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बरसात से आलू की बुवाई पंद्रह दिन पिछड़ी
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बरसात से आलू की बुवाई पंद्रह दिन पिछड़ी
शामली। सितंबर में बरसात के कारण आलू की बुवाई 15 दिन पिछड़ गई है। बरसात खत्म होने के बाद अब किसान आलू की बुवाई की तैयारियों में जुट गए हैं। किसानों को सिर्फ बाहर से आने वाले बीज मिलने का इंतजार है। अगले सप्ताह से आलू की बुवाई शुरू हो जाएगी। जिले के झिंझाना, जलालाबाद, थानाभवन और शामली ब्लाक में आलू की 700-800 हेक्टेयर खेती होती है। किसान सितंबर के आखिरी सप्ताह से लेकर अक्तूबर के पूरे महीने और नवंबर माह के प्रथम सप्ताह में आलू की बुवाई करते हैं। यहां के जिले के ज्यादातर किसान आलू चिप्सोना, डायमंड, पुखराज, फ्राईसोना, संगम, थ्राईवन, नीलकंठ और सुख्याति समेत कई प्रजाति की बुवाई करते हैं। आलू की बुवाई के लिए किसान सरकारी बीज पर निर्भर नहीं है। वह अपना आलू बुवाई के लिए बीज के रूप में प्रयोग करते हैं। पंजाब, मेरठ से बीज लाकर बुआई करते है। इस साल सितंबर माह में ज्यादा बरसात होने से किसान आलू की बुवाई के लिए खेत तैयार नहीं कर पाए है।
अक्तूबर शुरू होने के बावजूद सितंबर में हुई बरसात के कारण खेतों में अभी नमी है, जिस कारण बुवाई का कार्य लेट हो रहा है। शामली शहर के माजरा रोड के प्रगतिशील किसान सन्नी निर्वाल, सूरज निर्वाल का कहना है कि खेतों में नमी खत्म होने के बाद वह आलू की बुवाई के लिए इसी सप्ताह खेत तैयारी शुरू कर देंगे। पिछले साल पंजाब और मेरठ के मोदीपुरम से आलू का बीज खरीद कर बुवाई की थी। जलालाबाद क्षेत्र के दखौड़ी जमालपुर निवासी ठाकुर प्रदीप सिंह ने बताया कि बरसात के कारण आलू की बुवाई पंद्रह दिन लेट हो गई है। वह दस अक्तूबर से बारह अक्तूूबर को आलू की बुवाई शुरू कर देंगे।
जिला उद्यान अधिकारी हरित कुमार ने बताया कि जिले में आलू की बुवाई के लिए 100 क्विंटल बीज का डिमांड की गई है। 20 अक्तूबर के बाद डिमांड किया गया बीज उपलब्ध हो जाने की संभावना है। शासन से जनपद वार बीज उपलब्ध होने के बाद किसानों को पहले आओ और पहले पाओ का वितरण किया जाएगा।
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शामली। सितंबर में बरसात के कारण आलू की बुवाई 15 दिन पिछड़ गई है। बरसात खत्म होने के बाद अब किसान आलू की बुवाई की तैयारियों में जुट गए हैं। किसानों को सिर्फ बाहर से आने वाले बीज मिलने का इंतजार है। अगले सप्ताह से आलू की बुवाई शुरू हो जाएगी। जिले के झिंझाना, जलालाबाद, थानाभवन और शामली ब्लाक में आलू की 700-800 हेक्टेयर खेती होती है। किसान सितंबर के आखिरी सप्ताह से लेकर अक्तूबर के पूरे महीने और नवंबर माह के प्रथम सप्ताह में आलू की बुवाई करते हैं। यहां के जिले के ज्यादातर किसान आलू चिप्सोना, डायमंड, पुखराज, फ्राईसोना, संगम, थ्राईवन, नीलकंठ और सुख्याति समेत कई प्रजाति की बुवाई करते हैं। आलू की बुवाई के लिए किसान सरकारी बीज पर निर्भर नहीं है। वह अपना आलू बुवाई के लिए बीज के रूप में प्रयोग करते हैं। पंजाब, मेरठ से बीज लाकर बुआई करते है। इस साल सितंबर माह में ज्यादा बरसात होने से किसान आलू की बुवाई के लिए खेत तैयार नहीं कर पाए है।
अक्तूबर शुरू होने के बावजूद सितंबर में हुई बरसात के कारण खेतों में अभी नमी है, जिस कारण बुवाई का कार्य लेट हो रहा है। शामली शहर के माजरा रोड के प्रगतिशील किसान सन्नी निर्वाल, सूरज निर्वाल का कहना है कि खेतों में नमी खत्म होने के बाद वह आलू की बुवाई के लिए इसी सप्ताह खेत तैयारी शुरू कर देंगे। पिछले साल पंजाब और मेरठ के मोदीपुरम से आलू का बीज खरीद कर बुवाई की थी। जलालाबाद क्षेत्र के दखौड़ी जमालपुर निवासी ठाकुर प्रदीप सिंह ने बताया कि बरसात के कारण आलू की बुवाई पंद्रह दिन लेट हो गई है। वह दस अक्तूबर से बारह अक्तूूबर को आलू की बुवाई शुरू कर देंगे।
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जिला उद्यान अधिकारी हरित कुमार ने बताया कि जिले में आलू की बुवाई के लिए 100 क्विंटल बीज का डिमांड की गई है। 20 अक्तूबर के बाद डिमांड किया गया बीज उपलब्ध हो जाने की संभावना है। शासन से जनपद वार बीज उपलब्ध होने के बाद किसानों को पहले आओ और पहले पाओ का वितरण किया जाएगा।
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