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संबंधों में सुधार से नेपाली अर्थव्यवस्था में उछाल
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श्रावस्ती। भारत नेपाल के रिश्तों में बीते कुछ समय तक व्याप्त रही तल्खी खत्म होने से दोनों देशों में आम लोगों के संबंधों में सुधार आया है। इससे सैर सपाटे को पहुंचने वाले भारतीय पर्यटकों ने नेपाली अर्थव्यवस्था में भी उछाल लाना शुरू कर दिया है।
भारत और नेपाल के बीच संबंध कुछ माह पूर्व तल्ख थे। इसी दौरान कोरोना काल के प्रभाव ने भी भारतीय पर्यटकों के नेपाल जाने पर ब्रेक लगा दिया था। इससे नेपाली अर्थव्यवस्था की कमर टूटने लगी थी। पर्यटन से होने वाले नुकसान के कारण दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापार में भी 40 फीसदी तक गिरावट आई थी। हमेशा भीड़ से गुलजार रहने वाले बहराइच का रुपईडिहा कस्टम कार्यालय व नेपाल के भंसार आफिस में सन्नाटा पसरा दिखता था। दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों में सुधार आने के साथ ही अब पुराना रोटी बेटी का संबंध फिर से गर्मजोशी दिखाने लगा है।
भारतीय पर्यटकों ने एक बार फिर से नेपाल का रुख करना शुरू कर दिया है। इससे रुपईडिहा व नेपाल के भंसार स्थित कस्टम आफिसों में फिर से भीड़ जुटने लगी है। नेपाली सरकार व वहां पर्यटकों का स्वागत करने वाले व्यापारिक प्रतिष्ठान भारतीय पर्यटकों को लुभाने के लिए कई तरह की आकर्षक स्कीम व सुविधाएं भी मुहैया करा रहे हैं।
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भारत हमेशा से नेपाल को नमक, अनाज, सब्जी, दवा और पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति करता रहा है। अब वह कपड़े के लिए भी भारत पर निर्भर है। स्थानीय टैक्स न होने के कारण भारत से ही गया सामान नेपाल में हिंदुस्तान से सस्ता मिलता है। इसीलिए बड़ी संख्या में भारतीय यहां खरीदारी करने जाते हैं। सैर सपाटे के साथ ही हर साल पर्यटक कैलाश मानसरोवर और पशुपतिनाथ, प्रभुनाथ, मुक्तिनाथ व बागेश्वरी देवी मंदिर समेत अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन को नेपाल की यात्रा करते हैं।
नेपाल के प्यूथान जिले में भगवान शिव का प्रभुनाथ और मस्तांग में मुक्तिनाथ वैष्णव मंदिर है। यहां श्रावस्ती से ही प्रतिवर्ष अस्सी से नब्बे हजार लोग जाते हैं। इससे नेपाल को अरबों रुपये की आय होती है। यदि देवीपाटन मंडल का हिस्सा मिला लिया जाए तो लगभग साढ़े तीन लाख श्रद्धालु प्रभुनाथ, पोखरा व मुक्तिनाथ धाम की यात्रा करते हैं। यह यात्रा अब पुन: शुरू हो जाने से नेपाल की अर्थव्यवस्था को बढ़ी राहत मिली है।
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भारत और नेपाल के बीच संबंध कुछ माह पूर्व तल्ख थे। इसी दौरान कोरोना काल के प्रभाव ने भी भारतीय पर्यटकों के नेपाल जाने पर ब्रेक लगा दिया था। इससे नेपाली अर्थव्यवस्था की कमर टूटने लगी थी। पर्यटन से होने वाले नुकसान के कारण दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापार में भी 40 फीसदी तक गिरावट आई थी। हमेशा भीड़ से गुलजार रहने वाले बहराइच का रुपईडिहा कस्टम कार्यालय व नेपाल के भंसार आफिस में सन्नाटा पसरा दिखता था। दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों में सुधार आने के साथ ही अब पुराना रोटी बेटी का संबंध फिर से गर्मजोशी दिखाने लगा है।
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भारतीय पर्यटकों ने एक बार फिर से नेपाल का रुख करना शुरू कर दिया है। इससे रुपईडिहा व नेपाल के भंसार स्थित कस्टम आफिसों में फिर से भीड़ जुटने लगी है। नेपाली सरकार व वहां पर्यटकों का स्वागत करने वाले व्यापारिक प्रतिष्ठान भारतीय पर्यटकों को लुभाने के लिए कई तरह की आकर्षक स्कीम व सुविधाएं भी मुहैया करा रहे हैं।
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भारत हमेशा से नेपाल को नमक, अनाज, सब्जी, दवा और पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति करता रहा है। अब वह कपड़े के लिए भी भारत पर निर्भर है। स्थानीय टैक्स न होने के कारण भारत से ही गया सामान नेपाल में हिंदुस्तान से सस्ता मिलता है। इसीलिए बड़ी संख्या में भारतीय यहां खरीदारी करने जाते हैं। सैर सपाटे के साथ ही हर साल पर्यटक कैलाश मानसरोवर और पशुपतिनाथ, प्रभुनाथ, मुक्तिनाथ व बागेश्वरी देवी मंदिर समेत अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन को नेपाल की यात्रा करते हैं।
नेपाल के प्यूथान जिले में भगवान शिव का प्रभुनाथ और मस्तांग में मुक्तिनाथ वैष्णव मंदिर है। यहां श्रावस्ती से ही प्रतिवर्ष अस्सी से नब्बे हजार लोग जाते हैं। इससे नेपाल को अरबों रुपये की आय होती है। यदि देवीपाटन मंडल का हिस्सा मिला लिया जाए तो लगभग साढ़े तीन लाख श्रद्धालु प्रभुनाथ, पोखरा व मुक्तिनाथ धाम की यात्रा करते हैं। यह यात्रा अब पुन: शुरू हो जाने से नेपाल की अर्थव्यवस्था को बढ़ी राहत मिली है।