए हैं वहीं जिले में इन कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। भवन निर्माण से लेकर उपलब्ध सुविधा सहूलियत की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का नियम है पर जिले में दो कमरे के मकान को भी नर्सिंग होम की शक्ल दे दी गई है। ऐसे नर्सिंग होम चल रहे हैं जो पर्दे की ओट में ऑपरेशन थियेटर की सुविधा मुहैया करा रहे हैं। यहां न तो वाहनों को पार्क करने की समुचित व्यवस्था है और न ही मरीजों और परिजनों के लिए वेटिंग हाल। नर्सिंग होम के लिए जरूरी है कि उपलब्ध सेवाओं के विवरण और तय शुल्क को दर्शाता हुआ ग्लोशाइन बोर्ड लगाएं पर किसी भी निजी चिकित्सालय ने इस नियम के पालन की जरूरत नहीं समझी। इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेंद्र कपूर ने कहा कि गैर पंजीकृत चिकित्सालयों के खिलाफ जांच अभियान शुरू होगा। नियम का उल्लंघन मिला तो कार्रवाई तय समझें।
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वेस्ट डिस्पोजल सिस्टम नहीं
डॉ. विपिन चौधरी का कहना है कि पर्यावरण सुरक्षा और संक्रमण को देखते हुए बायो मेडिकल वेस्ट के लिए डिस्पोजल सिस्टम की अनिवार्यता है पर कोई भी नर्सिंग होम इसका अनुपालन नहीं कर रहे। खुले में अथवा नगर पालिका के माध्यम से ही मेडिकल वेस्ट का निपटान हो रहा है जो मैनेजमेंट एंड हैंडलिंग एक्ट 2000 का उल्लंघन हैं ऐसे नर्सिंग होम पर कार्रवाई आवश्यक है जो इलाज के साथ बीमारियां बांट रहे हैं।
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बाहरी डॉक्टरों का भरोसा
निजी चिकित्सालय बाहर के चिकित्सकों के भरोसे चल रहे हैं। चिकित्सालयों में गोरखपुर, बांसगांव, देवरिया, बस्ती, संतकबीरनगर और महराजगंज जिले से आने वाले डॉक्टरों की भरमार है। चिकित्सक इन्हीं चिकित्सालयों में तय फीस पर सलाह और आपरेशन की सेवा दे रहे हैं। इन चिकित्सकों को भी सीएमओ ऑफिस में पंजीयन कराना होता है पर इसकी अनदेखी हो रही है।