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Shravasti News: रासलीला मंचन से मोह लिया मन
Tue, 19 Aug 2025 12:49 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Tue, 19 Aug 2025 12:49 AM IST
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कटरा स्थित श्रीराम जानकी मंदिर में श्रीराधा कृष्ण स्वरूप की पूजा करते श्रद्धालु। -संवाद
कटरा (श्रावस्ती)। श्रीराम जानकी मंदिर कटरा में रविवार शाम से छह दिवसीय रासलीला व कथा का शुभारंभ हुआ। पहले दिन पंडित संदीप महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का बखान किया। वृंदावन से आए कलाकारों ने रासलीला का मंचन कर सभी का मन मोह लिया।
प्रवाचक पंडित संदीप महाराज ने कहा कि गोकुल और वृंदावन की गोपियों का भगवान कृष्ण से अविश्वसनीय रिश्ता रहा। गोपियों की कहानी गहरे प्रेम और समर्पण की कहानी है, लेकिन यह केवल भौतिक प्रेम नहीं, बल्कि सर्वोच्च प्रेम था।
उन्होंने आगे कहा कि हिंदू वैष्णव धर्मशास्त्र ने इसे शुद्ध-भक्ति कहा है, जिसका अर्थ है भगवान कृष्ण के प्रति निस्वार्थ प्रेम का सर्वोच्च रूप। ऐसा लिखा है कि ब्रज की गोपियां पूर्वजन्म में तपस्वी थीं और श्रीकृष्ण की परम भक्त थीं। इसलिए उनका जन्म उस गांव में गोपियों के रूप में हुआ, जहां श्रीकृष्ण का पालन-पोषण होना था।
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वृंदावन से आए कलाकारों ने श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का मंचन किया, जिसे देख लोग मंत्रमुग्ध हो गए। इस मौके पर ग्राम प्रधान छांगुर प्रसाद, धनीराम, सिद्धनाथ जायसवाल, संतोष पटवा, दयानंद साहू, रामकुमार गुप्ता, दिनेश कुमार चौरसिया, राघव राम साहू, आचार्य देवमणि पांडेय, पंकज सैनी व मंगलेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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प्रवाचक पंडित संदीप महाराज ने कहा कि गोकुल और वृंदावन की गोपियों का भगवान कृष्ण से अविश्वसनीय रिश्ता रहा। गोपियों की कहानी गहरे प्रेम और समर्पण की कहानी है, लेकिन यह केवल भौतिक प्रेम नहीं, बल्कि सर्वोच्च प्रेम था।
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उन्होंने आगे कहा कि हिंदू वैष्णव धर्मशास्त्र ने इसे शुद्ध-भक्ति कहा है, जिसका अर्थ है भगवान कृष्ण के प्रति निस्वार्थ प्रेम का सर्वोच्च रूप। ऐसा लिखा है कि ब्रज की गोपियां पूर्वजन्म में तपस्वी थीं और श्रीकृष्ण की परम भक्त थीं। इसलिए उनका जन्म उस गांव में गोपियों के रूप में हुआ, जहां श्रीकृष्ण का पालन-पोषण होना था।
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वृंदावन से आए कलाकारों ने श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का मंचन किया, जिसे देख लोग मंत्रमुग्ध हो गए। इस मौके पर ग्राम प्रधान छांगुर प्रसाद, धनीराम, सिद्धनाथ जायसवाल, संतोष पटवा, दयानंद साहू, रामकुमार गुप्ता, दिनेश कुमार चौरसिया, राघव राम साहू, आचार्य देवमणि पांडेय, पंकज सैनी व मंगलेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।