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हेपेटाइटिस से घबराएं नहीं, समय पर उपचार कराएं
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हेपेटाइटिस से घबराएं नहीं, समय पर उपचार कराएं
शामली। हेपेटाइटिस वायरस जनित बीमारी है। बरसात में इसका ज्यादा खतरा रहता है। चिकित्सकों का कहना है हेपेटाइटिस से घबराएं नहीं, उसकी समय पर जांच कराकर उपचार कराएं। इसमें लापरवाही बरती गई तो यह खतरनाक हो सकती है।
हेपेटाइटिस मूल रूप से लीवर की बीमारी है, जो वायरल संक्रमण से होती है। यह धीरे-धीरे लीवर को नुकसान पहुंचाती है। शुरूआत में ही लक्षण नजर आने पर जांच कराकर उपचार शुरू कर दिया जाए तो यह बीमारी ठीक हो जाती है। इसमें लापरवाही बरतने पर यह खतरनाक हो सकती है। कुछ केस में इस बीमारी से लीवर कैंसर होने का भी खतरा रहता है। बरसात में नमी ज्यादा होने और सफाई न होने से वायरल संक्रमण ज्यादा होने का खतरा रहता है, जिससे हेपेटाइटिस रोग होने की आशंका ज्यादा रहती है। जनपद में खासतौर से कैराना क्षेत्र के कई गांव इस बीमारी की चपेट में है। इन गांवों में हेपेटाइटिस सी यानि काला पीलिया से ज्यादा पीड़ित हैं।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार का कहना है कि हेपेटाइटिस की समय पर जांच कराकर उपचार कराने से यह बीमारी ठीक हो जाती है। चेस्ट स्पेशलिस्ट एवं कंसलटेंट फिजीशियन डॉ. पंकज गर्ग ने बताया कि हेपेटाइटिस ए से ई तक पांच तरह का होता है। हेपेटाइटिस ए बहुत हल्की बीमारी होती है, जो सफाई व सही खानपान करने से स्वत: ठीक हो जाती है। हेपेटाइटिस ई गर्भवती महिला को होने की आशंका रहती है। हेपेटाइटिस बी व सी गंभीर बीमारी होती है। हेपेटाइटिस डी सीधे नहीं होती, वह हेपेटाइटिस बी वाले को दोहरा संक्रमण होने पर होती है। हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को लगाई जा सकती है। हेपेटाइटिस सी की वैक्सीन नहीं बनी है, लेकिन इसकी दवा है।
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जिले में हो रही जांच, उपचार की सुविधा नहीं
शामली। सीएचसी के पैथोलोजिस्ट डॉ. अनुपम सक्सेना ने बताया कि सीएचसी पर हेपेटाइटिस की जांच की सुविधा है, लेकिन उपचार की सुविधा मेरठ व दिल्ली आदि शहरों में उपलब्ध है। लैब टेक्नीशियन अशोक कुमार ने बताया कि जून में लगभग 441 लोगों की हेपेटाइटिस की जांच की गई, इनमें अधिकतर गर्भवती महिलाओं की जांच हुई। उनमें से मात्र तीन लोग संक्रमित पाए गए।
लक्षण
- पेट में दर्द होना।
- उल्टी होना।
- बुखार आना।
- कमजोरी, थकान व चक्कर आना।
बचाव
- उबला हुआ साफ पानी पीना।
- सफाई का खास ध्यान रखना।
कैराना में पैर पसार रहा काला पीलिया
कैराना। कैराना का सारा गंदा पानी बड़े नाले द्वारा मामौर झील तक जाता है। रास्ते में यह नाला पंजीठ के तालाब में भी गिरता है। पंजीठ के प्रधान चौधरी अखलाक ने बताया कि पिछले दो-तीन साल के अंदर हेपेटाइटिस सी से करीब 30 ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा गांव के 30-40 लोग पानीपत, करनाल, सोनीपत, मेरठ, शामली व अन्य शहरों में हेपेटाइटिस सी का उपचार करा रहे हैं। गंदे पानी के नाले द्वारा उनके गांव का पेयजल भी दूषित हो गया है। कई बार अधिकारियों को शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई समाधान नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा गांव मामौर में भी हेपेटाइटिस सी के 20 से अधिक मरीज हैं। उंचा गांव, मन्ना माजरा, अलीपुर में भी ग्रामीण हेपेटाइटिस सी जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित है।
