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Shravasti News: नगर पंचायत बनने की आस में हरदत्त नगर गिरंट

Thu, 20 Mar 2025 12:37 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती Updated Thu, 20 Mar 2025 12:37 AM IST
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Hardatt Nagar Girant hopes to become a Nagar Panchayat
श्रावस्ती। जमुनहा की हरदत्त नगर गिरंट जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है। 56 मजरों व 22,500 आबादी वाली इस ग्राम पंचायत के लोग अब इसे नगर पंचायत का दर्जा देने की आस संजोए हैं ताकि अटके विकास कार्यों को रफ्तार मिल सके। नगर पंचायत बनने के सभी मानक पूरे करने वाली इस ग्राम पंचायत का इतिहास बेगम हजरत महल से भी जुड़ा है। उन्हें शरण देने वाले राजा हरदत्त सिंह को ग्रांट के रूप में मिली भूमि पर ही हरदत्त नगर गिरंट ग्राम पंचायत को बसाया गया था।
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गांव निवासी सुनील यादव बताते है कि इस ग्राम पंचायत में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, दो इंटर कॉलेज, आईटीआई, पॉलीटेक्निक, राजकीय डिग्री कॉलेज, प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय, डाकघर, बैंक, थाना, पशु अस्पताल, पीएचसी, होम्योपैथिक अस्पताल, वन कार्यालय व चार कोटे की दुकानें भी संचालित हैं। नगर पंचायत का दर्जा पाने के सभी तय मानक पूरे होने के बावजूद जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से क्षेत्र के लोगों की आस पूरी नहीं हो पा रही है।
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ग्राम प्रधान विजय कुमार बताते है कि ग्राम पंचायत होने के कारण विकास कार्य के लिए यहां पर्याप्त बजट नहीं मिल पाता। 22 हजार से अधिक आबादी के साथ अन्य मानक पूरे होने के कारण अगर इसे नगर पंचायत बना दिया जाए तो गिरंट सहित उनके सभी मजरों में विकास कार्य रफ्तार पकड़ेगा।
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इतिहास में भी दर्ज है हरदत्त नगर गिरंट
हरदत्त नगर गिरंट गांव स्वतंत्रता संग्राम का साक्षी रहा है। वर्ष 1857 में अंग्रेजों ने जब लखनऊ की रियासत पर कब्जा किया तो बेगम हजरत महल ने बौंडी के राजा हरदत्त सिंह सह सवाई के यहां शरण ली थी। इसके बाद अंग्रेजों ने बौंडी रियासत पर हमला बोल दिया। राजा हरदत्त सिंह बेगम हजरत महल को बचाकर अपने साथ भाग कर नानपारा के नवाब शहादत अली के पास शरण लेने पहुंचे।

यहां से बेगम हजरत महल नेपाल चली गई। नवाब ने राजा हरदत्त सिंह को सुरक्षित स्थान पर छिपने के लिए अनुदान (ग्रांट) में रियासत का कुछ जंगली हिस्सा दिया। धीरे-धीरे यहां गांव बस गया, जो पहले हरदत्त नगर ग्रंट, बाद में हरदत्त नगर गिरंट बना।
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