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कई वर्षों से कच्चा है नहर माजरा का मुख्य रास्ता, ग्रामीण परेशान
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गढ़ीपुख्ता। जिले में जहां जगह-जगह सड़कों का निर्माण तेजी से हो रहा है, वहीं गांव भैसवाल के नहर माजरा का मुख्य रास्ता वर्षों से कच्चा है। जिसके चलते ग्रामीणों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जनप्रतिनिधियों से लेकर तमाम अधिकारियों से मांग कर चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया। कच्चे रास्ते पर कब्जे के चलते यह अब संकरा भी हो गया है। ग्रामीणों ने सड़क को पक्का कराने की मांग की है।
ग्रामीण जय सिंह ने बताया कि यह सड़क गांव प्राथमिक विद्यालय के कोने से पूर्वी यमुना नहर मार्ग तक है। जिसकी लंबाई लगभग 800 मीटर है। यह सड़क आज तक पक्की नहीं बनी है। इसके चलते ग्रामीणों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
बाबा नैन सिंह ने बताया कि सड़क निर्माण की मांग कैबिनेट गन्ना मंत्री सुरेश राणा से मिलकर की जा चुकी है। उच्च अधिकारियों को भी प्रार्थना पत्र देकर कई बार मांग की। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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रिखीराम सिंह ने बताया कि इस सड़क के किनारे नाला निर्माण कार्य भी नहीं हुआ है। जिसके चलते गांव के घरों से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी नहीं हो पाती है। गंदा पानी सड़क किनारे आसपास के खेतों में भर जाता है।
महेंद्र कुमार का कहना है कि पहले यह रास्ता लगभग 8 मीटर चौड़ा था। जो सड़क किनारे खेतों के कुछ किसानों ने काटकर अपने खेतों में मिला लिया है। जिसके चलते रास्ता अब संकरा हो गया है।
सुनील कुमार ने बताया कि हमारे गांव में बाहर से बारात की बसें इस रास्ते से गांव में नहीं आ सकती है। बारातियों को पूर्वी यमुना नहर सड़क से गांव में पैदल आना पड़ता है। इस रास्ते पर दो वाहन आमने-सामने से गुजर नहीं सकते हैं।
अजय कुमार का कहना है कि बारिश में इस रास्ते पर पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वर्षों से यह रास्ता कच्चा है। ग्रामीणों की कही भी सुनवाई नहीं हो रही है।
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ग्रामीण जय सिंह ने बताया कि यह सड़क गांव प्राथमिक विद्यालय के कोने से पूर्वी यमुना नहर मार्ग तक है। जिसकी लंबाई लगभग 800 मीटर है। यह सड़क आज तक पक्की नहीं बनी है। इसके चलते ग्रामीणों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
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बाबा नैन सिंह ने बताया कि सड़क निर्माण की मांग कैबिनेट गन्ना मंत्री सुरेश राणा से मिलकर की जा चुकी है। उच्च अधिकारियों को भी प्रार्थना पत्र देकर कई बार मांग की। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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रिखीराम सिंह ने बताया कि इस सड़क के किनारे नाला निर्माण कार्य भी नहीं हुआ है। जिसके चलते गांव के घरों से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी नहीं हो पाती है। गंदा पानी सड़क किनारे आसपास के खेतों में भर जाता है।
महेंद्र कुमार का कहना है कि पहले यह रास्ता लगभग 8 मीटर चौड़ा था। जो सड़क किनारे खेतों के कुछ किसानों ने काटकर अपने खेतों में मिला लिया है। जिसके चलते रास्ता अब संकरा हो गया है।
सुनील कुमार ने बताया कि हमारे गांव में बाहर से बारात की बसें इस रास्ते से गांव में नहीं आ सकती है। बारातियों को पूर्वी यमुना नहर सड़क से गांव में पैदल आना पड़ता है। इस रास्ते पर दो वाहन आमने-सामने से गुजर नहीं सकते हैं।
अजय कुमार का कहना है कि बारिश में इस रास्ते पर पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वर्षों से यह रास्ता कच्चा है। ग्रामीणों की कही भी सुनवाई नहीं हो रही है।