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मन शुद्ध होने पर प्रकृति भी आपकी सुनती है : दीपालोक
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गंध कुटी में फूल पूजा करते अनुयायी।
- फोटो : गंध कुटी में फूल पूजा करते अनुयायी।
कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती बृहस्पतिवार को श्रीलंका से आए अनुयायियों के 40 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु दीपालोक महाथेरो के नेतृत्व में पारंपरिक रीति-रिवाज से गंध-कुटी में पूजा-अर्चना की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
सभा में भिक्षु दीपालोक महाथेरो ने कहा कि मन को शांत करने और लालसा व घृणा से दूर रखने का सबसे बेहतर साधन ध्यान है। जिस प्रकार झील की सतह पर लहरें होने से हम उसकी गहराई का अंदाजा नहीं लगा सकते, ठीक उसी तरह बिना मन की शांति के अपने अंदर सामंजस्य व एकता का अनुभव नहीं कर सकते।
ध्यान हमें अधिक तेज, खुशहाल और अंतर्ज्ञानी बनाता है। जब मन वासना, लोभ, स्वामित्व और अहंकार से मुक्त हो जाता है, तो प्रकृति भी आपकी सुनती है। सभी अनुयायियों ने कच्ची कुटी-पक्की कुटी, संघाराम बुद्ध विहार, गंध कुटी, सूर्यकुंड, सभा मंडप, कौशाम कुटी, शिवली स्तूप, राहुल कुटी, संघमित्रा कुटी, आनंद कुटी, ओड़ाझार टीला आदि का भ्रमण कर उनके इतिहास की जनकारी ली।
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सभा में भिक्षु दीपालोक महाथेरो ने कहा कि मन को शांत करने और लालसा व घृणा से दूर रखने का सबसे बेहतर साधन ध्यान है। जिस प्रकार झील की सतह पर लहरें होने से हम उसकी गहराई का अंदाजा नहीं लगा सकते, ठीक उसी तरह बिना मन की शांति के अपने अंदर सामंजस्य व एकता का अनुभव नहीं कर सकते।
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ध्यान हमें अधिक तेज, खुशहाल और अंतर्ज्ञानी बनाता है। जब मन वासना, लोभ, स्वामित्व और अहंकार से मुक्त हो जाता है, तो प्रकृति भी आपकी सुनती है। सभी अनुयायियों ने कच्ची कुटी-पक्की कुटी, संघाराम बुद्ध विहार, गंध कुटी, सूर्यकुंड, सभा मंडप, कौशाम कुटी, शिवली स्तूप, राहुल कुटी, संघमित्रा कुटी, आनंद कुटी, ओड़ाझार टीला आदि का भ्रमण कर उनके इतिहास की जनकारी ली।
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