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यमुना पर भी अतिक्रमण: नदी में बसी बस्ती
ब्यूरो/ अमर उजाला, शामली
Updated Wed, 08 Jun 2016 12:51 AM IST
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कैराना क्षेत्र में यमुना नदी किनारे अपने खेतों में झोपड़ी बनाकर रहते परिवार।
- फोटो : अमर उजाला
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शामली। इस बार मानसून अच्छा रहने के संकेत मौसम विभाग जता रहा है। जिले में हरियाणा बॉर्डर पर बहने वाली यमुना नदी हर साल उफान आने पर तबाही मचाती है। आसपास की कृषि भूमि जलमग्न हो जाती है, लेकिन इसको लेकर प्रशासन की आेर से कोई तैयारी नहीं हो रही। वहीं लोगों ने नदी पर भी अतिक्रमण कर लिया है। कई गांव तो तटबंधों के अंदर तक बस चुके हैं।
मंडावर, बसेड़ा और अन्य कई गांव के किसानों ने कृषि भूमि पर ही यमुना किनारे अस्थायी आवास तक बना लिए हैं। यमुना में बाढ़ आने पर इन आवासों को खाली करना पड़ जाता है। वहीं, मंडावर गांव तटबंध के अंदर तक बसा हुआ है, जहां यमुना नदी का पानी घुसने पर करीब आधा गांव खाली करना पड़ता है।
तीन लाख क्यूसेक है क्षमता
ड्रेनेज विभाग के मुताबिक यमुना तीन लाख क्यूसेक पानी आने तक सामान्य रूप से प्रवाहित रहती है। इसके ऊपर पानी प्रवाहित होने पर परेशानियां शुरू हो जाती है। गौरतलब है कि पूर्व के वर्षों में पांच से सात लाख क्यूसेक तक पानी यमुना नदी में प्रवाहित हुआ, जिससे तटबंध के पार तक कई गांवों में नदी का पानी घुस गया था।
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तटबंध भी नहीं रहता सुरक्षित
यमुना किनारे तटबंध बनाया गया है, जो शामली जिले में करीब 52.73 किलोमीटर लंबा है, मगर यमुना जब रोद्र रूप धारण करती है, तो दर्जनों स्थानों पर तटबंध को भी ध्वस्त कर देती है। पिछले सालों में यमुना का ऐसा ही रौद्र रूप देखने को मिला है। उधर, प्रशासन की तरफ से बाढ़ से बचाव के संबंध में फिलहाल किसी तरह का इंतजाम नहीं किया गया है। नदी किनारे तटबंध को मजबूत करने पर भी ध्यान नहीं है। तटबंध जगह जगह से टूटा हुआ है। वहीं, झाड़ियों की कटाई भी नहीं कराई जा सकी है।
ये गांव होते हैं प्रभावित
यमुना नदी में उफान आने से कैराना क्षेत्र के गांव मामौर, मवी कला, सहपत, रामड़ा, बसेड़ा, नंगला राई, पठेड़ तथा खुरगान के अलावा झिंझाना क्षेत्र के गांव भड़ी माजरा, ऊदपुर, शीतलगढ़ी और बिड़ौली प्रभावित होते हैं।
यमुना में रेत खनन भी जिम्मेदार
यमुना नदी में उफान से होने वाले परेशानियों के लिए खनन माफिया भी जिम्मेदार हैं। कैराना, झिंझाना और कांधला क्षेत्र में यमुना नदी से रेत खनन चल रहा है। इस कारण यमुना नदी में पानी का प्रवाह अपने रास्ते बदल देता है। नतीजा यह होता है कि नदी का पानी आसपास के खेतों में घुसकर फसलें बर्बाद कर देता है।
हर साल यमुना में उफान की वजह से यूपी की जमीन पानी के प्रवाह के कारण हरियाणा के सिजरे में पहुंच जाती है, तो हरियाणा के किसान दावा करते हैं कि उनकी जमीन यूपी की सीमा में आ गई है। इसकी वजह से दोनों प्रदेशों के किसानों में जमीन का विवाद भी बना हुआ है। पूर्व में इस विवाद के निस्तारण के लिए दीक्षित आयोग का गठन भी कराया जा चुका है।
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मंडावर, बसेड़ा और अन्य कई गांव के किसानों ने कृषि भूमि पर ही यमुना किनारे अस्थायी आवास तक बना लिए हैं। यमुना में बाढ़ आने पर इन आवासों को खाली करना पड़ जाता है। वहीं, मंडावर गांव तटबंध के अंदर तक बसा हुआ है, जहां यमुना नदी का पानी घुसने पर करीब आधा गांव खाली करना पड़ता है।
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तीन लाख क्यूसेक है क्षमता
ड्रेनेज विभाग के मुताबिक यमुना तीन लाख क्यूसेक पानी आने तक सामान्य रूप से प्रवाहित रहती है। इसके ऊपर पानी प्रवाहित होने पर परेशानियां शुरू हो जाती है। गौरतलब है कि पूर्व के वर्षों में पांच से सात लाख क्यूसेक तक पानी यमुना नदी में प्रवाहित हुआ, जिससे तटबंध के पार तक कई गांवों में नदी का पानी घुस गया था।
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तटबंध भी नहीं रहता सुरक्षित
यमुना किनारे तटबंध बनाया गया है, जो शामली जिले में करीब 52.73 किलोमीटर लंबा है, मगर यमुना जब रोद्र रूप धारण करती है, तो दर्जनों स्थानों पर तटबंध को भी ध्वस्त कर देती है। पिछले सालों में यमुना का ऐसा ही रौद्र रूप देखने को मिला है। उधर, प्रशासन की तरफ से बाढ़ से बचाव के संबंध में फिलहाल किसी तरह का इंतजाम नहीं किया गया है। नदी किनारे तटबंध को मजबूत करने पर भी ध्यान नहीं है। तटबंध जगह जगह से टूटा हुआ है। वहीं, झाड़ियों की कटाई भी नहीं कराई जा सकी है।
ये गांव होते हैं प्रभावित
यमुना नदी में उफान आने से कैराना क्षेत्र के गांव मामौर, मवी कला, सहपत, रामड़ा, बसेड़ा, नंगला राई, पठेड़ तथा खुरगान के अलावा झिंझाना क्षेत्र के गांव भड़ी माजरा, ऊदपुर, शीतलगढ़ी और बिड़ौली प्रभावित होते हैं।
यमुना में रेत खनन भी जिम्मेदार
यमुना नदी में उफान से होने वाले परेशानियों के लिए खनन माफिया भी जिम्मेदार हैं। कैराना, झिंझाना और कांधला क्षेत्र में यमुना नदी से रेत खनन चल रहा है। इस कारण यमुना नदी में पानी का प्रवाह अपने रास्ते बदल देता है। नतीजा यह होता है कि नदी का पानी आसपास के खेतों में घुसकर फसलें बर्बाद कर देता है।
हर साल यमुना में उफान की वजह से यूपी की जमीन पानी के प्रवाह के कारण हरियाणा के सिजरे में पहुंच जाती है, तो हरियाणा के किसान दावा करते हैं कि उनकी जमीन यूपी की सीमा में आ गई है। इसकी वजह से दोनों प्रदेशों के किसानों में जमीन का विवाद भी बना हुआ है। पूर्व में इस विवाद के निस्तारण के लिए दीक्षित आयोग का गठन भी कराया जा चुका है।