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गांवों में परवान नहीं चढ़ी पाइप पेयजल योजना, आज भी हैंडपंप का सहारा
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श्रावस्ती। ग्रामीण क्षेत्र के पानी में आर्सेनिक की मात्रा अधिक है। इसके चलते पानी पीने योग्य नहीं रहा। इस समस्या के निदान के लिए कई पंचायतों में ग्रामीण पाइप पेयजल योजना के तहत करोड़ों की लागत से यूनिट खड़ी की गई। लेकिन भ्रष्टाचार के चलते आपूर्ति की टेस्टिंग के दौरान ही कहीं पाइपलाइन फटी मिलने तो कहीं अधूरी पाइप लाइन बिछाने के कारण योजना परवान नहीं चढ़ी। करोड़ों खर्च के बाद भी गांवों में स्थापित ओवर हेड टैंक सफेद हाथी बने हुए हैं। यह स्थिति कमोवेश जिले के सभी हिस्सों में देखी जा सकती है। वर्ष 2012 से अब तक लोग जलापूर्ति बहाल होने का इंतजार कर रहे हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति जमुनहा विकास खंड का है। जमुनहा का पानी ज्यादा खराब है। तो वहां परियोजनाएं भी ज्यादा लगी। लेकिन ज्यादातर परियोजनाएं अब तक धरातल पर उतर सकीं।
केस-एक
जमुनहा के फत्तेहपुर बनगई के मजरा बनगई गांव में दस वर्ष पूर्व पानी टंकी का निर्माण कराया गया था। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को स्वच्छ जल मुहैया कराना था। ओवर हैड टैंक निर्माण के बाद जलापूर्ति भी बहाल की गई। गुणवत्ता विहीन पाइपलाइन बिछाए जाने के कारण वह खराब हो गई। जिससे ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल के लाभ से वंचित होना पड़ रहा है। इतना ही नहीं ठेकेदार द्वारा पाइप लाइन बिछाने को कार्य भी अधूरा छोड़ दिया गया। जिसके चलते लोग हैंडपंप के भरोसे हैं।
केस-दो
जमुनहा भवनियापुर के मजरा द्वारिका गांव बाग में दो वर्ष पूर्व आवेर हैड टैंक का निर्माण प्रारंभ कराया गया था। इससे करीब 15 हजार की आबादी को स्वच्छ जलापूर्ति देने की योजना थी। कार्यदायी संस्था के ठेकेदार द्वारा जमुनहा बाजार, जमुनहा गांव, द्वारिकागांव, द्वारिकागांव बाग (विधायक पुरवा), रानीपुरवा, नई बस्ती, भवनियापुर, काशीराम पुरवा, बड़का फतेहपुर, ईदगाह मार्ग पर पाइप लाइन बिछाने का कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। वहीं रामजानकी मंदिर से काली मंदिर व आयुर्वेदिक अस्पताल, प्राथमिक विद्यालय जमुनहा द्वितीय, जमुनहा पुलिस चौकी, बीआरसी जमुनहा, एसएसबी जमुनहा, मुख्य चौक बाजार से भरत मिलाप चौराहा वाया बासुदेव चौराहा में लोगों के घरों के पीछे अब तक पाइपलाइनप नहीं बिछाई गई। वहीं एसएसबी कैंप जमुनहा के पास नई बस्ती जमुनहा में पाइप नहीं बिछी। कुछ मजरों में पाइपलाइन बिछने के बाद बिना कनेक्शन दिए ठेकेदार नदारद हो गए।
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केस-तीन
जमुनहा के पटना में पानी टंकी का निर्माण कराया गया था। इसके सहारे पटना, वीरगंज, एटा, सीएचसी मल्हीपुर, ब्लाक परिसर, थाना परिसर, व विद्यालयों को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराया जाता था। सप्लाई के लिए बिछाई गई पाइप लाइन की गुणवत्ता खराब होन के कारण वह कुछ ही समय के बाद फट गई। जिससे सप्लाई का पानी मार्ग पर फैलता रहता है। इससे जहां लोगों को आवागमन में असुविधा हो रही है। वहीं लोग पेयजल के लाभ से वंचित हो रहे हैं। तहसील व ब्लाक स्तरीय अधिकारी यहां निवासरत हैं। इसके बावजूद न तो फटी पाइप लाइन बदलवाई जा रही है। और न ही लोगों को स्वच्छ पेयतजल ही मुहैया कराया जा रहा है। ऐसी ही स्थिति क्षेत्र के कुछ अन्य गांवों में भी है। जहां स्थापित ओवर हेड टैंक ग्रामीणों के लिए सफेद हाथी बने हुए हैं।
केस-चार
जिले में लोग आज भी ज्यादातर लोग स्वच्छ पेयजल के लिए निजी हैंडपंप के सहारे हैं। वहीं हरिहरपुररानी के परसा डेहरिया, बेलस्वा, मोहम्मदपुर, बसई पुरवा, नेवादा, डेहरिया में ठेकेदार की लापरवाही के कारण किसान खेतों में की सिंचाई कर रहे हैं। जहां लोगों का घर बना हुआ है। वहां पर पानी की सप्लाई नहीं है। यहां छह वर्ष पूर्व पानी टंकी का निर्माण किया गया था। जो अभी तक ग्राम पंचायत को हैंडओवर नहीं किया गया है। गांव के मजरो में जगह जगह पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से पानी का रिसाव होता रहता है। वहीं सप्लाई बंद होने के बाद गंदा पानी उसी पाइप लाइन के माध्यम से अंदर प्रवेश हो जाता है। इसकी शिकायत के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जिले के सभी पेयजल योजनाओं की जांच कराई जाएगी। जो जिस स्थिति में है। उसकी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। योजनाएं संचालित हो उसकी व्यवस्था की जाएगी। -ईशान प्रताप सिंह, सीडीओ
