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स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ी, गंभीर रोगों के उपचार की मिली सुविधा
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स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ी, गंभीर रोगों के उपचार की मिली सुविधा
शामली। 35 साल के सफर में अमर उजाला समय-समय पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और जरूरतों को लेकर लोगों की आवाज बना है। इस सफर में जनपद में चिकित्सा सुविधाएं भी तेजी से बढ़ी हैं, जिससे मरीजों को काफी राहत मिली है। सरकारी अस्पतालों के साथ प्राइवेट अस्पतालों की संख्या बढ़ने के साथ ही सुविधाएं बढ़ने से गंभीर रोगों का इलाज यहीं मिलने लगा है।
तीन दशक पहले नजर डाले तो शहर में मरीजों के उपचार के लिए सरशादीलाल मेमोरियल अस्पताल था। इस अस्पताल का शिलान्यास 1975 में तत्कालीन राज्यपाल डॉ. एम चेन्ना रेड्डी ने किया था। इसके तीन साल बाद इसका नाम बदलकर सरशादी लाल राजकीय संयुक्त चिकित्सालय हुआ था। बाद में सरशादी लाल मेमोरियल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हुआ। इस अस्पताल में पहले जच्चा-बच्चा की देखभाल होती थी। विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी के कारण सामान्य ओपीडी ही हो पाती थी और किसी तरह की जांच की सुविधा नहीं थी। रसौली, गांठ आदि के सामान्य आपरेशन ही होते थे। मरीजों की संख्या पूरे साल में 20 हजार के करीब रहती थी। 28 सितंबर 2011 को जनपद बनने के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं में तेजी आई। सीएचसी को जिला अस्पताल के रूप में संचालित किया गया। इसे 25 बेड से बढ़ाकर 44 बेड का किया गया। पिछले साल जिला संयुक्त चिकित्सालय का उद्घाटन हुआ। सीएमओ कार्यालय चालू हुआ। इस साल 16 अगस्त से ओपीडी शुरू हुई। हाल ही में ईएनटी सर्जन और आई सर्जन समेत कई चिकित्सकों की नियुक्ति हुई। कोरोना काल में मरीजों के उपचार के लिए कोविड अस्पताल बनाया गया। अब जिला अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा भी चालू हो गई है। तीन ऑक्सीजन प्लांट भी चालू हो गए।
जिले में ये मिल रहीं सुविधाएं
पैथोलॉजी लैब बनने से कई तरह की जांच होने के अलावा टीबी की जांच के लिए डॉट्स सेंटर, बच्चों का टीकाकरण, एंटी रेबीज इंजेक्शन, गर्भवती महिलाओं की जांच, एड्स रोगियों के लिए काउंसिलिंग सेंटर, परिवार नियोजन के लिए काउंसिलिंग सेंटर आदि चल रहे हैं।
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शामली। 35 साल के सफर में अमर उजाला समय-समय पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और जरूरतों को लेकर लोगों की आवाज बना है। इस सफर में जनपद में चिकित्सा सुविधाएं भी तेजी से बढ़ी हैं, जिससे मरीजों को काफी राहत मिली है। सरकारी अस्पतालों के साथ प्राइवेट अस्पतालों की संख्या बढ़ने के साथ ही सुविधाएं बढ़ने से गंभीर रोगों का इलाज यहीं मिलने लगा है।
तीन दशक पहले नजर डाले तो शहर में मरीजों के उपचार के लिए सरशादीलाल मेमोरियल अस्पताल था। इस अस्पताल का शिलान्यास 1975 में तत्कालीन राज्यपाल डॉ. एम चेन्ना रेड्डी ने किया था। इसके तीन साल बाद इसका नाम बदलकर सरशादी लाल राजकीय संयुक्त चिकित्सालय हुआ था। बाद में सरशादी लाल मेमोरियल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हुआ। इस अस्पताल में पहले जच्चा-बच्चा की देखभाल होती थी। विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी के कारण सामान्य ओपीडी ही हो पाती थी और किसी तरह की जांच की सुविधा नहीं थी। रसौली, गांठ आदि के सामान्य आपरेशन ही होते थे। मरीजों की संख्या पूरे साल में 20 हजार के करीब रहती थी। 28 सितंबर 2011 को जनपद बनने के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं में तेजी आई। सीएचसी को जिला अस्पताल के रूप में संचालित किया गया। इसे 25 बेड से बढ़ाकर 44 बेड का किया गया। पिछले साल जिला संयुक्त चिकित्सालय का उद्घाटन हुआ। सीएमओ कार्यालय चालू हुआ। इस साल 16 अगस्त से ओपीडी शुरू हुई। हाल ही में ईएनटी सर्जन और आई सर्जन समेत कई चिकित्सकों की नियुक्ति हुई। कोरोना काल में मरीजों के उपचार के लिए कोविड अस्पताल बनाया गया। अब जिला अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा भी चालू हो गई है। तीन ऑक्सीजन प्लांट भी चालू हो गए।
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जिले में ये मिल रहीं सुविधाएं
पैथोलॉजी लैब बनने से कई तरह की जांच होने के अलावा टीबी की जांच के लिए डॉट्स सेंटर, बच्चों का टीकाकरण, एंटी रेबीज इंजेक्शन, गर्भवती महिलाओं की जांच, एड्स रोगियों के लिए काउंसिलिंग सेंटर, परिवार नियोजन के लिए काउंसिलिंग सेंटर आदि चल रहे हैं।
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