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घोषणाओं तक सिमटा कपिलवस्तु का विकास

Tue, 04 Dec 2018 10:55 PM IST
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siddharthnagar Updated Tue, 04 Dec 2018 10:55 PM IST
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devlopment  of kapilvastu is only anauncment
मुख्यालय पर पर्यटक आवास गृह खंडहर में तब्दील - फोटो : अमर उजाला
सिद्धार्थनगर। विकास के जरिए कपिलवस्तु को विश्व मानचित्र पर स्थापित करने की घोषणाएं तो बहुत हुईं, लेकिन वे सिर्फ कागजों में दर्ज होकर रह गईं। जो काम हुए वे भी उपेक्षा के शिकार हो चुके हैं। बीते तीन दशक में अरबों की लागत से कई आलीशान भवन बने, लेकिन आज भी उनका समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है। इनमें से कई तो खंडहर बनते जा रहे हैं। हालात यह है कि ठहरने की बेहतर सुविधा और खानपान की उचित व्यवस्था न होने से कपिलवस्तु आने वाले पर्यटक शाम होते ही शहर की ओर रुख कर लेते हैं।
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मुख्यालय से 22 किमी. दूर नेपाल सीमा के करीब स्थित भगवान बुद्ध की जन्मस्थली कपिलवस्तु में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 22 मई 1997 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने करोड़ों की परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इनमें बौद्ध संग्रहालय व कला वीथिका भवन का ही निर्माण हो सका। हवाई पट्टी की योजना को कल्याण सिंह ने मुख्यमंत्री रहते हुए निरस्त कर दिया था। इसके बाद भी कई घोषणाएं हुईं, लेकिन उन पर अमल नहीं हुआ।
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आवास गृह में नहीं पड़े पर्यटकों के कदम
- विदेशी पर्यटकों के लिए वर्ष 1987-88 में मुख्यालय पर रोडवेज के पास 11 लाख की लागत से पर्यटक आवास गृह का निर्माण कराया गया। 29 दिसंबर 1988 को जिला बनने के बाद यह प्रथम एसपी, पीडी आदि अफसरों का आशियाना बन गया। उनके जाने के बाद इसे लोक निर्माण विभाग का स्टोर बना दिया गया। अब यह खाली है, लेकिन बीते पांच वर्षों से संचालन की कवायद हो रही है। बीते वर्ष फरीदाबाद की एक संस्था ने टेंडर भरा था, लेकिन आवागमन की सुविधा न होने से मन बदल लिया।
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बंद पड़ा है होटल शाक्य
- कपिलवस्तु स्थित मुख्य स्तूप से पास अधिग्रहीत क्षेत्र में वर्ष 1994-95 में पर्यटन विभाग ने होटल शाक्य का निर्माण कराया था। दो-तीन साल तक होटल चला और फिर इसे बंद करना पड़ गया। इसका कारण था कि यहां सिर्फ एक चौकीदार की तैनाती की गई थी। साथ ही खानपान की कोई व्यवस्था नहीं थी। इस होटल के संचालन की कई बार कोशिश हुई, लेकिन सफलता नहीं मिली। आज यह होटल बदहाल है। दरवाजा टूट चुके हैं। खिड़कियों के शीशे गायब हैं।


बौद्ध हेरिटेज सेंटर भी अनुपयोगी
- वर्ष 1997-98 में होटल शाक्य के बगल में बौद्ध हेरिटेज सेंटर का निर्माण हुआ। उद्घाटन भी हुआ, लेकिन साधन और संसाधन की कमी से यह किसी काम न आ सका। आज यह भवन खंडहर में तब्दील हो रहा है।


शिलान्यास तक सिमटी 180 फीट ऊंची प्रतिमा
- वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री व वर्तमान केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कपिलवस्तु आकर 180 फीट ऊंची बुद्ध की प्रतिमा का शिलान्यास किया था। इसके बाद से किसी भी सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
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राज्यांश के अभाव में अधर में बुद्धा थीम पार्क
- वर्ष 2012-13 में बुद्धा थीम पार्क के लिए 3 करोड़ 66 लाख 72 हजार रुपये का बजट स्वीकृत हुआ। केंद्र ने अपने हिस्से के 2 करोड़ 58 लाख 60 हजार रुपये आवंटित कर दिए, लेकिन एक करोड़ 8 लाख 14 हजार रुपये का राज्यांश नहीं मिलने से काम अधूरा पड़ा है।

आधुनिक सुलभ शौचालय बंद
- सपा शासन में वर्ष 2013-14 में कपिलवस्तु क्षेत्र में 93 लाख की लागत से 35 सीटेड सुलभ शौचालय, रेस्टोरेंट का निर्माण कराया गया था। संचालन के लिए गाइड लाइन तय न होने से ये बंद पड़े हैं।



- पर्यटकों की सुविधाओं के लिए मुख्यालय समेत कपिलवस्तु क्षेत्र में कई भवनों का निर्माण हुआ है। कुछ संचालित भी हैं। अन्य भवनों के संचालन को लेकर समय-समय पर पत्र व्यवहार किया जा रहा है। निर्णय शासन स्तर से लिया जाना है।
-अरविंद कुमार राय, क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी
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