{"_id":"5b803b0942c792465e1e9091","slug":"101535130377-siddharthnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिन्दू हूं न मैं मुसलमान हूं, मैं तो इंसान हूं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिन्दू हूं न मैं मुसलमान हूं, मैं तो इंसान हूं
siddharthnagar
Updated Fri, 24 Aug 2018 11:01 PM IST
विज्ञापन
अमर उजाला
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांसी। आजाद नगर शीतलगंज स्थित श्रीठाकुर रामजानकी मंदिर परिसर में गुरुवार की रात कवि सम्मेलन हुआ। देर रात तक श्रोता काव्यामृत का रसपान कर रचनाकारों का उत्साहवर्धन करते रहे। इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई।
कार्यक्रम के संरक्षक माधव प्रसाद धर द्विवेदी ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन व माल्यार्पण से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। स्थानीय रचनाकार सुशील श्रीवास्तव सागर ने मां सरस्वती की वंदना व अपनी रचना- ‘हिंदू हूं न मैं मुसलमान हूं, मैं तो इंसान हूं, मैं तो इंसान हूं...’ गीत से आगाज किया।
लखीमपुर खीरी से आईं कवियित्री रंजना सिंह ने बेटियों पर बढ़ते अत्याचार पर ‘रोज ससुराल में जलती है बहू सुनते हैं, ऐ हया अब मुझे शहनाई से डर लगता है...’ सुनाकर माहौल को संजीदा बना दिया और खूब तालियां बटोरीं। कवि ब्रम्हदेव शास्त्री पंकज ने अपनी रचना- ‘रूप, रंग, जाति, धर्म, गांव, शहर में फिर से मेरा देश बांटा जा रहा है क्या, जंग जीतने के लिए हाथ जोड़कर राम राम राम राम जपा जा रहा है क्या...’ से कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान की। कवयित्री प्रेमलता द्विवेदी लता ने ‘बहेला पवन रसधार हो बदरिया घेरी अइली सजना...’ कजरी से अपनी बात शुरू कर अपनी कई रचनाओं से खूब वाहवाही बटोरी।
विज्ञापन
शायर जमाल कुद्दुसी ने ‘बोइये पहले वो बीज तो आप फिर मीठा फल ढूंढिए...’ से बात शुरू करके अपनी गजलें व नज्में सुनाकर लोगों को सोचने पर विवश कर दिया। सतीश आर्य, डॉ. रामकृष्ण लाल, जगमग, हास्य कवि रत्नेश चतुर्वेदी, रतन व राकेश त्रिपाठी गवांर, पंकज सिद्धार्थ, शिवसागर सहर, सलमान आमिर ने भी अपनी रचनाओं की प्रस्तुति से वाहवाही बटोरी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सांसद डॉ. चन्द्रशेखर त्रिपाठी व संचालन वरिष्ठ कवि डॉ. ज्ञानेंद्र द्विवेदी दीपक ने किया। इस दौरान एसडीएम प्रबुद्ध सिंह व नगर पालिका अध्यक्ष इद्रीस राइनी पटवारी ने अंत तक रचनाकारों की हौसलाअफजाई की। इस अवसर पर राम मिलन पांडेय, संयोजक आचार्य हरिवेंद्र त्रिपाठी, एडवोकेट रमेशचंद्र उपाध्याय, सुरेंद्र श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
कार्यक्रम के संरक्षक माधव प्रसाद धर द्विवेदी ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन व माल्यार्पण से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। स्थानीय रचनाकार सुशील श्रीवास्तव सागर ने मां सरस्वती की वंदना व अपनी रचना- ‘हिंदू हूं न मैं मुसलमान हूं, मैं तो इंसान हूं, मैं तो इंसान हूं...’ गीत से आगाज किया।
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी से आईं कवियित्री रंजना सिंह ने बेटियों पर बढ़ते अत्याचार पर ‘रोज ससुराल में जलती है बहू सुनते हैं, ऐ हया अब मुझे शहनाई से डर लगता है...’ सुनाकर माहौल को संजीदा बना दिया और खूब तालियां बटोरीं। कवि ब्रम्हदेव शास्त्री पंकज ने अपनी रचना- ‘रूप, रंग, जाति, धर्म, गांव, शहर में फिर से मेरा देश बांटा जा रहा है क्या, जंग जीतने के लिए हाथ जोड़कर राम राम राम राम जपा जा रहा है क्या...’ से कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान की। कवयित्री प्रेमलता द्विवेदी लता ने ‘बहेला पवन रसधार हो बदरिया घेरी अइली सजना...’ कजरी से अपनी बात शुरू कर अपनी कई रचनाओं से खूब वाहवाही बटोरी।
विज्ञापन
शायर जमाल कुद्दुसी ने ‘बोइये पहले वो बीज तो आप फिर मीठा फल ढूंढिए...’ से बात शुरू करके अपनी गजलें व नज्में सुनाकर लोगों को सोचने पर विवश कर दिया। सतीश आर्य, डॉ. रामकृष्ण लाल, जगमग, हास्य कवि रत्नेश चतुर्वेदी, रतन व राकेश त्रिपाठी गवांर, पंकज सिद्धार्थ, शिवसागर सहर, सलमान आमिर ने भी अपनी रचनाओं की प्रस्तुति से वाहवाही बटोरी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सांसद डॉ. चन्द्रशेखर त्रिपाठी व संचालन वरिष्ठ कवि डॉ. ज्ञानेंद्र द्विवेदी दीपक ने किया। इस दौरान एसडीएम प्रबुद्ध सिंह व नगर पालिका अध्यक्ष इद्रीस राइनी पटवारी ने अंत तक रचनाकारों की हौसलाअफजाई की। इस अवसर पर राम मिलन पांडेय, संयोजक आचार्य हरिवेंद्र त्रिपाठी, एडवोकेट रमेशचंद्र उपाध्याय, सुरेंद्र श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।