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केस-एक
जमुनहा के फत्तेहपुर बनगई के मजरा बनगई गांव में दस वर्ष पूर्व पानी टंकी का निर्माण कराया गया था। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को स्वच्छ जल मुहैया कराना था। ओवर हैड टैंक निर्माण के बाद जलापूर्ति भी बहाल की गई। गुणवत्ता विहीन पाइपलाइन बिछाए जाने के कारण वह खराब हो गई। जिससे ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल के लाभ से वंचित होना पड़ रहा है। इतना ही नहीं ठेकेदार द्वारा पाइप लाइन बिछाने को कार्य भी अधूरा छोड़ दिया गया। जिसके चलते लोग हैंडपंप के भरोसे हैं।
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केस-दो
जमुनहा भवनियापुर के मजरा द्वारिका गांव बाग में दो वर्ष पूर्व आवेर हैड टैंक का निर्माण प्रारंभ कराया गया था। इससे करीब 15 हजार की आबादी को स्वच्छ जलापूर्ति देने की योजना थी। कार्यदायी संस्था के ठेकेदार द्वारा जमुनहा बाजार, जमुनहा गांव, द्वारिकागांव, द्वारिकागांव बाग (विधायक पुरवा), रानीपुरवा, नई बस्ती, भवनियापुर, काशीराम पुरवा, बड़का फतेहपुर, ईदगाह मार्ग पर पाइप लाइन बिछाने का कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। वहीं रामजानकी मंदिर से काली मंदिर व आयुर्वेदिक अस्पताल, प्राथमिक विद्यालय जमुनहा द्वितीय, जमुनहा पुलिस चौकी, बीआरसी जमुनहा, एसएसबी जमुनहा, मुख्य चौक बाजार से भरत मिलाप चौराहा वाया बासुदेव चौराहा में लोगों के घरों के पीछे अब तक पाइपलाइनप नहीं बिछाई गई। वहीं एसएसबी कैंप जमुनहा के पास नई बस्ती जमुनहा में पाइप नहीं बिछी। कुछ मजरों में पाइपलाइन बिछने के बाद बिना कनेक्शन दिए ठेकेदार नदारद हो गए।
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केस-तीन
जमुनहा के पटना में पानी टंकी का निर्माण कराया गया था। इसके सहारे पटना, वीरगंज, एटा, सीएचसी मल्हीपुर, ब्लाक परिसर, थाना परिसर, व विद्यालयों को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराया जाता था। सप्लाई के लिए बिछाई गई पाइप लाइन की गुणवत्ता खराब होन के कारण वह कुछ ही समय के बाद फट गई। जिससे सप्लाई का पानी मार्ग पर फैलता रहता है। इससे जहां लोगों को आवागमन में असुविधा हो रही है। वहीं लोग पेयजल के लाभ से वंचित हो रहे हैं। तहसील व ब्लाक स्तरीय अधिकारी यहां निवासरत हैं। इसके बावजूद न तो फटी पाइप लाइन बदलवाई जा रही है। और न ही लोगों को स्वच्छ पेयतजल ही मुहैया कराया जा रहा है। ऐसी ही स्थिति क्षेत्र के कुछ अन्य गांवों में भी है। जहां स्थापित ओवर हेड टैंक ग्रामीणों के लिए सफेद हाथी बने हुए हैं।
केस-चार
जिले में लोग आज भी ज्यादातर लोग स्वच्छ पेयजल के लिए निजी हैंडपंप के सहारे हैं। वहीं हरिहरपुररानी के परसा डेहरिया, बेलस्वा, मोहम्मदपुर, बसई पुरवा, नेवादा, डेहरिया में ठेकेदार की लापरवाही के कारण किसान खेतों में की सिंचाई कर रहे हैं। जहां लोगों का घर बना हुआ है। वहां पर पानी की सप्लाई नहीं है। यहां छह वर्ष पूर्व पानी टंकी का निर्माण किया गया था। जो अभी तक ग्राम पंचायत को हैंडओवर नहीं किया गया है। गांव के मजरो में जगह जगह पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से पानी का रिसाव होता रहता है। वहीं सप्लाई बंद होने के बाद गंदा पानी उसी पाइप लाइन के माध्यम से अंदर प्रवेश हो जाता है। इसकी शिकायत के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जिले के सभी पेयजल योजनाओं की जांच कराई जाएगी। जो जिस स्थिति में है। उसकी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। योजनाएं संचालित हो उसकी व्यवस्था की जाएगी। -ईशान प्रताप सिंह, सीडीओ