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Shravasti News: पुलिस शिकायतों को गंभीरता से लेती तो बच सकती थी राम मनोहर की जान
Fri, 08 Dec 2023 12:30 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Fri, 08 Dec 2023 12:30 AM IST
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श्रावस्ती। पतिझिया गांव के राम मनोहर के हत्यारोपियों को पुलिस दबोच कर भले ही वाहवाही लूट रही हो, लेकिन इस पूरे मामले में पुलिस की लापरवाही भी उजागर हो रही है। एक मुकदमें में गवाह मृतक राम मनोहर पर उसके विरोधियों ने गवाही न देने का दबाव डाल कई बार पहले भी जानलेवा हमले किए, लेकिन उसकी शिकायत के बाद भी पुलिस ने आरोपियों पर सख्ती नहीं बरती।
शायद पुलिस की इसी लापरवाही के नतीजे में हौसलाबुलंद आरोपियों ने आखिर राम मनोहर की हत्या ही कर डाली। लोगों का मानना है कि पुलिस समय रहते सख्त कदम उठाती तो शायद राम मनोहर की जान बच जाती। भिनगा कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पतिझिया निवासी राममनोहर का उसके चचेरे भतीजे जगतराम पुत्र मुल्ले से विवाद था। मृतक राम मनोहर, जगतराम के एक मुकदमें में गवाह भी था। जिसमें गवाही न देने के लिए जगतराम उस पर दबाव बना रहा था।
राम मनोहर नहीं माना। इसी वजह से 16 नवंबर को कोतवाली क्षेत्र के ही नथुनिया मोड़ पर राम मनोहर पर प्राण घातक हमला हुआ था। स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप के बाद उसकी जान बची थी। उसी दिन देर शाम गांव आकर फिर उस पर लाठी डंडा व कुल्हाड़ी से हमला किया गया था। जिसके सिर पर अभी भी आठ टांके लगे हुए थे। इतना ही नहीं मामले में कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई न कर शांतिभंग के आरोप में ही कार्रवाई की थी।
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कड़ी कार्रवाई न होने से आरोपी और हौसलाबुलंद हो गए। 21 व 22 नवंबर को एक बार पुन: उस पर हमले का प्रयास हुआ। इस पर राममनोहर ने अपनी हत्या की आशंका जताते हुए कोतवाली पुलिस को फिर तहरीर दी थी। लेकिन पुलिस ने मामले को टाल दिया। पुलिस की इसी लापरवाही का खामियाजा बुधवार रात राममनोहर को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।
पहले भी लापरवाही में हो चुकी हत्या
मल्हीपुर थाना क्षेत्र के बाबूपुरवा में जमीनी विवाद को लेकर दो पक्षों में काफी दिनों से विवाद चल रहा था। इसकी कई शिकायत के बावजूद स्थानीय पुलिस व तहसील प्रशासन की ओर से क्रेता को विक्रेता से न तो पैसा वापस दिलाया गया और न ही खरीदी गई भूमि का बैनामा ही कराया गया।
इसके चलते विक्रेता पक्ष ने क्रेता पर दिन दहाड़े खेत में ट्रैक्टर चढ़ा कर उसकी हत्या कर दी थी। ऐसा ही मामला नवीन मार्डन थाना क्षेत्र में भी देखने को मिला। जहां चुनावी रंजिश में ग्राम प्रधान व पूर्व प्रधान के पक्ष से कटरा बाजार में मारपीट हुई। जिसमें एक पक्ष की पुलिस ने डाक्टरी तक नहीं कराया।
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शायद पुलिस की इसी लापरवाही के नतीजे में हौसलाबुलंद आरोपियों ने आखिर राम मनोहर की हत्या ही कर डाली। लोगों का मानना है कि पुलिस समय रहते सख्त कदम उठाती तो शायद राम मनोहर की जान बच जाती। भिनगा कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पतिझिया निवासी राममनोहर का उसके चचेरे भतीजे जगतराम पुत्र मुल्ले से विवाद था। मृतक राम मनोहर, जगतराम के एक मुकदमें में गवाह भी था। जिसमें गवाही न देने के लिए जगतराम उस पर दबाव बना रहा था।
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राम मनोहर नहीं माना। इसी वजह से 16 नवंबर को कोतवाली क्षेत्र के ही नथुनिया मोड़ पर राम मनोहर पर प्राण घातक हमला हुआ था। स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप के बाद उसकी जान बची थी। उसी दिन देर शाम गांव आकर फिर उस पर लाठी डंडा व कुल्हाड़ी से हमला किया गया था। जिसके सिर पर अभी भी आठ टांके लगे हुए थे। इतना ही नहीं मामले में कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई न कर शांतिभंग के आरोप में ही कार्रवाई की थी।
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कड़ी कार्रवाई न होने से आरोपी और हौसलाबुलंद हो गए। 21 व 22 नवंबर को एक बार पुन: उस पर हमले का प्रयास हुआ। इस पर राममनोहर ने अपनी हत्या की आशंका जताते हुए कोतवाली पुलिस को फिर तहरीर दी थी। लेकिन पुलिस ने मामले को टाल दिया। पुलिस की इसी लापरवाही का खामियाजा बुधवार रात राममनोहर को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।
पहले भी लापरवाही में हो चुकी हत्या
मल्हीपुर थाना क्षेत्र के बाबूपुरवा में जमीनी विवाद को लेकर दो पक्षों में काफी दिनों से विवाद चल रहा था। इसकी कई शिकायत के बावजूद स्थानीय पुलिस व तहसील प्रशासन की ओर से क्रेता को विक्रेता से न तो पैसा वापस दिलाया गया और न ही खरीदी गई भूमि का बैनामा ही कराया गया।
इसके चलते विक्रेता पक्ष ने क्रेता पर दिन दहाड़े खेत में ट्रैक्टर चढ़ा कर उसकी हत्या कर दी थी। ऐसा ही मामला नवीन मार्डन थाना क्षेत्र में भी देखने को मिला। जहां चुनावी रंजिश में ग्राम प्रधान व पूर्व प्रधान के पक्ष से कटरा बाजार में मारपीट हुई। जिसमें एक पक्ष की पुलिस ने डाक्टरी तक नहीं कराया।