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Siddharthnagar News: 23 किसानों ने 63 बार बेचा एक ही केंद्र पर धान

Tue, 25 Mar 2025 10:52 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 25 Mar 2025 10:52 PM IST
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23 farmers sold paddy 63 times at the same center
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। धान खरीद में हुए घोटाले की जांच में परत दर परत सच्चाई सामने आ रही है कि कैसे 16 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाला किया गया। पूरा घोटाला सुनियोजित ढंग से किया गया है।
क्योंकि एक ही क्रय केंद्र पर 23 किसानों ने 63 बार धान बेचा और उसी बैंक खाते में हर बार भुगतान किया गया। गड़बड़ी का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि किस प्रकार से इस महा घोटाला को अंजाम दिया गया है।
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सत्यापन से लेकर खरीद बेचने वाले किसानों के रकबे को तक को खंगाला जा रहा है। इसमें बिना रकबा वाले किसानों के नाम से बिक्री और उठान करने तक की बात सामने आई है। मामले की जांच कर रही है एसआईटी हर बिंदुओं को खंगाल रही है।
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जांच की जद में आए 37 क्रय केंद्रों में सेमरहना की बिक्री बैंक खाते और किसान नजर में है। जांच पूरी होने तक कई लोग इसकी जद में आएंगे। अब की जांच में पांच केंद्र प्रभारी जेल जा चुके हैं।
जिले में 2023-2024 में धान खरीद में 16 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला उजागर हुआ था। इस मामले में पीसीएफ क्षेत्रीय प्रबंधक ने जिला प्रबंधक अमित चौधरी व एक अन्य पर घोटाला के मामले में केस दर्ज करवाया था।
इस मामले की जांच जा रही थी कि डीआईजी बस्ती ने मामले को संज्ञान में लेते हुए एसआईटी गठित की। इसमें एक सीओ और दो इंस्पेक्टर आदि शामिल हैं। जो मामले की जांच कर रहे हैं किसी के बयान लेने के साथ ही कार्रवाई कर रहे हैं। कुछ माह पहले बांसी कोतवाली की पुलिस दो केंद्र प्रभारियों को जेल भेजी थी।
वहीं, एसआईटी टीम के सदस्य व तत्कालीन शहर कोतवाल संतोष कुमार तिवारी ने तीन केंद्र प्रभारियों की गिरफ्तारी की थी, लेकिन जैसे- जैसे जांच की दायरा बढ़ रहा है कि घोटाला किस स्तर पर किया गया है। इसकी सच्चाई सामने आने लगी है। पूरे घटनाक्रम में पर गौर करें तो इस निष्कर्ष पर पहुंचेंगे, महा घोटाला में पूरा एक सिस्टम काम किया है। पूरी प्लानिंग के तहत सरकारी धन का गबन किया गया है।
एमएलसी कर चुके हैं घोटाले की जांच की मांग : शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने नियम के 105 के तहत पांच मार्च को मामले को उठाते हुए कहा कि सिद्धार्थनगर कृषि प्रधान एवं आकांक्षी जनपद है। इस जनपद में वर्ष 2023-24 में धान खरीद क्रय केन्द्र डीसीएफ तथा क्रय एजेंसी पीसीएफ की ओर से अपने चहेते कर्मचारियों एवं अन्य के माध्यम से जो फर्जीवाड़ा किया गया।
उससे जहां जनपद के सामान्य किसान अपने धान की बिक्री न कर पाने से अपने आपको असहाय एवं उपेक्षित महसूस कर रहे हैंं। वहीं फर्जीवाड़ा करने वाले लोग जो इस जनपद के निवासी भी नहीं है, लेकिन अधिकारियों के चहेते बने होने के कारण भूमिहीन होते हुए भी सैकड़ों क्विंटल धान के परमिट प्राप्त कर लिए और अपने बैंक खाते में बिना धान बेचे ही लाखों रुपये अर्जित किये हुए हैं। उदाहरण स्वरूप खाद्य विपणन अधिकारी के कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर का कार्य करने वाले जो मूलरूप से ऑपरेटर भी है।

फर्जी आईडी बनाकर 334 क्विंटल धान विक्रय किया, जिसका सत्यापन जनपद स्तर के अधिकारी की ओर से किया गया। वह दूसरे जनपद का है और भूमिहीन भी है। साथ ही साथ एक अन्य आईडी से भूमिहीन तथाकथित किसान जो जिले तहसील नौगढ़ के एक गांव निवासी है, उसने भी 231 क्विंटल फर्जी रूप से धान की बिक्री किया। इसके अलावा करौंदा मसिना केंद्र आर बर्डपुर के एक व्यक्ति ने 210 क्विंटल बेच लिया।
इसी प्रकार भारतीय खाद्य विभाग की ओर से वर्ष 2024-25 में तहसील नौगढ़ के धेंसा नानकार (ए) पर एफसीएस के गेहूं क्रय केन्द्र 205 क्विंटल बेच लिया है।
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