फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   Fear of being martyred, sacrificed for the country

शहीद का नाम जुड़ा होना परिवार के लिए सबसे बड़ा सम्मान

Sun, 15 Dec 2019 11:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 15 Dec 2019 11:51 PM IST
विज्ञापन
Fear of being martyred, sacrificed for the country
शामली। पूर्व सैनिक संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में आए शहीद हुए सैनिकों के परिवारों ने बातचीत में कहा कि उनके परिवार के साथ शहीद का नाम जुड़ा है तो यही सबसे बड़ा सम्मान है। युद्ध में शहीद होने का गम उनके चेहरे पर झलक रहा था तो देश के लिए बलिदान होने के फख्र भी चमक बिखेर रहा था।
विज्ञापन

--------
पति की शहादत पर गर्व
रविवार को आयोजित कार्यक्रम में बेटे और तीन पोते-पोती के साथ पहुंची गांव कसेरवा निवासी प्रेमवती ने बातचीत में कहा कि उनके पति हरपाल सिंह सेना में थे। करीब तीन साल तक उन्होंने सेना में रहकर देश की सेवा की। 1965 में भारत-पाक के युद्ध में उन्हें पति को खोया, लेकिन भारत माता की रक्षा के लिए बलिदान दिया है। इसके लिए उन्हें गर्व है।
विज्ञापन

------
शहीद के परिवार को बाद में नहीं मिलता सहयोग
गांव मीमला निवासी जीतवती ने कहा कि उनके पति सत्यपाल सिंह सेना में सूबेदार थे। 2000 में उनकी तैनाती पठानकोट में थी। दुश्मन देश ने उस समय गोलाबारी कर दी थी, जिसमें उनके पति शहीद हो गए थे। पति के जाने का दुख है, लेकिन उनकी शहादत पर गर्व है। उनका कहना है कि सरकार और अधिकारी सैनिक के शहीद होने के समय जिस तरह से सहयोग की बात करते हैं, उतना बाद में नहीं मिलता। शहीद हुए पति की वजह से आज उन्हें यह सम्मान मिला है।
विज्ञापन
विज्ञापन

---------
परिवार के साथ शहीद का नाम जुड़ना सबसे बड़ा सम्मान
1971 में भारत-पाक युद्ध में शहीद सैनिक चरण सिंह की पत्नी राजबाला ने कहा कि जब भी भारत-पाक की लड़ाई का जिक्र होता है तो उन्हें पति की याद आती है। साथ ही इस बात का फख्र होता है कि उनके पति ने देश के लिए शहादत दी। शहीद सैनिकों की लिस्ट में उनके परिवार का नाम जुड़ा है, यही उनके लिए बड़ा सम्मान है।
-----------
बेटे को सरकारी नौकरी दे सरकार
संजीता देवी, सिंभालका गांव
उनके पति 19 जाट रेजीमेंट में नायक थे। वे 1989 में सेना में भर्ती हुए थे। आठ सितंबर 2002 को कारगिल पुंछ में तैनाती के दौरान गोलाबारी में भारत माता की रक्षा करते हुए उन्होंने अपना बलिदान दिया। उनके बेटे रजत ने बीटेक किया है, लेकिन सरकारी नौकरी नहीं मिली। उन्होंने पिछले साल सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा था, लेकिन निराशा ही मिली। उनकी सरकार से मांग है कि शहीद सैनिकों के परिवार को सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए।
---------
बनवीर सिंह गांव एलम
दूसरे बेटे को भी देश सेवा में भेजा
उनके पुत्र गौतम कुमार एयरफोर्स में फ्लाइट इंजीनियर थे। वे 2006 में भर्ती हुए थे। 2018 में अरुणाचल में चीन के बॉर्डर पर भारतीय सेना के लिए खाना गिराते समय हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया था, जिसमें गौतम शहीद हुए। इसका गम तो हमेशा रहेगा, साथ ही बेटा देश के लिए काम आया, इसका उन्हें उन्हें फख्र है। उन्होंने कहा कि उन्होंने दूसरे बेटे अर्जुन को भी देश सेवा में भेजा है। दो साल पहले वे सेना में भर्ती हुए है। वर्तमान में उनकी तैनाती लेह है।
----------
शहीदों की स्मृति में बने गांवों के द्वार
गांव गढ़ीरामकौर निवासी हृदयराम ने बताया कि उनके भाई रामभज 1965 की भारत-पाक की लड़ाई में शहीद हुए थे। देश के लिए उनके भाई ने बलिदान दिया। उनका बलिदान पूरे परिवार के लिए गर्व की बात है। आज इस कार्यक्रम में उनके शहीद भाई की वजह से सम्मान मिल रहा है, यह उनके लिए बहुत बड़ी बात है।

इसी गांव के रामपाल ने बताया कि उनके पिता नरसिंह 1965 की लड़ाई में शहीद हुए थे। रामभज और नरसिंह दोनों के शहीद होने की सूचना एक ही दिन डाक से मिली थी। हृदयराम और रामपाल ने कहा कि उनकी इच्छा है कि गांव में दोनों शहीदों के नाम पर स्मृति द्वार बनाया जाए। इसके लिए वे अधिकारियों से मिलेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed