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क्षेत्र पंचायत के कार्य का ग्राम पंचायत ने भी ले लिया भुगतान
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श्रावस्ती। क्षेत्र पंचायत के काम का ग्राम पंचायत ने भुगतान ले लिया। मनरेगा के काम में बच्चों से भी मजदूरी करा ली। गांव में पर्याप्त संख्या में मजदूर मौजूद थे इसके बाद भी जेसीबी से काम करा लिया गया। इस तरह की अनगिनत अनियमितताएं मनरेगा में है। सोशल आडिट टीम ने दो साल के काम में करीब चालीस लाख रुपये की रिकवरी भी कराई लेकिन चहेतों को बचाने के लिए अनियमितता की फाइल पर अधिकारी ही कुंडली मारे बैठे हैं।
मनरेगा वैसे तो मजदूरों को गांव में ही रोजगार देने के लिए है लेकिन यह योजना जिले में अनियमितता की भेंट चढ़ गई। इस अनियमितता व भ्रष्टाचार का खुलासा सोशल आडिट टीम ने किया लेकिन इस खुलासे के बाद भ्रष्टाचार के जरिये लिए गए पैसे की वसूली के लिए तैयार फाइल पर अधिकारी ही कुंडली मार कर बैठ गए हैं। इसके चलते सौ से अधिक अनियमितताओं वाली फाइलों पर न तो कोई कार्रवाई हो सकी और न ही गबन किए गए वैसे की वसूली ही हो सकी।
हरिहरपुररानी विकास खंड की ग्राम पंचायत बनकटवा में आडिट कराई गई थी। इस गांव में मनरेगा के तहत बिकाऊ के घर से पूरब चकरोड तक खड़ंजा कार्य में 97746 रुपये की ईंट लगाई गई थी। यह कार्य क्षेत्र पंचायत द्वारा कराया गया था। क्षेत्र पंचायत ने इस कार्य का भुगतान भी प्राप्त कर लिया था लेकिन इसी के बाद बिना कुछ काम कराए ही ग्राम पंचायत ने भी ईंट के पैसे का भुगतान ले लिया।
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इसकी फाइल लगभग एक वर्ष से रिकवरी के लिए घूम रही है लेकिन अभी तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं हो पाया। यही नहीं सोशल आडिट के दौरान टीम ने इसी ग्राम पंचायत में पौधरोपण के नाम 89910 रुपये, उच्च दरों पर सामग्री खरीदने के नाम पर 20846 रुपये व एएमबी व मौके पर मिले काम के अंतर पर 82550 रुपये, कुल 291052 रुपये का घोटाला पकड़ा था लेकिन आज तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।
हरिहरपुररानी की ग्राम पंचायत टंड़वा बनकटवा में 687017 रुपये से खड़ंजा व सड़क पटाई का कार्य मनरेगा के तहत कराया गया था लेकिन जब यह कार्य यहां कराया गया, उससे पहले ही इस ग्राम पंचायत को समाप्त कर नगर पालिका परिषद भिनगा में हस्तानांतरित कर दिया गया था। इस कार्य की वित्तीय स्वीकृति भी ब्लॉक से नहीं ली गई थी। यही नहीं इसी ग्राम पंचायत में कई और अनियमितताओं का खुलासा आडिट टीम ने किया था लेकिन अभी तक यह फाइल अंतिम निर्णय का इंतजार कर रही है।
ग्राम पंचायत गोढ़पुरवा में काम न करने वाले व्यक्तियों के नाम पर 16625 रुपये, उच्च दरों पर सामग्री खरीद में 7875 रुपये, स्वीकृत राशि से अधिक व्यय मामले में 35175 रुपये व अन्य मदों में भी 3219 रुपये, कुल 62894 रुपये का गबन किया गया। इसी प्रकार सिरसिया की ग्राम पंचायत एकघरवा में आंगनबाड़ी निर्माण पर स्टीमेट से 10845 रुपये, पंडरी में 18500 रुपये व हरिहरपुररानी के रामपुर जब्दी में 27385 रुपये, कुल 56730 रुपये का गबन कर लिया गया जिसकी रिकवरी आज तक नहीं हो पाई।
जमुनहा की ग्राम पंचायत पटना में नाबालिग रोहित से भी मनरेगा के तहत मजदूरी कराई गई। जब इसकी शिकायत हुई तो जांच में भी इस आरोप की पुष्टि हुई जिसमें यह पाया गया कि नाबालिग से कुल 36 दिन काम करा कर 6468 रुपये का भुगतान किया गया है। यही नहीं इसी ग्राम पंचायत में सतीश सोनी की दुकान से होलीराम मेडिकल स्टोर तक नाला खुदाई के काम में जेसीबी का उपयोग किया गया था जिसकी पुष्टि भी जांच के बाद हुई थी।
इन मामलों में डीएम ने पत्रावली पर संबंधित सचिव व प्रधान के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने का आदेश खंड विकास अधिकारी को दिया था लेकिन यह फाइल आज तक खंड विकास अधिकारी दफ्तर पर ही लंबित है।
