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एंबुलेंस कर्मियों का कार्य बहिष्कार, मरीज परेशान

Mon, 26 Jul 2021 11:33 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 26 Jul 2021 11:33 PM IST
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Work boycott of ambulance personnel, patient upset
शामली के जिला अस्पताल में प्रदर्शन करते एंबुलेंस चालक। - फोटो : SHAMLI
एंबुलेंस कर्मियों का कार्य बहिष्कार, मरीज परेशान
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शामली। छह सूत्रीय मांगों को लेकर जिले के एंबुलेंस कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार रखा और जिला अस्पताल में प्रदर्शन किया। केवल इमरजेंसी सेवा के लिए मात्र तीन एंबुलेंस संचालित की गईं। सरकार एंबुलेंस सेवा नहीं मिलने से मरीज परेशान रहे।
एंबुलेंस कर्मचारी संघ उप्र के प्रांतीय आह्वान पर छह सूत्रीय मांगों को लेकर जिले के एंबुलेंस कर्मचारी शुक्रवार से आंदोलनरत हैं। जिले में डायल 108 की 11, 102 की 15 और एएलएस की दो एंबुलेंस संचालित है। सोमवार को एंबुलेंस कर्मचारी जिला अस्पताल में इकट्ठा हुए। उन्होंने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। संघ के जिलाध्यक्ष अमित बालियान ने बताया कि कर्मचारियों को ठेके पर न रखकर एनएचएम में समायोजित करने, कंपनी बदलने पर कर्मचारी न बदलने, कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वाले कर्मचारियों को 50 लाख रुपये की बीमा राशि आश्रितों को देने समेत छह मांगों को लेकर 23 जुलाई से तीन दिवसीय धरना दिया गया। इसके बाद भी शासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, जिस कारण सोमवार को कार्य बहिष्कार कर एंबुलेंस को जिला अस्पताल में खड़ा कर कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। इमरजेंसी सेवा चालू रखने के लिए 108 की तीन एंबुलेंस संचालित रही। इस अवसर पर राहुल, विकास, बिजेंद्र, ओमसिंह, प्रवीण आदि कर्मचारी मौजूद रहे।
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उधर, एंबुलेंस न चलने से मरीज परेशान रहे। सोमवार को सीएचसी पर लीवर की बीमारी से पीड़ित गांव खेड़ा कुरतान निवासी राजेश कुमार सीएचसी पर पहुंचा। शरीर पर सूजन व दर्द होने के कारण चिकित्सकों ने उसे दिल्ली रेफर कर दिया, लेकिन सरकारी एंबुलेंस न मिलने की वजह से परिजन फिलहाल उसे घर ले गए। इसी तरह सामान्य मरीजों व गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए एंबुलेंस न मिलने से परेशानी बनी रही।
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एंबुलेंस सेवा के जिला प्रभारी ललित मोहन जोशी ने बताया कि एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल की वजह से सामान्य मरीजों को जांच आदि के लिए एंबुलेंस की समस्या रही, लेकिन इमरजेंसी के लिए तीन एंबुलेंस चलती रही। जिले में एक दिन में इमरजेंसी सेवा की करीब 80 कॉल होती है, जबकि सामान्य बीमारी के मरीजों की लगभग 200 कॉल होती है।
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