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कांटों भरा है खाप के चौधरी का ताज: नरेश टिकैत
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कांटों भरा है खाप के चौधरी का ताज: नरेश टिकैत
शामली। गठवाला खाप के चौधरी हरिकिशन मलिक की रस्म तेरहवीं पर गांव लिसाढ़ में रविवार के सुबह से ही खाप चौधरी और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का जुटना शुरू हो गया था। शोकसभा के दौरान भाकियू अध्यक्ष एवं बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि खाप के चौधरी का ताज कांटों भरा है। अटपटे फैसलों को लेकर खापों पर उंगलियां उठती हैं, इसलिए कोई भी निर्णय लें तो सोच-समझकर लें।
रविवार को सुबह आठ बजे से लिसाढ़ गांव में चौधरी हरिकिशन मलिक के आवास पर हवन शुरू हो गया। मुख्य यजमान राजेंद्र मलिक सपत्नीक रहे। खाप चौधरियों और आसपास के लोगों ने हवन में आहुति दी। शांतिपाठ के बाद दो मिनट का मौन रखकर बाबा हरिकिशन मलिक की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि खाप चौधरियों को लोकसभा, विधानसभा चुनाव और राजनैतिक दलों से बचना होगा। खाप चौधरियों के जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। खाप चौधरी समाज के लिए समर्पित होते हैं। समाज को सुधारने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होती है। उन्होंने कहा कि किसी तरह का कोई गिला-शिकवा नहीं है। भूलचूक होती रहती है। खाप चौधरियों को न्याय के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहिए। खाप चौधरी के यहां तवा-तवी ठंडी न रखी जाए। हुक्का बरकरार रखा जाए।
खुद का आंदोलन स्थगित कर पहुंच गए थे बरेली
शामली। शोक सभा के दौरान राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह ने कहा कि बाबा हरिकिशन मलिक के लिए किसान हित सर्वोपरि था। 29 अक्तूबर 2008 को बसपा सरकार में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने गन्ना मूल्य बढ़ाने के लिए बरेली में आंदोलन करने की घोषणा की थी, जबकि बाबा हरिकिशन मलिक ने मुजफ्फरनगर कलक्ट्रेट घेरने का एलान कर रखा था। सरदार वीएम सिंह ने बताया कि उन्होंने बाबा हरिकिशन मलिक से बात की, तो उन्होंने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया और बड़ी संख्या में लोगों के साथ बरेली पहुंच गए। आंदोलन से दबाव में आई सरकार को गन्ने का दाम बढ़ाना पड़ा था। उधर, बुढ़ाना विधायक उमेश मलिक ने कहा कि बाबा हरिकिशन मलिक बेहद भावुक व्यक्ति थे। विधायक ने कहा कि 2013 में हुए दंगे के मामले में जब वह जेल में थे, तो बाबा उनसे मिलने गए थे और उनका हौसला बढ़ाया था।
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शामली। गठवाला खाप के चौधरी हरिकिशन मलिक की रस्म तेरहवीं पर गांव लिसाढ़ में रविवार के सुबह से ही खाप चौधरी और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का जुटना शुरू हो गया था। शोकसभा के दौरान भाकियू अध्यक्ष एवं बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि खाप के चौधरी का ताज कांटों भरा है। अटपटे फैसलों को लेकर खापों पर उंगलियां उठती हैं, इसलिए कोई भी निर्णय लें तो सोच-समझकर लें।
रविवार को सुबह आठ बजे से लिसाढ़ गांव में चौधरी हरिकिशन मलिक के आवास पर हवन शुरू हो गया। मुख्य यजमान राजेंद्र मलिक सपत्नीक रहे। खाप चौधरियों और आसपास के लोगों ने हवन में आहुति दी। शांतिपाठ के बाद दो मिनट का मौन रखकर बाबा हरिकिशन मलिक की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि खाप चौधरियों को लोकसभा, विधानसभा चुनाव और राजनैतिक दलों से बचना होगा। खाप चौधरियों के जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। खाप चौधरी समाज के लिए समर्पित होते हैं। समाज को सुधारने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होती है। उन्होंने कहा कि किसी तरह का कोई गिला-शिकवा नहीं है। भूलचूक होती रहती है। खाप चौधरियों को न्याय के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहिए। खाप चौधरी के यहां तवा-तवी ठंडी न रखी जाए। हुक्का बरकरार रखा जाए।
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खुद का आंदोलन स्थगित कर पहुंच गए थे बरेली
शामली। शोक सभा के दौरान राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह ने कहा कि बाबा हरिकिशन मलिक के लिए किसान हित सर्वोपरि था। 29 अक्तूबर 2008 को बसपा सरकार में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने गन्ना मूल्य बढ़ाने के लिए बरेली में आंदोलन करने की घोषणा की थी, जबकि बाबा हरिकिशन मलिक ने मुजफ्फरनगर कलक्ट्रेट घेरने का एलान कर रखा था। सरदार वीएम सिंह ने बताया कि उन्होंने बाबा हरिकिशन मलिक से बात की, तो उन्होंने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया और बड़ी संख्या में लोगों के साथ बरेली पहुंच गए। आंदोलन से दबाव में आई सरकार को गन्ने का दाम बढ़ाना पड़ा था। उधर, बुढ़ाना विधायक उमेश मलिक ने कहा कि बाबा हरिकिशन मलिक बेहद भावुक व्यक्ति थे। विधायक ने कहा कि 2013 में हुए दंगे के मामले में जब वह जेल में थे, तो बाबा उनसे मिलने गए थे और उनका हौसला बढ़ाया था।
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