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चौसाना में पंचायत का तुगलकी फरमान, मौत की जानकारी छिपाने पर दस साल के लिए गांव से निकाला
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चौसाना (शामली)। साथी मजदूर की मौत की जानकारी छिपाने पर पंचायत ने दो युवकों के गांव में प्रवेश पर दस वर्ष का प्रतिबंध का फरमान सुनाया है। क्षेत्र के गांव के ऊदपुर का यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
ऊदपुर गांव निवासी रामकुमार पुत्र राम सिंह बिजली काम करता था। जो गांव के दीपक और विकास उर्फ विक्की के साथ वैन में बैठकर करनाल गया। इसके बाद घर वापस नहीं लौटा। परिवार ने समझा कि कहीं दूर काम करने लगा होगा। दिवाली आई तो दीपक अपने घर लौट आया। रामकुमार के परिवार ने दीपक से पूछताछ की तो दीपक ने परिवार को कोई जानकारी नहीं दी।
जिसके बाद लापता रामकुमार के भाई ओमकार अपने भतीजे अभिषेक के साथ चौसाना चौकी पहुंचे और रामकुमार के लापता होने की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की तो परिवार ने गांव के लोगों से विचार कर पंचायत बुलाई, जिसमें दीपक को भी बुलाया। उसने बताया कि रामकुमार की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी, जिसका एटा पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया और अंतिम संस्कार कर दिया।
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पंचायत ने दीपक के बताए तथ्यों की पुष्टि की और एटा पुलिस ने संपर्क कर सच जाना, जिसके बाद दीपक और विकास को फरमान सुनाया कि दीपक तीन साल के लिए व विकास 10 साल के लिए गांव की सीमा में प्रवेश नहीं करेंगे। पंचायत के फैसले से पीड़ित परिवार भी सहमत रहा। पूरी घटना की पुष्टि पीड़ित परिवार के ओमकार ने की है।
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ऊदपुर गांव निवासी रामकुमार पुत्र राम सिंह बिजली काम करता था। जो गांव के दीपक और विकास उर्फ विक्की के साथ वैन में बैठकर करनाल गया। इसके बाद घर वापस नहीं लौटा। परिवार ने समझा कि कहीं दूर काम करने लगा होगा। दिवाली आई तो दीपक अपने घर लौट आया। रामकुमार के परिवार ने दीपक से पूछताछ की तो दीपक ने परिवार को कोई जानकारी नहीं दी।
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जिसके बाद लापता रामकुमार के भाई ओमकार अपने भतीजे अभिषेक के साथ चौसाना चौकी पहुंचे और रामकुमार के लापता होने की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की तो परिवार ने गांव के लोगों से विचार कर पंचायत बुलाई, जिसमें दीपक को भी बुलाया। उसने बताया कि रामकुमार की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी, जिसका एटा पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया और अंतिम संस्कार कर दिया।
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पंचायत ने दीपक के बताए तथ्यों की पुष्टि की और एटा पुलिस ने संपर्क कर सच जाना, जिसके बाद दीपक और विकास को फरमान सुनाया कि दीपक तीन साल के लिए व विकास 10 साल के लिए गांव की सीमा में प्रवेश नहीं करेंगे। पंचायत के फैसले से पीड़ित परिवार भी सहमत रहा। पूरी घटना की पुष्टि पीड़ित परिवार के ओमकार ने की है।