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सरकारी एंबुलेंस में सड़कों पर गूंज रही नवजात बच्चों की किलकारियां

Tue, 07 Jun 2022 12:30 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jun 2022 12:30 AM IST
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The screams echoing on the streets in the government ambulance
सरकारी एंबुलेंस में डिलीवरी के दौरान जन्मा बच्चा फाइल फोटो - फोटो : SHAMLI
शामली। जिले की सरकारी एंबुलेंस चलता-फिरता प्रसव वार्ड बन रही है। एंबुलेंस में अस्पताल ले जाते समय गर्भवती महिलाओं का बीच रास्ते में प्रसव होने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। जिले में इस साल लगभग पांच माह के भीतर अब तक एंबुलेंस में 39 प्रसव हो चुके हैं। खास बात ये है कि सभी प्रसव सामान्य हुए हैं। प्रसव के बाद अस्पताल में जांच कराने पर जच्चा-बच्चा स्वस्थ मिले हैं।
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जिले में आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं के लिए सरकारी 102 की 15 एंबुलेंस और 108 की 11 एंबुलेंस चल रही है। ये एंबुलेंस कॉल करने पर तत्काल मौके पर पहुंचकर आवश्यक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराती है। इन एंबुलेंस पर प्रशिक्षित स्टाफ के तौर पर इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (ईएमटी) चालक के साथ तैनात रहते हैं। पिछले कुछ समय से अक्सर देखने में आ रहा है कि गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाते समय बीच रास्ते में ही प्रसव हो रहा है। एंबुलेंस पर तैनात ईएमटी गांव की आशा की मदद से महिला को प्रसव कराते हैं। खास बात ये है कि सभी प्रसव सामान्य हुए हैं और बाद जच्चा-बच्चा भी जांच में स्वस्थ पाए गए हैं। इस तरह से सरकारी एंबुलेंस एक तरह से चलता-फिरता अस्पताल का प्रसव वार्ड बनी हुई है। जिनमें बीच रास्ते में नवजात बच्चों की किलकारियां गूंजती है।
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माह में औसतन सात प्रसव हो रहे एंबुलेंस में
इस साल में जनवरी से पांच जून तक एंबुलेंस में करीब 39 सुरक्षित प्रसव कराए जा चुके हैं। ऐसे में एक माह में एंबुलेंस के भीतर सात प्रसव का औसत आ रहा है।
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प्रशिक्षित ईएमटी रहती है तैनाती
सरकारी एंबुलेंस सेवा के जिला प्रभारी ललित मोहन जोशी का कहना है कि एंबुलेंस पर प्रशिक्षित ईएमटी की तैनाती रहती है। अगर किसी महिला को बीच रास्ते में परेशानी ज्यादा होती है तो उसे प्रसव कराया जाता है। प्रसव के बाद जच्चा और बच्चा को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। एंबुलेंस में अब तक जितने भी प्रसव के केस हुए हैं, सभी सही और सुरक्षित हुए हैं।
देर से कॉल करने के कारण हो रहे हैं प्रसव
एंबुलेंस के सहायक जिला प्रभारी अमित बालियान का कहना है कि एंबुलेंस को कॉल देर से की जाती है। फिर घर से गर्भवती महिला को लाने में परिजन समय लगाते हैं। इस वजह से रास्ते में प्रसव पीड़ा जब तेज होती है, तो उस स्थिति में एंबुलेंस को बीच रास्ते में रोककर ही प्रसव कराया जाता है।

घर पर ही प्रसव कराने का रहता है प्रयास
महिला रोग विशेषज्ञ डा. नीलम शुक्ला का कहना है कि गर्भवती महिला को कई घंटे पहले प्रसव पीड़ा शुरू हो जाती है। एंबुलेंस में प्रसव होने का मुख्य कारण ये होता है कि खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में कि परिजन पहले घर ही प्रसव कराने की कोशिश करते हैं, लेकिन जब लगता है घर पर प्रसव नहीं हो पाएगा, तब अस्पताल लेकर चलते हैं। उस समय तक प्रसव पीड़ा तेज हो जाती है, जिस कारण बीच रास्ते में प्रसव हो जाता है। इसलिए प्रसव पीड़ा शुरू होते ही गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना चाहिए।
इस साल एंबुलेंस में हुए प्रसव का आंकड़ा
माह - केस
जनवरी - 07
फरवरी - 04
मार्च - 09
अप्रैल - 09
मई - 08
जून (अब तक) -02
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