उपयुक्त मनरेगा उपेंद्र पाठक ने कहा कि सभी मामले में तथ्यों की जानकारी अभी मुझे नहीं है। मैं तथ्यों की जानकारी कर लूं, इसके बाद ही कुछ कह सकता हूं।
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मनरेगा वैसे तो मजदूरों को गांव में ही रोजगार देने के लिए है लेकिन यह योजना जिले में अनियमितता की भेंट चढ़ गई। इस अनियमितता व भ्रष्टाचार का खुलासा सोशल आडिट टीम ने किया लेकिन इस खुलासे के बाद भ्रष्टाचार के जरिये लिए गए पैसे की वसूली के लिए तैयार फाइल पर अधिकारी ही कुंडली मार कर बैठ गए हैं। इसके चलते सौ से अधिक अनियमितताओं वाली फाइलों पर न तो कोई कार्रवाई हो सकी और न ही गबन किए गए वैसे की वसूली ही हो सकी।
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हरिहरपुररानी विकास खंड की ग्राम पंचायत बनकटवा में आडिट कराई गई थी। इस गांव में मनरेगा के तहत बिकाऊ के घर से पूरब चकरोड तक खड़ंजा कार्य में 97746 रुपये की ईंट लगाई गई थी। यह कार्य क्षेत्र पंचायत द्वारा कराया गया था। क्षेत्र पंचायत ने इस कार्य का भुगतान भी प्राप्त कर लिया था लेकिन इसी के बाद बिना कुछ काम कराए ही ग्राम पंचायत ने भी ईंट के पैसे का भुगतान ले लिया।
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इसकी फाइल लगभग एक वर्ष से रिकवरी के लिए घूम रही है लेकिन अभी तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं हो पाया। यही नहीं सोशल आडिट के दौरान टीम ने इसी ग्राम पंचायत में पौधरोपण के नाम 89910 रुपये, उच्च दरों पर सामग्री खरीदने के नाम पर 20846 रुपये व एएमबी व मौके पर मिले काम के अंतर पर 82550 रुपये, कुल 291052 रुपये का घोटाला पकड़ा था लेकिन आज तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।
हरिहरपुररानी की ग्राम पंचायत टंड़वा बनकटवा में 687017 रुपये से खड़ंजा व सड़क पटाई का कार्य मनरेगा के तहत कराया गया था लेकिन जब यह कार्य यहां कराया गया, उससे पहले ही इस ग्राम पंचायत को समाप्त कर नगर पालिका परिषद भिनगा में हस्तानांतरित कर दिया गया था। इस कार्य की वित्तीय स्वीकृति भी ब्लॉक से नहीं ली गई थी। यही नहीं इसी ग्राम पंचायत में कई और अनियमितताओं का खुलासा आडिट टीम ने किया था लेकिन अभी तक यह फाइल अंतिम निर्णय का इंतजार कर रही है।
ग्राम पंचायत गोढ़पुरवा में काम न करने वाले व्यक्तियों के नाम पर 16625 रुपये, उच्च दरों पर सामग्री खरीद में 7875 रुपये, स्वीकृत राशि से अधिक व्यय मामले में 35175 रुपये व अन्य मदों में भी 3219 रुपये, कुल 62894 रुपये का गबन किया गया। इसी प्रकार सिरसिया की ग्राम पंचायत एकघरवा में आंगनबाड़ी निर्माण पर स्टीमेट से 10845 रुपये, पंडरी में 18500 रुपये व हरिहरपुररानी के रामपुर जब्दी में 27385 रुपये, कुल 56730 रुपये का गबन कर लिया गया जिसकी रिकवरी आज तक नहीं हो पाई।
जमुनहा की ग्राम पंचायत पटना में नाबालिग रोहित से भी मनरेगा के तहत मजदूरी कराई गई। जब इसकी शिकायत हुई तो जांच में भी इस आरोप की पुष्टि हुई जिसमें यह पाया गया कि नाबालिग से कुल 36 दिन काम करा कर 6468 रुपये का भुगतान किया गया है। यही नहीं इसी ग्राम पंचायत में सतीश सोनी की दुकान से होलीराम मेडिकल स्टोर तक नाला खुदाई के काम में जेसीबी का उपयोग किया गया था जिसकी पुष्टि भी जांच के बाद हुई थी।
इन मामलों में डीएम ने पत्रावली पर संबंधित सचिव व प्रधान के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने का आदेश खंड विकास अधिकारी को दिया था लेकिन यह फाइल आज तक खंड विकास अधिकारी दफ्तर पर ही लंबित है।
उपयुक्त मनरेगा उपेंद्र पाठक ने कहा कि सभी मामले में तथ्यों की जानकारी अभी मुझे नहीं है। मैं तथ्यों की जानकारी कर लूं, इसके बाद ही कुछ कह सकता हूं।