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शामली। हेपेटाइटिस वायरस जनित बीमारी है। बरसात में इसका ज्यादा खतरा रहता है। चिकित्सकों का कहना है हेपेटाइटिस से घबराएं नहीं, उसकी समय पर जांच कराकर उपचार कराएं। इसमें लापरवाही बरती गई तो यह खतरनाक हो सकती है।
हेपेटाइटिस मूल रूप से लीवर की बीमारी है, जो वायरल संक्रमण से होती है। यह धीरे-धीरे लीवर को नुकसान पहुंचाती है। शुरूआत में ही लक्षण नजर आने पर जांच कराकर उपचार शुरू कर दिया जाए तो यह बीमारी ठीक हो जाती है। इसमें लापरवाही बरतने पर यह खतरनाक हो सकती है। कुछ केस में इस बीमारी से लीवर कैंसर होने का भी खतरा रहता है। बरसात में नमी ज्यादा होने और सफाई न होने से वायरल संक्रमण ज्यादा होने का खतरा रहता है, जिससे हेपेटाइटिस रोग होने की आशंका ज्यादा रहती है। जनपद में खासतौर से कैराना क्षेत्र के कई गांव इस बीमारी की चपेट में है। इन गांवों में हेपेटाइटिस सी यानि काला पीलिया से ज्यादा पीड़ित हैं।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार का कहना है कि हेपेटाइटिस की समय पर जांच कराकर उपचार कराने से यह बीमारी ठीक हो जाती है। चेस्ट स्पेशलिस्ट एवं कंसलटेंट फिजीशियन डॉ. पंकज गर्ग ने बताया कि हेपेटाइटिस ए से ई तक पांच तरह का होता है। हेपेटाइटिस ए बहुत हल्की बीमारी होती है, जो सफाई व सही खानपान करने से स्वत: ठीक हो जाती है। हेपेटाइटिस ई गर्भवती महिला को होने की आशंका रहती है। हेपेटाइटिस बी व सी गंभीर बीमारी होती है। हेपेटाइटिस डी सीधे नहीं होती, वह हेपेटाइटिस बी वाले को दोहरा संक्रमण होने पर होती है। हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को लगाई जा सकती है। हेपेटाइटिस सी की वैक्सीन नहीं बनी है, लेकिन इसकी दवा है।
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जिले में हो रही जांच, उपचार की सुविधा नहीं
शामली। सीएचसी के पैथोलोजिस्ट डॉ. अनुपम सक्सेना ने बताया कि सीएचसी पर हेपेटाइटिस की जांच की सुविधा है, लेकिन उपचार की सुविधा मेरठ व दिल्ली आदि शहरों में उपलब्ध है। लैब टेक्नीशियन अशोक कुमार ने बताया कि जून में लगभग 441 लोगों की हेपेटाइटिस की जांच की गई, इनमें अधिकतर गर्भवती महिलाओं की जांच हुई। उनमें से मात्र तीन लोग संक्रमित पाए गए।
लक्षण
- पेट में दर्द होना।
- उल्टी होना।
- बुखार आना।
- कमजोरी, थकान व चक्कर आना।
बचाव
- उबला हुआ साफ पानी पीना।
- सफाई का खास ध्यान रखना।
कैराना में पैर पसार रहा काला पीलिया
कैराना। कैराना का सारा गंदा पानी बड़े नाले द्वारा मामौर झील तक जाता है। रास्ते में यह नाला पंजीठ के तालाब में भी गिरता है। पंजीठ के प्रधान चौधरी अखलाक ने बताया कि पिछले दो-तीन साल के अंदर हेपेटाइटिस सी से करीब 30 ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा गांव के 30-40 लोग पानीपत, करनाल, सोनीपत, मेरठ, शामली व अन्य शहरों में हेपेटाइटिस सी का उपचार करा रहे हैं। गंदे पानी के नाले द्वारा उनके गांव का पेयजल भी दूषित हो गया है। कई बार अधिकारियों को शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई समाधान नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा गांव मामौर में भी हेपेटाइटिस सी के 20 से अधिक मरीज हैं। उंचा गांव, मन्ना माजरा, अलीपुर में भी ग्रामीण हेपेटाइटिस सी जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित है।