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रैन बसेरों पर अतिक्रमण, खुले में रात बिता रहे लोग

Thu, 05 Dec 2019 11:39 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 05 Dec 2019 11:39 PM IST
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Encroachment on night shelters, people spending the night in the open
गंदगी की चपेट में दिकौली मेला परिसर पर बना रैन बसेरा। - फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। तराई में चल रही शीतलहर से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी व पछुआ हवा से जिले में लोगों को गलन का एहसास हो रहा है। उधर प्रशासन की ओर से गरीबों, मजदूरों व बेसहारा लोगों को ठंड से बचाने के लिए अब तक कोई इंतजाम नहीं किए गए। जिले में स्थापित रैन बसेरे बदहाल है। कुछ पर लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है तो कई जगहों पर गंदगी का साम्राज्य है। ऐसे में शहरों में मेहनत मजदूरी करने आने वाले मजदूरों तथा बेसहारा लोगों को खुले में रात गुजारनी पड़ रही है।
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जिले में जहां ठंड का प्रकोप बढ़ गया है वहीं प्रशासन की ओर से अब तक न तो गरीबों को कंबल वितरित कराया गया और न ही कहीं अलाव ही जलवाया गया है। वहीं पूर्व से स्थित रैन बसेरों पर अतिक्रमण है। इन्हें अब तक खाली नहीं कराया गया है। कई स्थानों पर रैन बसेरों में धार्मिक संस्थाओं का कब्जा है। वहीं कुछ स्थानों पर सरकारी अमला व आवारा पशु काबिज हैं।
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इसके चलते गरीबों, मजदूरों व बेसहारा लोगों को रात में खुले आसमान के नीचे रहना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति जिले में अधिकांश जगह है। इससे भिनगा व इकौना नगर सहित जिले के अन्य क्षेत्र भी अछूते नहीं हैं। गुरुवार को अमर उजाला ने जब जिले में बने रैन बसेरों की पड़ताल किया तो सच्चाई उजागर हुई। रैनबसेरों में कहीं मवेशी तो कहीं गंदगी देखने को मिली।
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मवेशियों का कब्जा व गंदगी की भरमार
सोनवा थाना क्षेत्र के दिकौली मेला परिसर में बना रैन बसेरा उपेक्षित है। यहां न तो कंबल आदि की व्यवस्था है और न अलाव की। रैन बसेरा में मवेशियों का कब्जा है। जहां पर काफी गंदगी देखने को मिली। रैन बसेरे की फर्श पर गड्ढे बने हैं। आसपास लोगों के घरों का गंदा पानी भरा है। यही स्थित वहीं फोरलेन के पास दिकौली मोड़ पर बने रैन बसेरे की भी है। जहां कुछ लोगों ने गुमटी व दुकान रख कर अतिक्रमण कर रखा है। वही पास में लगे हैंडपंप के चारों तरफ गंदगी व्याप्त है। यहां प्रकाश की भी कोई व्यवस्था नहीं है।
रामलीला कमेटी ने जमा रखा कब्जा
इकौना नगर के रामलीला मैदान में बने रैन बसेरे पर रामलीला कमेटी का कब्जा है। इसे स्थानीय जानकारों की माने तो रामलीला कमेटी की ओर से किराए पर दिया जा रहा है। यहां बिना किराया दिए किसी को पैर रखने की भी इजाजत नहीं है। ठंड से बेहाल मजदूर पेशा लोग व स्थानीय गरीबों को इसका इस्तेमाल करने नहीं दिया जाता। यह पूरी तरह से राम लीला कमेटी की निजी संपत्ति बन कर रह गया है।
पुलिस का कब्जा, नगर पंचायत का कबाड़ भी जमा
इकौना थाने के बगल बने इस रैनबसेरा (पुरानी कांजीहाउस) के पिछले हिस्से पर पुलिस वालों का कब्जा है। वहीं रैन बसेरे का अगला भाग टूट कर जर्जर हो गया है। इसमें नगर पंचायत इकौना ने कबाड़ रखवाया है। इकौना तहसील व ब्लॉक मुख्यालय होने के कारण यहां दूर दराज गांव के लोग भी आते हैं। वहीं प्रमुख कस्बा होने के कारण देश प्रदेश से आने वाले लोग भी देर रात यहां बसों से उतर कर अपने गांव व घर को जाते हैं। कभी कभी ऐसी स्थिति भी आ जाती है कि लोगों को रात इकौना में ही रुकना पड़ता है। लेकिन इस रैन बसेरे में किसी को पैर रखने की इजाजत नहीं है।

रैन बसेरों में गरीबों को ठंड से बचाने के लिए कंबल व अलाव की लकड़ी रखवाने का निर्देश संबंधि नगर निकाय व ग्राम पंचायतों को दिया जा चुका है। रही बात अतिक्रमण की तो इसकी हमें कोई जानकारी नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। यदि कहीं अतिक्रमण है तो उसे हटवा कर सुविधा संपन्न बनाया जाएगा। - योगानंद पांडेय, अपर जिलाधिकारी
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