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धर्म वही जो सबके लिए खोले ज्ञान के द्वार
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जेतवन में पूजा अर्चन करते श्रीलंकाई बौद्ध अनुयायी।
- फोटो : SRAWASTI
कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती स्थित जेतवन परिसर रविवार को बौद्ध अनुयायियों से गुलजार रहा। इस दौरान श्रीलंका से आए बौद्ध अनुयायियों ने विशेष वर्षावास पूजा की। अनुयायियों ने तपोस्थली के विभिन्न मूमेंटों में जाकर विश्व शांति की कामना की।
बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती रविवार को श्रीलंकाई बौद्ध अनुयायियों ने गुलजार रही। अनुयायियों ने जेतवन परिसर में विशेष पूजन किया। इस दौरान श्रद्धालोक महाथेरों ने कहा कि जीवन की पवित्रता बनाए रखना तथ्य ज्ञान में पूर्णता प्राप्त करना, निर्वाण प्राप्त करना और तृष्णा का त्याग करना है। इसके साथ ही भगवान बुद्ध ने सभी संस्कार को अनित्य बताया है।
भगवान बुद्ध ने मानव के कर्म को नैतिक संस्थान का आधार बताया है। भगवान बुद्ध के अनुसार धम्म यानी धर्म वही है, जो सबके लिए ज्ञान के द्वार खोल दे। केवल विद्वान होना ही पर्याप्त नहीं है, विद्वान वही है जो अपने ज्ञान की रोशनी से सबको रोशन करे। धर्म को लोगों की जिंदगी से जोड़ते हुए भगवान बुद्ध ने बताया कि करुणा शील और मैत्री अनिवार्य है।
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भगवान बुद्ध ने कहा था कि लोगों का मूल्यांकन जन्म के आधार पर नहीं कर्म के आधार पर होना चाहिए। भगवान बुद्ध के बताए मार्ग पर दुनिया भर के करोड़ों लोग चलते है। इस दौरान अनुयायियों के उद्घोष के कारण समूची तपोस्थली बुद्धम् शरणम् गच्छामि से गूंजायमान रही। इस मौके पर बौद्ध भिक्षु आनंद सागर, नाग लोक, माता विद्यावती, धम सागर, इंद्रसेन सहित अन्य उपासक मौजूद रहे।
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बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती रविवार को श्रीलंकाई बौद्ध अनुयायियों ने गुलजार रही। अनुयायियों ने जेतवन परिसर में विशेष पूजन किया। इस दौरान श्रद्धालोक महाथेरों ने कहा कि जीवन की पवित्रता बनाए रखना तथ्य ज्ञान में पूर्णता प्राप्त करना, निर्वाण प्राप्त करना और तृष्णा का त्याग करना है। इसके साथ ही भगवान बुद्ध ने सभी संस्कार को अनित्य बताया है।
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भगवान बुद्ध ने मानव के कर्म को नैतिक संस्थान का आधार बताया है। भगवान बुद्ध के अनुसार धम्म यानी धर्म वही है, जो सबके लिए ज्ञान के द्वार खोल दे। केवल विद्वान होना ही पर्याप्त नहीं है, विद्वान वही है जो अपने ज्ञान की रोशनी से सबको रोशन करे। धर्म को लोगों की जिंदगी से जोड़ते हुए भगवान बुद्ध ने बताया कि करुणा शील और मैत्री अनिवार्य है।
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भगवान बुद्ध ने कहा था कि लोगों का मूल्यांकन जन्म के आधार पर नहीं कर्म के आधार पर होना चाहिए। भगवान बुद्ध के बताए मार्ग पर दुनिया भर के करोड़ों लोग चलते है। इस दौरान अनुयायियों के उद्घोष के कारण समूची तपोस्थली बुद्धम् शरणम् गच्छामि से गूंजायमान रही। इस मौके पर बौद्ध भिक्षु आनंद सागर, नाग लोक, माता विद्यावती, धम सागर, इंद्रसेन सहित अन्य उपासक मौजूद रहे।