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एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस पर जुर्माना
ब्यूरो/ अमर उजाला, शामली
Updated Thu, 17 Mar 2016 01:29 AM IST
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शामली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम ने एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस के मैनेजर और ब्रांच मैनेजर के खिलाफ दायर वाद पर निर्णय सुनाते हुए 10 हजार रुपये जुर्माना अदा करने का आदेश दिया है।
शामली स्थित कमला कालोनी निवासी मयंक तंवर पुत्र ओमवीर सिंह तंवर ने कुछ समय पूर्व ही एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के मैनेजर और ब्रांच मैनेजर के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम में वाद दायर किया था। उसमें बताया था कि एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के एजेंट के माध्यम से 29 मार्च 2014 को 50 हजार रुपये वार्षिक प्रीमियम की पॉलिसी संख्या 16779412 ली थी। इसका बांड एक माह के भीतर घर के पते पर भेजना था, लेकिन कई बार कॉल करने और नोटिस देने के बावजूद विपक्षी बीमा कंपनी की ओर से पॉलिसी बांड उनके घर नहीं भेजा गया। इसकी वजह से उन्हें मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी।
बुधवार को वाद की सुनवाई पूरी होने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम के अध्यक्ष एसकेएस यादव तथा सदस्य श्रवण कुमार ने निर्णय सुनाया कि वादी को मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में पांच हजार और वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपये अर्थात कुल 10 हजार रुपये का बीमा कंपनी की ओर से दिए जाएं। उक्त धनराशि आदेश के 30 दिन के भीतर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम में जमा कराने को कहा गया है।
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शामली स्थित कमला कालोनी निवासी मयंक तंवर पुत्र ओमवीर सिंह तंवर ने कुछ समय पूर्व ही एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के मैनेजर और ब्रांच मैनेजर के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम में वाद दायर किया था। उसमें बताया था कि एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के एजेंट के माध्यम से 29 मार्च 2014 को 50 हजार रुपये वार्षिक प्रीमियम की पॉलिसी संख्या 16779412 ली थी। इसका बांड एक माह के भीतर घर के पते पर भेजना था, लेकिन कई बार कॉल करने और नोटिस देने के बावजूद विपक्षी बीमा कंपनी की ओर से पॉलिसी बांड उनके घर नहीं भेजा गया। इसकी वजह से उन्हें मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी।
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बुधवार को वाद की सुनवाई पूरी होने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम के अध्यक्ष एसकेएस यादव तथा सदस्य श्रवण कुमार ने निर्णय सुनाया कि वादी को मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में पांच हजार और वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपये अर्थात कुल 10 हजार रुपये का बीमा कंपनी की ओर से दिए जाएं। उक्त धनराशि आदेश के 30 दिन के भीतर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम में जमा कराने को कहा गया है।
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