विश्व संगीत दिवस: शास्त्रीय संगीत के लिए दुनिया में विख्यात किराना घराना, नंगे पांव चले थे गायक मन्ना डे
1872 में कैराना में जन्मे उस्ताद अब्दुल करीम खां ने की थी किराना घराना की स्थापना
-नगर के एक खंडहरनुमा मकान में रहते हैं उस्ताद अब्दुल करीम खां के वंशज
-किराना घराना के नाम पर म्यूजियम या स्मृति द्वार बनवाने के लिए शासन को भेजी थी रिपोर्ट
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अब्दुल करीम खां ने अपनी जन्म भूमि कैराना के नाम पर ही अपने संगीत का नाम किराना घराना रखा। किराना घराना विशिष्ट ख्याल गायकी, ठुमरी, दादरा, भजन और मराठी नाट्य संगीत के लिए विख्यात हुआ। उस्ताद अब्दुल करीम खां को सारंगी, वीणा, सितार और तबला में महारथ हासिल थी।
गायक मन्ना डे कैराना की धरती पर चले थे नंगे पाव
1970 में गायक मन्ना डे एक प्रोग्राम में शामिल होने के लिए कैराना आए थे। यहां पर मन्ना डे ने अपने जूते उतारे और नंगे पांव चलकर कैराना की मिट्टी को अपने माथे पर लगाया। उन्होंने कहा था कि यह धरती संगीतकारों के लिए तीर्थ समान है। यहां जूते पहने कर चलना गुस्ताखी होगा। मशहूर गायक मोहम्मद रफी भी किराना घराना के संस्थापक अब्दुल करीम खां के शिष्य थे।
किराना घराना के प्रमुख संगीताकार
किराना घराने के प्रमुख कलाकारों की सूची में कई महान व बड़े-बड़े धुरंधरों के नाम शामिल हैं। जिनके तेज प्रभाव व स्वर उच्चारण ने किराना घराने को अग्रसर करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। जैसे मूल पुरुष बीनकार बंदे अली खां साहब, अब्दुल करीम खां के प्रमुख शिष्य हीराबाई, संवाई गंधर्व, विश्वनाथ जाधव, दशरथ मूले, बेहरे बुआ, बन्नू बाई, हरिश्चंद्र कपिलेश्वरी, शंकर कपिलेश्वरी आदि। इस घराने के अन्य गायकों में पंडित भीमसेन जोशी, फिरोज दस्तूर, डॉ. देशपांडे, गंगू बाई हंगल, रजब अली खां, उस्ताद अमीर खां, पाकिस्तानी सुप्रसिद्ध गायिका रोशन आरा बेगम इत्यादि के नाम हैं।
किराना घराना के नाम पर म्यूजियम अथवा स्मृति द्वार बनवाने के लिए शासन को भेजी रिपोर्ट
2019 में सपा विधायक नाहिद हसन ने विधानसभा सत्र के दौरान किराना घराना का मुद्दा उठाया था। करीब 3 माह पहले शासन ने किराना घराना के नाम पर म्यूजियम अथवा स्मृति द्वार बनवाने के लिए स्थानीय प्रशासन से रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ने लेखपालों की टीम भेज कर जांच कराई थी। अधिशासी अधिकारी इंद्र पाल सिंह ने बताया कि लेखपालों ने जांच के बाद बताया था कि नगर के मोहल्ला पीपलोतला में एक खंडहर नुमा मकान है। इसमें अब्दुल करीम खां की चौथी अथवा पांचवीं पीढ़ी रहती है, जिसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।