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36 हजार नौनिहाल, बालरोग विशेषज्ञ नहीं
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36 हजार नौनिहाल, बालरोग विशेषज्ञ ही नहीं
बढ़नी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर नहीं हैं बालरोग विशेषज्ञ
संवाद न्यूज एजेंसी
परसा। भारत-नेपाल की सीमा पर बसे बढ़नी उपनगर में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर लगभग सात वर्षों से कोई बालरोग विशेषज्ञ नहीं हैं। बालरोग के चिकित्सक नहीं होने से कोरोना के तीसरे लहर से लगभग 36 हजार नौनिहालों को सुरक्षित रख पाना मुश्किल दिखाई दे रहा है। क्षेत्रवासियों के मांग पर भी बालरोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई। इस कारण ग्रामीण अप्रशिक्षित डॉक्टरों से बच्चों का इलाज करवाने को मजबूर हैं।
बढ़नी उपनगर में स्थित पीएचसी में भारतीय इलाके समेत नेपाली नागरिक भी इलाज के लिए आते हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक बढ़नी ब्लॉक में सात माह से छह वर्ष तक कुल 36572 बच्चे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सितंबर-अक्टूबर माह से कोरोना की तीसरी लहर डेल्टा प्लस के आने की चेतावनी दी है। जानकारों के अनुसार कोरोना संक्रमण के तीसरी लहर का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ेगा। लेकिन बढ़नी पीएचसी पर बालरोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होना स्वास्थ्य विभाग व क्षेत्रीय लोगों की चिंता बढ़ा रही है। क्षेत्र के रहने वाले आशुतोष शुक्ल, मो. हारुन, सुरेंद्र चौहान, मो. शफीक, संकटा प्रसाद पांडेय, रामानंद चौहान का कहना है कि सामान्य समय पर भी अगर किसी बच्चे की तबीयत खराब हो जाती है तो परिजनों को या तो उसका इलाज जिला मुख्यालय पर करवाना पड़ता है या तो झोलाछाप डॉक्टर की शरण में जाना होता है। कोरोना संक्रमण के तीसरी लहर का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ने वाला है। इस स्थिति में बढ़नी पीएचसी पर बालरोग विशेषज्ञ के नहीं होने से क्षेत्रवासियों के लिए आने वाला समय बड़ी समस्या खड़ी करने वाला है। इस बाबत सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि समस्या का समाधान जल्द ही हो जाएगा।
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बढ़नी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर नहीं हैं बालरोग विशेषज्ञ
संवाद न्यूज एजेंसी
परसा। भारत-नेपाल की सीमा पर बसे बढ़नी उपनगर में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर लगभग सात वर्षों से कोई बालरोग विशेषज्ञ नहीं हैं। बालरोग के चिकित्सक नहीं होने से कोरोना के तीसरे लहर से लगभग 36 हजार नौनिहालों को सुरक्षित रख पाना मुश्किल दिखाई दे रहा है। क्षेत्रवासियों के मांग पर भी बालरोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई। इस कारण ग्रामीण अप्रशिक्षित डॉक्टरों से बच्चों का इलाज करवाने को मजबूर हैं।
बढ़नी उपनगर में स्थित पीएचसी में भारतीय इलाके समेत नेपाली नागरिक भी इलाज के लिए आते हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक बढ़नी ब्लॉक में सात माह से छह वर्ष तक कुल 36572 बच्चे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सितंबर-अक्टूबर माह से कोरोना की तीसरी लहर डेल्टा प्लस के आने की चेतावनी दी है। जानकारों के अनुसार कोरोना संक्रमण के तीसरी लहर का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ेगा। लेकिन बढ़नी पीएचसी पर बालरोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होना स्वास्थ्य विभाग व क्षेत्रीय लोगों की चिंता बढ़ा रही है। क्षेत्र के रहने वाले आशुतोष शुक्ल, मो. हारुन, सुरेंद्र चौहान, मो. शफीक, संकटा प्रसाद पांडेय, रामानंद चौहान का कहना है कि सामान्य समय पर भी अगर किसी बच्चे की तबीयत खराब हो जाती है तो परिजनों को या तो उसका इलाज जिला मुख्यालय पर करवाना पड़ता है या तो झोलाछाप डॉक्टर की शरण में जाना होता है। कोरोना संक्रमण के तीसरी लहर का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ने वाला है। इस स्थिति में बढ़नी पीएचसी पर बालरोग विशेषज्ञ के नहीं होने से क्षेत्रवासियों के लिए आने वाला समय बड़ी समस्या खड़ी करने वाला है। इस बाबत सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि समस्या का समाधान जल्द ही हो जाएगा।
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