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Shravasti News: हरेर हरेर निकले, घर आते ही गांव में मनेगी दिवाली

Thu, 30 Nov 2023 12:46 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती Updated Thu, 30 Nov 2023 12:46 AM IST
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Harer Harer turned out, Diwali will be celebrated in the village as soon as you return home.
श्रावस्ती। उत्तरांचल के टनल से बाहर निकले जिले के छह मजदूरों के परिवार के सदस्य प्रधानमंत्री आभार जता रहे हैं। उनके लौटने को लेकर गांव में दीपावली मनाने की तैयारियां चल रही हैं। अपने भाई के आने पर कोई खुशी में नाचने की तैयारी कर रहा है तो गांव में पूजा-पाठ की तैयारी कर रहा है। एक मजदूर की पत्नी इतनी खुश है कि वह कुछ बोल ही नहीं पा रही है। पति के सकुशल बाहर आने पर खुशी के मारे रोती ही जा रही है। सभी ने कहा कि हरेर निकले, उनके घर आने पर गांव में दीपावली मनाई जाएगी।
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टनल में मोतीपुर कला गांव के छह थारू समुदाय के मजदूर फंसे हुए थे। सभी को सकुशल बाहर निकाल लिया गया है। बाहर निकलते ही सभी ने सबसे पहले अपने परिजनों से बात की। बुधवार सुबह सभी मजदूरों ने अपने घर पर माता, बहन, पत्नी से घंटों फोन पर बात की। इस दौरान परिवारीजनों के खुशी के आंसू टपक पड़े।
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अब सभी उनके घर आने का इंतजा कर रहे हैं। कोई अपने भाई के आने पर दावत देने की तैयारी कर रहा है तो किसी ने गांव में नाचने-गाने के साथ स्थानीय देवी-देवताओं की पूजा की तैयारी की है। सभी अपनी खुशी को अलग-अलग तरीके से बयां करने की तैयारी कर रहे हैं।
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भले समय ज्यादा लगा, सकुशल बाहर आया
टनल में फंसे मजदूर संतोष की बड़ी मां सविता देवी घर की चौखट पर खड़े स्थानीय भाषा में प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते दिखाईं दीं। कहा कि भले ही समय ज्यादा लगा हो लेकिन बेटा वहां से बाहर निकल आया। उनका कहना था कि बुधवार सुबह संतोष से बात हुई। वह भी खुश है। बीते सत्रह दिनों को याद करते हुए वह कहती हैं कि इतना लंबा समय कैसे बीता यह तो एक मां का दिल ही जानता है।

घर में नहीं जला चूल्हा
रामसुंदर की पत्नी बीते सत्रह दिनों को याद करते हुए रो पड़ती हैं। कहती है कि इन दिनों में घर में ठीक से चूल्हा नहीं जला। अब वह दीपावली मनाने की तैयारी कर रही हैं। रामसुंदर की मां धनपति कहती हैं कि उनका लड़का टनल से हरेर हरेर (स्वस्थ) निकला है।



थम नहीं रहे खुशी के आंसू
सत्यदेव की दो बेटियां हैं। पत्नी बड़ी मुश्किल से दो शब्द बोल पाई कि इन सत्रह दिनों में पूरी जिंदगी आंखों के सामने घूम गई। खुशी के मारे आंसू नहीं रुक रहे। बताया कि घर के लिए रवाना हो चुके हैं। गांव में सभी के आने पर दीप जलेंगे। देवी मां के स्थान पर पूजा होगा। पारंपरिक नृत्य के साथ उत्सव भी मनाने की तैयारी चल रही है।
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