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विदेशी भाषा का प्रयोग विदेश व्यापार तक रखें सीमित
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इकौना (श्रावस्ती)। महामाया राजकीय महाविद्यालय की ओर से हिंदी दिवस पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इसी के क्रम में गुरुवार को राजकीय महाविद्यालय लेंगड़ीगूलर में एक मजबूत कदम हिंदी की ओर विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें छात्राओं ने संसद व अदालतों सहित चिकित्सा क्षेत्र में हिंदी के उपयोग को बढ़ाने की पुरजोर वकालत की।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद महामाया राजकीय महाविद्यालय इकौना के सहायक प्रोफेसर डॉ. श्याम नरायन वर्मा ने कहा कि अमेरिका, रूस व चीन जैसी महाशक्ति अपने दैनिक जीवन मे अधिकतम स्वभाषा का उपयोग करते हैं। लेकिन हम गुलामी की मानसिकता से आज भी ग्रस्त हैं। यही कारण है कि हम अंग्रेजी प्रयोग को गर्व का विषय मानते हैं। प्राचार्य डॉ. पूनम सोनकर ने कहा कि देश का बड़ा हिस्सा हिंदी भाषी है। विदेशी भाषाओं का उपयोग अनुसंधान, कूटनीति व विदेश व्यापार तक ही सीमित रखना उचित है।
वनस्पति विज्ञान के प्रवक्ता डॉ. निर्देश रवि ने कहा कि देश मे हिंदी फिल्मों व समाचार चैनल का बोलबाला है। विज्ञान की सभी विधाओं के शोध हिंदी में होने लगे हैं। लेकिन दैनिक व्यवहार मे अंग्रेजी प्रयोग की मानसिकता से उबरने की जरूरत है। डॉ. सत्य प्रकाश ने कहा कि लोकभाषा के बिना लोकतंत्र की कल्पना अधूरी है। इस दौरान मौजूद छात्राओं ने संसद, विधानसभा, अदालतों व चिकित्सा क्षेत्र सहित सभी सरकारी कार्यालयों में हिंदी के उपयोग को बढ़ाने की पुरजोर वकालत की। गोष्ठी का संचालन हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर कुमार ने किया। इस मौके पर प्रिंसी सोनी, अपूर्वा, प्राची, वीना मिश्रा, कोमल तिवारी, आरती वर्मा, बेबी सिंह आदि छात्राएं व शिक्षक मौजूद रहे।
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गोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद महामाया राजकीय महाविद्यालय इकौना के सहायक प्रोफेसर डॉ. श्याम नरायन वर्मा ने कहा कि अमेरिका, रूस व चीन जैसी महाशक्ति अपने दैनिक जीवन मे अधिकतम स्वभाषा का उपयोग करते हैं। लेकिन हम गुलामी की मानसिकता से आज भी ग्रस्त हैं। यही कारण है कि हम अंग्रेजी प्रयोग को गर्व का विषय मानते हैं। प्राचार्य डॉ. पूनम सोनकर ने कहा कि देश का बड़ा हिस्सा हिंदी भाषी है। विदेशी भाषाओं का उपयोग अनुसंधान, कूटनीति व विदेश व्यापार तक ही सीमित रखना उचित है।
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वनस्पति विज्ञान के प्रवक्ता डॉ. निर्देश रवि ने कहा कि देश मे हिंदी फिल्मों व समाचार चैनल का बोलबाला है। विज्ञान की सभी विधाओं के शोध हिंदी में होने लगे हैं। लेकिन दैनिक व्यवहार मे अंग्रेजी प्रयोग की मानसिकता से उबरने की जरूरत है। डॉ. सत्य प्रकाश ने कहा कि लोकभाषा के बिना लोकतंत्र की कल्पना अधूरी है। इस दौरान मौजूद छात्राओं ने संसद, विधानसभा, अदालतों व चिकित्सा क्षेत्र सहित सभी सरकारी कार्यालयों में हिंदी के उपयोग को बढ़ाने की पुरजोर वकालत की। गोष्ठी का संचालन हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर कुमार ने किया। इस मौके पर प्रिंसी सोनी, अपूर्वा, प्राची, वीना मिश्रा, कोमल तिवारी, आरती वर्मा, बेबी सिंह आदि छात्राएं व शिक्षक मौजूद रहे।
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