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हौसले के दम पर सरला ने लिखी कामयाबी की इबारत
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सरला मलिक
- फोटो : SHAMLI
शामली। जीवन में कभी संकट का सामना करना पड़े तो इंसान को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। अपना हौसला बनाकर रखें तो सफलता जरूर मिलती है। यह कहना है कि शहर के झिंझाना रोड टीचर कालोनी निवासी सरला मलिक का। पति के निधन उन्होंने बेटा और दो बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाकर उन्हें कामयाब बनाया। उनका जीवन संघर्ष महिलाओं के लिए किसी प्रेरणास्रोत से कम नहीं है।
सरला मलिक के पति यशपाल वेटेनरी डॉक्टर थे। 1985 में उनके पति का आकस्मिक निधन हो गया था। उन पर तीन बच्चों को पढ़ाने और उनकी परवरिश की जिम्मेदारी आ गई। उस समय बड़ी बेटी निधि 11 साल की थी, उससे छोटी बेटी विनीता नौ साल और सबसे छोटा बेटा निहार सात साल का था। हिंदू कन्या इंटर कालेज में करीब 35 साल तक शिक्षिका के रूप में काम करने वाली सरला के सामने तीनों बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना उस समय मुश्किल हो गया।
उन्होंने कालेज से आने के बाद ट्यूशन पढ़ाया और अन्य कार्य करते हुए जीवन में कड़ा संघर्ष कर तीनों बच्चों को पढ़ाया। उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि आज उनका बेटा निहार मलिक यूएसए में मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब कर रहा है। बड़ी बेटी निधि एमए बीएड किया। छोटी बेटी विनीता एमडी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर है। उन्होंने बताया कि पति के जाने के बाद एक बार तो उनकी हिम्मत टूट गई थी, लेकिन किसी तरह अपने को संभाला। तीनों बच्चों की कामयाबी पर आज वह बहुत खुश हैं।
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सरला मलिक के पति यशपाल वेटेनरी डॉक्टर थे। 1985 में उनके पति का आकस्मिक निधन हो गया था। उन पर तीन बच्चों को पढ़ाने और उनकी परवरिश की जिम्मेदारी आ गई। उस समय बड़ी बेटी निधि 11 साल की थी, उससे छोटी बेटी विनीता नौ साल और सबसे छोटा बेटा निहार सात साल का था। हिंदू कन्या इंटर कालेज में करीब 35 साल तक शिक्षिका के रूप में काम करने वाली सरला के सामने तीनों बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना उस समय मुश्किल हो गया।
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उन्होंने कालेज से आने के बाद ट्यूशन पढ़ाया और अन्य कार्य करते हुए जीवन में कड़ा संघर्ष कर तीनों बच्चों को पढ़ाया। उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि आज उनका बेटा निहार मलिक यूएसए में मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब कर रहा है। बड़ी बेटी निधि एमए बीएड किया। छोटी बेटी विनीता एमडी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर है। उन्होंने बताया कि पति के जाने के बाद एक बार तो उनकी हिम्मत टूट गई थी, लेकिन किसी तरह अपने को संभाला। तीनों बच्चों की कामयाबी पर आज वह बहुत खुश हैं।
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