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म्यामार से आए उपासकों ने की विश्व कल्याण की प्रार्थना
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गंध कुटि पर धर्म उपदेश सुनते अनुयायी।
- फोटो : SRAWASTI
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कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में शनिवार को म्यामार से आए उपासकों ने पारंपरिक वेशभूषा व रीति रिवाज से गंध कुटि पर विशेष प्रार्थना की। इस दौरान उन्हें बौद्ध भिक्षु ओ बाथा ने धर्म उपदेश दिया। प्रार्थना के बाद दल के सदस्यों ने तपोस्थली के विभिन्न मूमेंटों का भ्रमण किया। इस दौरान तपोस्थली बौद्ध अनुयायियों से गुलजार रही।
बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती के आनंद बोधि पर म्यामार से आए अनुयायियों ने गंधकुटि पर विश्व कल्याण के लिए प्रार्थना की। इस दौरान बौद्ध भिक्षु ओ बाथा ने बताया कि एक बार गौतम बुद्ध अपने शिष्यों के साथ एक गांव से दूसरे शहर में जा रहे थे। शहर काफी दूर था। इसलिए यात्रा करते समय वह अपने शिष्यों की थकान मिटाने के लिए एक झील के पास रुके।
इसके बाद उन्होंने प्यास बुझाने के लिए अपने एक शिष्य को झील से पानी लाने को कहा। वह शिष्य गौतम बुद्ध की आज्ञा पाकर बर्तन में पानी लेने चला गया। झील के पास जाकर उसने देखा की कुछ लोग पानी में कपड़े धो रहे है। उसी समय एक बैलगाड़ी भी झील के किनारे से जाने लगी। इससे सारी मिट्टी पानी में घुलकर पानी गंदा हो गया। इसके बाद शिष्य खाली हाथ लौट आया।
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इस दौरान अनुयायियों ने गंध कुटि की परिक्रमा भी की। इस मौके पर अनुयायियों ने बुद्धम शरणम गच्छामि का उच्चारण भी किया। इसके बाद उपासकों ने जेतवन, शिवली स्तूप, कौशांबी कुटि, सभामंडप, आनंद बोधि, अंगुलिमाल गुफा सहित समूची तपोस्थली का भ्रमण किया। इस मौके पर माता विद्यावती, सुख सागर, नाग ज्योति, नाव रत्न आदि बौद्ध भिक्षु व उपासक मौजूद रहे।
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बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती के आनंद बोधि पर म्यामार से आए अनुयायियों ने गंधकुटि पर विश्व कल्याण के लिए प्रार्थना की। इस दौरान बौद्ध भिक्षु ओ बाथा ने बताया कि एक बार गौतम बुद्ध अपने शिष्यों के साथ एक गांव से दूसरे शहर में जा रहे थे। शहर काफी दूर था। इसलिए यात्रा करते समय वह अपने शिष्यों की थकान मिटाने के लिए एक झील के पास रुके।
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इसके बाद उन्होंने प्यास बुझाने के लिए अपने एक शिष्य को झील से पानी लाने को कहा। वह शिष्य गौतम बुद्ध की आज्ञा पाकर बर्तन में पानी लेने चला गया। झील के पास जाकर उसने देखा की कुछ लोग पानी में कपड़े धो रहे है। उसी समय एक बैलगाड़ी भी झील के किनारे से जाने लगी। इससे सारी मिट्टी पानी में घुलकर पानी गंदा हो गया। इसके बाद शिष्य खाली हाथ लौट आया।
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इस दौरान अनुयायियों ने गंध कुटि की परिक्रमा भी की। इस मौके पर अनुयायियों ने बुद्धम शरणम गच्छामि का उच्चारण भी किया। इसके बाद उपासकों ने जेतवन, शिवली स्तूप, कौशांबी कुटि, सभामंडप, आनंद बोधि, अंगुलिमाल गुफा सहित समूची तपोस्थली का भ्रमण किया। इस मौके पर माता विद्यावती, सुख सागर, नाग ज्योति, नाव रत्न आदि बौद्ध भिक्षु व उपासक मौजूद रहे।