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फिंगर प्रिंट के लिए मुजफ्फरनगर का सहारा
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शामली। जनपद शामली में फिंगर प्रिंट लेने के लिए अभी कोई टीम नहीं है। आपराधिक घटना होने पर या पेशेवर अपराधी के पकड़े जाने पर मुजफ्फरनगर से ही फील्ड यूनिट की टीम बुलाई जाती है। थानों में एक्सपर्ट पुलिसकर्मी न होने के कारण अपराधियों के फिंगर प्रिंट नहीं लिए जाते।
किसी भी बड़ी वारदात के खुलासे के लिए फिंगर प्रिंट और घटना स्थल से लिए गए नमूने अहम साक्ष्य होते हैं, लेकिन शामली को जिला बने हुए आठ साल से अधिक का समय हो गया है। अभी तक जनपद में फिंगर प्रिंट और फोरेंसिक टीम की व्यवस्था अभी तक उपलब्ध नहीं है। जब भी जनपद में कोई बड़ी आपराधिक घटना होती है तो मुजफ्फरनगर से ही फील्ड यूनिट को बुलाया जाता है। इसके बाद ही फिंगर प्रिंट और नमूने लेने की प्रक्रिया होती है। मुजफ्फरनगर से जब तक टीम आती है तब तक साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। पुलिस का कहना है कि जनपद में अपराधी पकड़े जाने पर या अज्ञात शव मिलने पर साक्ष्य के लिए फिंगर प्रिंट लेने व नमूने लेने के लिए मुजफ्फरनगर की फील्ड यूनिट टीम को बुलाया जाता है।
थानों में फिंगर प्रिंट लेने को एक्सपर्ट पुलिसकर्मी नहीं
शासन स्तर से निर्देश है कि आपराधिक वारदात में पकड़े जाने वाले बदमाशों के फिंगर प्रिंट लेकर उनका डाटा सुरक्षित रखा जाए। बताया गया है कि यह निर्णय पूर्व में इसलिए लिया गया था कि अपराधी प्रवृत्ति के घुुमंतू जनजातीय गिरोह के सदस्यों का ठिकाना, नाम, पता अक्सर बदलता रहता है। इनकी पहचान के लिए थाना स्तर पर फिंगर प्रिंट लेने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन थानों में फिंगर प्रिंट लेने के एक्सपर्ट पुलिसकर्मी न होने के कारण यह व्यवस्था लागू नहीं हो पाई। पेशेवर अपराधी या बड़ी वारदात में ही फिंगर प्रिंट लिए जाते है। इनकी जांच और मिलान के लिए लखनऊ विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाता है।
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अजय पाठक और उनके परिवार हत्याकांड में मुजफ्फरनगर से पहुंची थी टीम
चार दिन पहले शहर की पंजाबी कालोनी में हुए अजय पाठक परिवार हत्याकांड में साक्ष्य संकलन के लिए फिंगर प्रिंट लेने और नमूने संकलित करने के लिए मुजफ्फरनगर से ही टीम बुलाई गई थी। करीब दो घंटे बाद पहुंची टीम ने घटनास्थल से फिंगर प्रिंट, रक्त और बाल आदि के नमूने साक्ष्य के तौर पर संकलित किए गए थे।
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कोट
जनपद में फील्ड यूनिट टीम न होने के कारण फिंगर प्रिंट और नमूने लेने के लिए फोरेंसिक टीम मुजफ्फरनगर से आती है। पेशेवर अपराधियों के पकड़े जाने पर या अज्ञात शव मिलने पर फिंगर प्रिंट लिए जाते है। उनका डाटा सुरक्षित रखा जाता है। जब भी जरूरत पड़ती तो उनका मिलान कराया जाता है। - राजेश कुमार श्रीवास्तव, एएसपी।
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किसी भी बड़ी वारदात के खुलासे के लिए फिंगर प्रिंट और घटना स्थल से लिए गए नमूने अहम साक्ष्य होते हैं, लेकिन शामली को जिला बने हुए आठ साल से अधिक का समय हो गया है। अभी तक जनपद में फिंगर प्रिंट और फोरेंसिक टीम की व्यवस्था अभी तक उपलब्ध नहीं है। जब भी जनपद में कोई बड़ी आपराधिक घटना होती है तो मुजफ्फरनगर से ही फील्ड यूनिट को बुलाया जाता है। इसके बाद ही फिंगर प्रिंट और नमूने लेने की प्रक्रिया होती है। मुजफ्फरनगर से जब तक टीम आती है तब तक साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। पुलिस का कहना है कि जनपद में अपराधी पकड़े जाने पर या अज्ञात शव मिलने पर साक्ष्य के लिए फिंगर प्रिंट लेने व नमूने लेने के लिए मुजफ्फरनगर की फील्ड यूनिट टीम को बुलाया जाता है।
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थानों में फिंगर प्रिंट लेने को एक्सपर्ट पुलिसकर्मी नहीं
शासन स्तर से निर्देश है कि आपराधिक वारदात में पकड़े जाने वाले बदमाशों के फिंगर प्रिंट लेकर उनका डाटा सुरक्षित रखा जाए। बताया गया है कि यह निर्णय पूर्व में इसलिए लिया गया था कि अपराधी प्रवृत्ति के घुुमंतू जनजातीय गिरोह के सदस्यों का ठिकाना, नाम, पता अक्सर बदलता रहता है। इनकी पहचान के लिए थाना स्तर पर फिंगर प्रिंट लेने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन थानों में फिंगर प्रिंट लेने के एक्सपर्ट पुलिसकर्मी न होने के कारण यह व्यवस्था लागू नहीं हो पाई। पेशेवर अपराधी या बड़ी वारदात में ही फिंगर प्रिंट लिए जाते है। इनकी जांच और मिलान के लिए लखनऊ विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाता है।
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अजय पाठक और उनके परिवार हत्याकांड में मुजफ्फरनगर से पहुंची थी टीम
चार दिन पहले शहर की पंजाबी कालोनी में हुए अजय पाठक परिवार हत्याकांड में साक्ष्य संकलन के लिए फिंगर प्रिंट लेने और नमूने संकलित करने के लिए मुजफ्फरनगर से ही टीम बुलाई गई थी। करीब दो घंटे बाद पहुंची टीम ने घटनास्थल से फिंगर प्रिंट, रक्त और बाल आदि के नमूने साक्ष्य के तौर पर संकलित किए गए थे।
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कोट
जनपद में फील्ड यूनिट टीम न होने के कारण फिंगर प्रिंट और नमूने लेने के लिए फोरेंसिक टीम मुजफ्फरनगर से आती है। पेशेवर अपराधियों के पकड़े जाने पर या अज्ञात शव मिलने पर फिंगर प्रिंट लिए जाते है। उनका डाटा सुरक्षित रखा जाता है। जब भी जरूरत पड़ती तो उनका मिलान कराया जाता है। - राजेश कुमार श्रीवास्तव, एएसपी।