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डीएम ने डिप्टी कलेक्टर से मांगा स्पष्टीकरण
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शामली। बेसिक शिक्षा विभाग में करीब तीन साल पहले 23 शिक्षकों को नियम विरुद्ध पदोन्नति देने की शिकायत के मामले में नियुक्त जांच अधिकारी डिप्टी कलेक्टर देवेंद्र सिंह से डीएम जसजीत कौर ने स्पष्टीकरण मांगा है। उन पर अपनी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने का आरोप है। डीएम ने स्पष्टीकरण न देने पर विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कर मंडलायुक्त को रिपोर्ट भेजने की चेतावनी दी है।
कस्बा बनत निवासी अनुज राणा ने 2018 में तत्कालीन बीएसए व लिपिकों द्वारा 23 शिक्षकों की नियम विरुद्ध पदोन्नति की शिकायत की थी। डीएम जसजीत कौर ने डिप्टी कलेक्टर देवेंद्र सिंह को जांच अधिकारी नामित किया था। डीएम ने बताया कि जांच अधिकारी देवेंद्र सिंह ने अपनी जांच आख्या में किसी भी पक्ष को सुनवाई का अवसर दिए बिना तत्कालीन बीएसए चंद्रशेखर, वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक, तत्कालीन बीएसए अनुराधा शर्मा और वर्तमान बीएसए गीता वर्मा के विरुद्ध निलंबन करने की संस्तुति की गई, जबकि इस प्रकरण में जांच अधिकारी को प्रथम दृष्टया कौन दोषी है, पूर्ण रूप से कौन दोषी है अथवा आंशिक दोषी कौन है, उसका उत्तरदायित्व निर्धारित कर रिपोर्ट देनी थी। लेकिन जांच अधिकारी ने दो जुलाई को उन्हें रिपोर्ट भेजी, उसी दिन मंडलायुक्त और डीएम के निर्णय से पूर्व ही प्रकरण संबंधी अपनी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी, जो घोर अनियमितता एवं अनुशासनहीनता है। डीएम ने जांच अधिकारी से कहा कि इस तरह की जांच गोपनीय रूप से विश्वसनीय अधिकारी से कराई जाती है। डीएम ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर कर्तव्यहीनता मानते हुए जांच अधिकारी डिप्टी कलेक्टर देवेंद्र सिंह को पत्र प्राप्ति के तत्काल बाद अपना लिखित स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए। साथ ही चेतावनी दी कि अगर स्पष्टीकरण नहीं दिया गया तो विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कर मंडलायुक्त सहारनपुर को भेजी जाएगी।
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कस्बा बनत निवासी अनुज राणा ने 2018 में तत्कालीन बीएसए व लिपिकों द्वारा 23 शिक्षकों की नियम विरुद्ध पदोन्नति की शिकायत की थी। डीएम जसजीत कौर ने डिप्टी कलेक्टर देवेंद्र सिंह को जांच अधिकारी नामित किया था। डीएम ने बताया कि जांच अधिकारी देवेंद्र सिंह ने अपनी जांच आख्या में किसी भी पक्ष को सुनवाई का अवसर दिए बिना तत्कालीन बीएसए चंद्रशेखर, वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक, तत्कालीन बीएसए अनुराधा शर्मा और वर्तमान बीएसए गीता वर्मा के विरुद्ध निलंबन करने की संस्तुति की गई, जबकि इस प्रकरण में जांच अधिकारी को प्रथम दृष्टया कौन दोषी है, पूर्ण रूप से कौन दोषी है अथवा आंशिक दोषी कौन है, उसका उत्तरदायित्व निर्धारित कर रिपोर्ट देनी थी। लेकिन जांच अधिकारी ने दो जुलाई को उन्हें रिपोर्ट भेजी, उसी दिन मंडलायुक्त और डीएम के निर्णय से पूर्व ही प्रकरण संबंधी अपनी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी, जो घोर अनियमितता एवं अनुशासनहीनता है। डीएम ने जांच अधिकारी से कहा कि इस तरह की जांच गोपनीय रूप से विश्वसनीय अधिकारी से कराई जाती है। डीएम ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर कर्तव्यहीनता मानते हुए जांच अधिकारी डिप्टी कलेक्टर देवेंद्र सिंह को पत्र प्राप्ति के तत्काल बाद अपना लिखित स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए। साथ ही चेतावनी दी कि अगर स्पष्टीकरण नहीं दिया गया तो विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कर मंडलायुक्त सहारनपुर को भेजी जाएगी।
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