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किसान तो पहुंचे, नहीं नजर अाए धान खरीदार

Mon, 01 Nov 2021 10:48 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 01 Nov 2021 10:48 PM IST
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Farmers arrived, did not see paddy buyers
साधन सहकारी समिति जमुनहा भवनियापुर में लगा ताला - फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। धान खरीद का पहला दिन जिले में किसानों के लिए भारी रहा। किसान धान बेचने तो आए। लेकिन खरीदने वाले क्रय केंद्रों का ताला खोलने नहीं आए। जिसके चलते किसान खाली हाथ वापस चले गए।
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धान खरीद केंद्र खोलने के लिए एक नवंबर की तिथि निर्धारित थी। इस दिन पंजीकृत किसानों को अपनी फसल लाने को कहा गया था। लेकिन पहले दिन धान क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ था। जिले में एक भी क्रय केंद्र नहीं खोले गए। यही नहीं इन क्रय केंद्रों पर धान खरीदने के लिए कोई व्यवस्था भी नहीं थी। किसी क्रय केंद्र के सामने जलभराव की स्थिति थी तो कहीं झाड़ झंखाड़ लगा हुआ था। जबकि देखा जाए तो जिले में धान खरीद के लिए कुल 35 क्रय केंद्र बनाए गए हैं।
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इस संबंध में कोआपरेटिव संघ का कहना है कि उनके यूनियन की पहले से ही लखनऊ में आंदोलन की तिथि निर्धारित थी। इसीलिए सहकरी संघ के सभी संवर्ग लखनऊ आंदोलन के लिए गए हुए हैं। वहीं राजकीय धान खरीद केंद्र भिनगा में किसान पहले दिन फसल बेचने आए थे। लेकिन उनकी फसल खरीदने के बजाए वहां केवल नए किसानों का पंजीकरण किया जा रहा था। धान खरीद कब होगी इसके बारे में जानकारी देने के लिए कोई तैयार नहीं था। जबकि पीसीएफ व अन्य विभागों द्वारा स्थापित क्रय केंद्र न खुलने के संबंध में अधिकारी मौन हैं।
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35 केंद्रों में होनी है खरीद
जिले में 35 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। यहां इस वर्ष 44,300 एमटी धान की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन केंद्रों में हरिहरपुररानी में आठ, सिरसिया में सात, जमुनहा में नौ, गिलौला में आठ व इकौना में तीन केंद्र हैं।
अभी तक क्रय केंद्रों पर नहीं कोई व्यवस्था
सभी क्रय केंद्रों पर दो इलेक्ट्रॉनिक कांटा, एक नमी मापक यंत्र, विनोईंग फैन एवं पावर डेस्टर व डबल जाली का छलना लगाया जाना था। लेकिन अभी तक किसी भी केंद्र पर इसकी व्यवस्था नहीं हो पाई।

कम दाम पर धान बेचने को मजबूर
खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में मूल्य समर्थन योजना के तहत धान कामन श्रेणी के लिए 1940 रुपये, ग्रेड-ए के लिए 1960 रुपये प्रति क्विंटल दर निर्धारित की गई है। लेकिन क्रय केंद्र धान नहीं खरीद रहे हैं। ऐसे में किसान 900 से 1200 के बीच बिचौलियों के हाथों धान बेचने को मजबूर हैं। किसानों के सामने एक समस्या यह भी है कि उनकी जो फसल जलभराव व बाढ़ में खराब हुई थी। उसे खरीदने के लिए न तो आढ़ती तैयार हैं और न ही क्रय केंद्रों पर इसके लिए कोई योजना है।
क्रय केंद्र एक नवंबर से खुलने थे। यदि नहीं खुले हैं तो संबंधित विभाग से स्पष्टीकरण लिया जाएगा। -ईशान प्रताप सिंह, सीडीओ
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