{"_id":"61bb8667cd2f2443782156ea","slug":"purchase-of-20-percent-paddy-outstanding-about-five-crore-srawasti-news-lko6092698129","type":"story","status":"publish","title_hn":"20 प्रतिशत धान की खरीद, साढ़े पांच करोड़ का बकाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
20 प्रतिशत धान की खरीद, साढ़े पांच करोड़ का बकाया
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रावस्ती। सरकारी धान की खरीद में मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही। इसके चलते ही डेढ़ माह बाद भी अभी तक तय लक्ष्य के इतर सिर्फ 20 प्रतिशत धान ही खरीदा जा सका है। इतना ही नहीं खरीदे गए धान के भुगतान में किसानों को देय साढ़े पांच करोड़ की राशि का भुगतान भी अभी अटका हुआ है। खरीद मूल्य का बकाया न मिलने से किसानों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
शुरूआती समय से ही धान खरीद कार्य विभिन्न समस्याओं से जूझ रहा है। इसकी शुरूआत साधन सहकारी समितियों द्वारा धान न खरीदने से हुई थी।
काफी दिनों तक चली सहकारी समितियों की हड़ताल के बाद प्रशासनिक हस्तक्षेप व दबाव के बाद धान खरीद तो शुरू हुई लेकिन अब भुगतान को लेकर परेशानी उठ खड़ी है। जिले में बुधवार तक धान की कुल क्रमिक खरीद 9049.430 मीट्रिक टन हुई है। यह खरीद जिले के 1554 किसानों से हुई जो तय खरीद लक्ष्य 44300 एमटी का मात्र बीस फीसदी है। इसके सापेक्ष किसानों को कुल 1755.589 लाख रुपये का भुगतान देना था लेकिन पैसा न होने से 550.299 लाख का खरीद भुगतान अभी भी अटका है।
भुगतान देने में पीसीएफ सबसे फिसड्डी
भुगतान के मामले में पीसीएफ की स्थिति सबसे खराब है। पीसीएफ को खरीद के लिए 36 में से 27 केंद्र आवंटित हैं। इसे 32800 एमटी धान खरीद का लक्ष्य दिया गया था। इस लक्ष्य के सोपक्ष बुधवार तक पीसीएफ ने 6384.010 एमटी की खरीद ही की है। इसके देय भुगतान का 413.658 लाख रुपया किसानों को देना बाकी है। इसी तरह खाद्य विभाग 107.239 लाख, भारतीय खाद्य निगम पर किसानों को भुगतान की जाने वाली 29.602 लाख रुपये की बकायेदारी है।
विज्ञापन
सभी धान क्रय केंद्र प्रभारी को धान की खरीद में तेजी लाने व खरीदे गए धान मूल्य का 72 घंटे के अंदर भुगतान करने का निर्देश दिया है। यदि किसी केंद्र पर प्रभारी द्वारा धान खरीद में लापरवाही बरती जा रही है तो संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
नेहा प्रकाश, डीएम
विज्ञापन
शुरूआती समय से ही धान खरीद कार्य विभिन्न समस्याओं से जूझ रहा है। इसकी शुरूआत साधन सहकारी समितियों द्वारा धान न खरीदने से हुई थी।
काफी दिनों तक चली सहकारी समितियों की हड़ताल के बाद प्रशासनिक हस्तक्षेप व दबाव के बाद धान खरीद तो शुरू हुई लेकिन अब भुगतान को लेकर परेशानी उठ खड़ी है। जिले में बुधवार तक धान की कुल क्रमिक खरीद 9049.430 मीट्रिक टन हुई है। यह खरीद जिले के 1554 किसानों से हुई जो तय खरीद लक्ष्य 44300 एमटी का मात्र बीस फीसदी है। इसके सापेक्ष किसानों को कुल 1755.589 लाख रुपये का भुगतान देना था लेकिन पैसा न होने से 550.299 लाख का खरीद भुगतान अभी भी अटका है।
विज्ञापन
भुगतान देने में पीसीएफ सबसे फिसड्डी
भुगतान के मामले में पीसीएफ की स्थिति सबसे खराब है। पीसीएफ को खरीद के लिए 36 में से 27 केंद्र आवंटित हैं। इसे 32800 एमटी धान खरीद का लक्ष्य दिया गया था। इस लक्ष्य के सोपक्ष बुधवार तक पीसीएफ ने 6384.010 एमटी की खरीद ही की है। इसके देय भुगतान का 413.658 लाख रुपया किसानों को देना बाकी है। इसी तरह खाद्य विभाग 107.239 लाख, भारतीय खाद्य निगम पर किसानों को भुगतान की जाने वाली 29.602 लाख रुपये की बकायेदारी है।
विज्ञापन
सभी धान क्रय केंद्र प्रभारी को धान की खरीद में तेजी लाने व खरीदे गए धान मूल्य का 72 घंटे के अंदर भुगतान करने का निर्देश दिया है। यदि किसी केंद्र पर प्रभारी द्वारा धान खरीद में लापरवाही बरती जा रही है तो संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
नेहा प्रकाश, डीएम