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पृथ्वी पर जीवन के लिए महत्वपूर्ण है जल
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श्रावस्ती। हरिहरपुररानी विकास क्षेत्र के ग्राम गोठवा में विश्व जल दिवस को विश्व जल दिवस सप्ताह के रूप में मनाया जा रहा है। इसी के क्रम में मंगलवार को पिरामल फाउंडेशन द्वारा एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ग्रामीणों को जल संचयन के बारे में जानकारी देकर जागरूक किया गया।
फाउंडेशन की रचना ने जल के महत्व, जल का बचाव, जल संरक्षण करने के तरीके, वर्षा जल संचयन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने कहाकि जल एक ऐसा दुर्लभ प्राकृतिक संसाधन है, जो सिर्फ कृषि कार्यों के लिए ही नहीं बल्कि पृथ्वी पर जीवन के लिए भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है। लेकिन आज चिंतनीय स्थिति यह है कि जल की कमी का संकट न केवल भारत बल्कि दुनिया के लगभग सभी देशों की एक विकट समस्या बन चुका है। प्राणी और पौधों के आवश्यक तत्वों में पानी जीवन की प्रमुख आवश्यकता होती है।
इसके बिना प्राणी और पौधों का अस्तित्व समाप्त होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। यह तो हम सभी अच्छे से जानते हैं कि धरती के करीब तीन चौथाई हिस्से पर पानी है। जो महासागरों, बर्फ, झीलों, नदियों और झरनों के रूप में उपलब्ध है। इसमें से एक फीसदी से भी कम पानी पीने योग्य है। ऐसे में हम पीने योग्य पानी की बचत करें। जिससे भविष्य में पानी का गंभीर समस्या न हो। इस दौरान मौजूद लोगों को वर्षा जल संचयन, आने वाले समय में पानी की होने वाली कमी से बचाव, इसके दुरुपयोग को कम करने व भूमिगत जल स्तर बनाए रखने के बारे में जानकारी दी गई।
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फाउंडेशन की रचना ने जल के महत्व, जल का बचाव, जल संरक्षण करने के तरीके, वर्षा जल संचयन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने कहाकि जल एक ऐसा दुर्लभ प्राकृतिक संसाधन है, जो सिर्फ कृषि कार्यों के लिए ही नहीं बल्कि पृथ्वी पर जीवन के लिए भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है। लेकिन आज चिंतनीय स्थिति यह है कि जल की कमी का संकट न केवल भारत बल्कि दुनिया के लगभग सभी देशों की एक विकट समस्या बन चुका है। प्राणी और पौधों के आवश्यक तत्वों में पानी जीवन की प्रमुख आवश्यकता होती है।
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इसके बिना प्राणी और पौधों का अस्तित्व समाप्त होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। यह तो हम सभी अच्छे से जानते हैं कि धरती के करीब तीन चौथाई हिस्से पर पानी है। जो महासागरों, बर्फ, झीलों, नदियों और झरनों के रूप में उपलब्ध है। इसमें से एक फीसदी से भी कम पानी पीने योग्य है। ऐसे में हम पीने योग्य पानी की बचत करें। जिससे भविष्य में पानी का गंभीर समस्या न हो। इस दौरान मौजूद लोगों को वर्षा जल संचयन, आने वाले समय में पानी की होने वाली कमी से बचाव, इसके दुरुपयोग को कम करने व भूमिगत जल स्तर बनाए रखने के बारे में जानकारी दी गई।
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