शामली के शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला काजीवाड़ा में एक मकान में तेज धमाके के साथ विस्फोट हो गया। आग लगने और मकान की दीवार गिरने से मलबे में दबकर एक महिला की मौत हो गई, जबकि दो लोग घायल हो गए।
मोहल्ला काजीवाड़ा में बुधवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे हाजी शौकत के मकान में तेज धमाका हुआ। धमाके के कारण घर के अंदर की दीवार गिर गई। मलबे की चपेट में आने से शौकत के पुत्र मुनव्वर की पत्नी खुशनुमा (50), मुनव्वर की सास नूरजहां (75) निवासी लोनी, गाजियाबाद और मुनव्वर का पुत्र सबरेज (12) घायल हो गए। आग लगने और मलबा गिरने से घर में खड़ी स्कूटी व अन्य सामान भी नष्ट हो गया। वहीं मोहल्लेवासियों की मदद से घायलों को निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से खुशनुमा और सबरेज को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। रास्ते में खुशनुमा की मौत हो गई। उधर, विस्फोट की जानकारी मिलते ही कोतवाली पुलिस के साथ फायर ब्रिगेड की दो गाड़ी मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक आग काफी हद तक बुझ चुकी थी।
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ग्रामीणों से जानकारी लेती पुलिस।
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इसके बाद एएसपी ओपी सिंह, एसडीएम सदर संदीप कुमार, सीएफओ दीपक शर्मा ने मौके पर पहुंचकर छानबीन की। फोरेंसिक टीम ने भी पहुंचकर जांच पड़ताल की।
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हादसे के बाद इकट्ठा हुए लोग।
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मोहल्ला काजीवाड़ा में घनी आबादी के बीच घर में रखे पटाखों में हुआ धमाका इतना तेज था कि एक किमी दूर तक उसकी आवाज सुनाई दी। लोग घरों से बाहर निकले तो महिलाएं व बच्चों ने छतों पर पहुंचकर जानकारी जुटाई। मोहल्ला काजीवाड़ा में हाजी शौकत के मकान में हुआ धमाका ऐसा था कि मानो कोई बम फट गया हो। पुलिस अधिकारी भी धमाके की आवाज सुनकर घटनास्थल की तरफ दौड़े। फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियों के साथ सीएफओ भी मौके पर पहुंचे। घर से धुआं निकलता देख लोगों को आग लगने की जानकारी हुई। करीब एक घंटे तक अफरा-तफरी का माहौल रहा।
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मकान में विस्फोट।
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सीएफओ दीपक शर्मा ने बताया कि हाजी शौकत के नाम से पटाखा बनाने का लाइसेंस है। पटाखे रखने का गोदाम शहर से दूर गांव टपराना गाजीपुर में होना बताया गया है। आबादी के बीच घर में पटाखे रखे जाना अवैध है। इस मामले की गहनता से जांच कर कार्रवाई की जाएगी। वहीं एएसपी ओपी सिंह का कहना है कि हाजी शौकत के साथ ही उसके पुत्र मुनव्वर के नाम पर पटाखे बनाने का लाइसेंस है। कोतवाली पुलिस को मामले में कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। पटाखों में आग कैसे लगी, इसकी जांच की जा रही है।
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जांच करते अधिकारी।
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घटना को छिपाने की होती रही कोशिश
विस्फोट के बाद परिजनों की तरफ से पुलिस को कोई जानकारी नहीं दी गई। मोहल्लेवासियों की मदद से घायलों को सरकारी अस्पताल न ले जाकर निजी अस्पताल ले जाया गया। मोहल्ले के लोग भी पुलिस को जानकारी देने से बचते रहे। शुरुआत में तो पुलिस को रसोई में गैस सिलिंडर फटने की जानकारी दी गई। जब जांच टीम को मौके पर जले-अधजले पटाखे मिले, तो मामला साफ हुआ।