Shamli Election Result 2022 रंग नहीं लाई शाह की ताकत, यहां सबसे खराब रहा भाजपा का प्रदर्शन, गठबंधन ने छीनीं तीनों सीटें
प्रदेश की हॉट सीट में शामिल थानाभवन पर हर किसी की निगाहें टिकी हुई हैं। इस सीट पर प्रदेश गन्ना मंत्री सुरेश राणा लगातार तीसरी बार जीतकर हैट्रिक लगाने के लिए चुनावी मैदान में उतरे हैं। कैराना सीट के नतीजे पर पूरे देश की निगाहें हैं। इस बार भी भाजपा से मृगांका सिंह और सपा से नाहिद हसन के बीच टक्कर है।
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विधानसभा चुनाव में गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे भी भाजपा को जिले में एक सीट तक नहीं दिला पाए। तीनों विधानसभा सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी हार गए। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने भी जिले में प्रचार किया। लेकिन इन स्टार प्रचारकों का जादू किसी भी सीट पर नहीं चल पाया।
कैराना से पलायन का मुद्दा भाजपा ने वर्ष 2017 के चुनाव में जोरशोर से उठाया था। जिसके बूते पूरे प्रदेश में भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की थी। लेकिन कैराना सीट भाजपा गवां बैठी थी। थानाभवन सीट से लगातार दूसरी बार जीते सुरेश राणा को पहले गन्ना राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार की जिम्मेदारी दी। बाद में उनका कद बढ़ाकर कैबिनेट मंत्री बनाया गया। भाजपा थानाभवन और शामली सीट को लेकर आश्वस्त थी, लेकिन कैराना सीट को लेकर नेतृत्व आशंकित था।
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इस विधानसभा सीट जीतने के लिए इस बार भी भाजपा ने पूरे जोर लगाए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से चुनाव घोषित होने से पहले आठ नवंबर 2021 को यहां जनसभा की थी। लेकिन जनसभा से ठीक पहले वह पलायन कर वापस लौटे परिवारों से मिले थे। जिससे यह तय हो गया था कि भाजपा इस मुद्दे को चुनाव में फिर से इस्तेमाल करेगी।
गृहमंत्री ने मृगांका के लिए घर-घर जाकर मांगे थे वोट, फिर भी नहीं बनी बात
भाजपा ने 2017 में सपा के नाहिद हसन से हार चुकी मृगांका सिंह पर फिर से दांव लगाया था। उन्हें जिताने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह चुनाव प्रचार के दौरान कैराना पहुंचे थे। उन्होंने भी पलायन कर वापस लौटे परिवार से मुलाकात की थी। इसके अलावा उन्होंने घर-घर जाकर पर्चे बांटे और वोट भी मांगे थे। इसके बाद चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शामली और कैराना में जनसभा कर इन्हीं मुद्दों को उठाया था।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने भी मृगांका सिंह के लिए प्रचार किया था। लेकिन भाजपा के स्टार प्रचारक और पलायन का मुद्दा किसी भी सीट पर असर नहीं डाल पाया। कैराना में 2017 से भी ज्यादा करारी हार का सामना भाजपा को करना पड़ा। साथ ही शामली और गन्ना मंत्री सुरेश राणा की सीट भी भाजपा के हाथ से निकल गई।
विधानसभा चुनाव में शामली जिले में जाट-मुस्लिमों समीकरण के बलबूते सपा-रालोद गठबंधन की नैया पार हो गई। इस समीकरण के चलते जहां कैराना सीट बरकरार रही, वहीं थानाभवन और शामली सीट भी भाजपा से छीन ली। जिला बनने के बाद वर्ष 2012 में हुए चुनाव में कैराना विधानसभा सीट पर भाजपा के हुकुम सिंह जीते थे। हुकुम सिंह ने हसन परिवार के बसपा प्रत्याशी हाजी अनवर को हराकर जीत दर्ज की थी। जबकि थानाभवन विधानसभा सीट पर भाजपा के सुरेश राणा ने आरएलडी के अशरफ अली को हराया था। जबकि बसपा के अब्दुल राव वारिस तीसरे नंबर पर रहे थे।
शामली विधानसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी पंकज मलिक ने सपा के वीरेंद्र सिंह को हराया था। मुजफ्फरनगर जिले के कवाल कांड के बाद शामली में हुए सांप्रदायिक दंगे के बाद हुए 2017 के विधानसभा चुनाव में शामली विधान सभा सीट पर तेजेंद्र निर्वाल ने सपा-कांग्रेस गठबंधन के पंकज मलिक को हराकर भाजपा के खाते में यह सीट डाल दी थी।
थानाभवन विधानसभा सीट पर भाजपा के सुरेश राणा दूसरी बार बसपा के अब्दुल राव वारिस को हराकर विधायक बने। प्रदेश में भाजपा की सरकार आने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार में सुरेश राणा को गन्ना मंत्री की जिम्मेदारी दी सौंपी।
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जाट-मुस्लिम समीकरण ने कराई सपा रालोद गठबंधन की नैया पार
किसान आंदोलन के बाद उभर कर आए सपा-रालोद गठबंधन में जिले की जाट मुस्लिम-समीकरण के आधार पर विधानसभा चुनाव 2022 में प्रत्याशी घोषित किए गए। जिसमें थानाभवन सीट पर गठबंधन ने रालोद से मुस्लिम प्रत्याशी के रूप में अशरफ अली और शामली विधानसभा सीट पर जाट प्रत्याशी प्रसन्न चौधरी को टिकट दिया। जबकि कैराना से सपा विधायक नाहिद हसन को प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा गया।
कैराना विधानसभा सीट पर नामांकन करने के अगले दिन ही नाहिद हसन गैंगस्टर के मामले में जेल चले गए। भाजपा ने विधानसभा चुनाव में जिले मे गुर्जर, जाट और ठाकुर कार्ड खेलते हुए कैराना विधानसभा सीट पर भाजपा के पूर्व सांसद हुकुम सिंह की पुत्री मृगांका सिंह गुर्जर, शामली विधानसभा सीट पर विधायक तेजेंद्र निर्वाल जाट और थानाभवन विधानसभा सीट पर प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा को प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतारा।
किसान आंदोलन का दिखा पूरा असर
किसान आंदोलन और देरी से गन्ना भुगतान होने से जाट मतदाताओं में नाराजगी दिखाई दी। जबकि मुस्लिम मतदाताओं में ध्रुवीकरण हुआ। जिसके चलते जाट-मुस्लिम समीकरण का पूरा फायदा गठबंधन को हुआ। भाजपा को जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर नुकसान उठाना पड़ा। लखीमपुर खीरी कांड के बाद कैराना विधानसभा सीट पर सिख वोट बैंक भी भाजपा से खिसक गया। इसके अलावा हर सीट आमने-सामने का मुकाबला भी भाजपा के लिए घाटे का सौदा साबित रहा।