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मड़ाई से पहले ही खेत में अंकुरित हो रहा धान
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श्रावस्ती। बीते दिनों हुई अतिवृष्टि के कारण राप्ती नदी सहित पहाड़ी नाले उफनाए हुए हैं। तेज हवाओं के साथ हुई बरसात के कारण खेतों में लगी धान की फसल गिरी पड़ी है और खेतों में अभी भी पानी भरा है। इसके चलते खेतों में काट कर रखी धान की फसल मड़ाई से पहले ही अंकुरित होने लगी है। इससे किसानों के लिए फसल की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
विगत वर्ष धान की फसल खराब होने के बाद इस वर्ष किसानों को बेहतर पैदावार की उम्मीद थी। जिले में 75,500 हेक्टेयर भूमि में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके इतर किसानों ने इस वर्ष 77,553 हेक्टेअर क्षेत्र में धान की रोपाई की थी। इसमें 42,112 हेक्टेयर में हाइब्रिड, 2142 हेक्टेयर में बासमती व 31498 हेक्टयर में सामान्य धान की खेती की गई थी। धान की नर्सरी डालने से लेकर अब तक अच्छी बरसात होने के कारण इस वर्ष बेहतर पैदावार की संभावना से किसानों के चेहरों पर खुशी दिख रही थी। लेकिन बीते दिनों हुई अतिवृष्टि व तेज हवाओं ने किसानों के उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
तेज हवा के कारण खेत में लगी फसल गिर गई। वहीं अतिवृष्टि के कारण खेत खलिहान भी जलमग्न हो गए। ऐसे में एक तरफ खेतों में लगी धान की फसल खराब हो रही है तो वहीं जिन किसानों ने धान की फसल काट ली थी, वह भी बिना मड़ाई के ही अंकुरित होने लगी है। इससे किसानों को फसल की लागत भी वापस न लौट पाने की चिंता सताने लगी है। कृषि विभाग के अफसरों की माने तो तेज हवाओं व अतिवृष्टि के कारण करीब 50 फीसदी फसल का नुकसान हुआ है। खेतों में पानी होने के कारण जहां धान की कटाई व मड़ाई का कार्य बाधित है। वहीं खेत व खलिहानों के जलमग्न होने के कारण किसानों के सामने पानी में खराब हो रही फसल को सुखाना भी बड़ी चुनौती है।
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जलभराव के कारण धान की फसल में सबसे अधिक नुकसान सिरसिया में और इसके बाद जमुनहा में हुआ है। यहां बाढ़ के पानी का असर सबसे ज्यादा रहा। जबकि हरिहरपुररानी, इकौना व गिलौला में आंशिक नुकसान देखा गया है। औसतन जिले में धान की 40 से 45 फीसदी फसल के नुकसान की आशंका है।
-डॉ. अवधेश कुमार यादव, जिला कृषि अधिकारी
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विगत वर्ष धान की फसल खराब होने के बाद इस वर्ष किसानों को बेहतर पैदावार की उम्मीद थी। जिले में 75,500 हेक्टेयर भूमि में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके इतर किसानों ने इस वर्ष 77,553 हेक्टेअर क्षेत्र में धान की रोपाई की थी। इसमें 42,112 हेक्टेयर में हाइब्रिड, 2142 हेक्टेयर में बासमती व 31498 हेक्टयर में सामान्य धान की खेती की गई थी। धान की नर्सरी डालने से लेकर अब तक अच्छी बरसात होने के कारण इस वर्ष बेहतर पैदावार की संभावना से किसानों के चेहरों पर खुशी दिख रही थी। लेकिन बीते दिनों हुई अतिवृष्टि व तेज हवाओं ने किसानों के उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
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तेज हवा के कारण खेत में लगी फसल गिर गई। वहीं अतिवृष्टि के कारण खेत खलिहान भी जलमग्न हो गए। ऐसे में एक तरफ खेतों में लगी धान की फसल खराब हो रही है तो वहीं जिन किसानों ने धान की फसल काट ली थी, वह भी बिना मड़ाई के ही अंकुरित होने लगी है। इससे किसानों को फसल की लागत भी वापस न लौट पाने की चिंता सताने लगी है। कृषि विभाग के अफसरों की माने तो तेज हवाओं व अतिवृष्टि के कारण करीब 50 फीसदी फसल का नुकसान हुआ है। खेतों में पानी होने के कारण जहां धान की कटाई व मड़ाई का कार्य बाधित है। वहीं खेत व खलिहानों के जलमग्न होने के कारण किसानों के सामने पानी में खराब हो रही फसल को सुखाना भी बड़ी चुनौती है।
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जलभराव के कारण धान की फसल में सबसे अधिक नुकसान सिरसिया में और इसके बाद जमुनहा में हुआ है। यहां बाढ़ के पानी का असर सबसे ज्यादा रहा। जबकि हरिहरपुररानी, इकौना व गिलौला में आंशिक नुकसान देखा गया है। औसतन जिले में धान की 40 से 45 फीसदी फसल के नुकसान की आशंका है।
-डॉ. अवधेश कुमार यादव, जिला कृषि अधिकारी