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Shamli News: एसबीआई बनत के पूर्व शाखा प्रबंधक पर 2.10 लाख रुपये का जुर्माना
सार
शामली के बनत में भारतीय स्टेट बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक ने उपभोक्ता द्वारा जमा ऋण राशि 41150 रुपये का गबन कर लिया और धमकियाँ दीं। उपभोक्ता आयोग ने प्रबंधक के वेतन से राशि कटौती, अर्थदंड और एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
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विस्तार
शामली। भारतीय स्टेट बैंक शाखा बनत से लिए गए ऋण को उपभोक्ता द्वारा जमा कर दिया, लेकिन पूर्व शाखा प्रबंधक ने जमा किए गए 41150 रुपये का गबन कर लिया। पूर्व शाखा प्रबंधक ने उपभोक्ता पर ऋण जमा करने का दबाव बनाया और जेल भिजवाने की धमकी दी। न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने इस प्रकरण की सुनवाई की।
आयोग ने बैंक अधिकारियों को तत्कालिक शाखा प्रबंधक के वेतन से कटौती कर गबन किए गए 41150 रुपये समायोजित कर ऋणमुक्ति का प्रमाण पत्र जारी करने के साथ 2.10 लाख रुपये जुर्माना और एफआईआर दर्ज किए जाने का आदेश सुनाया।
कस्बा बनत के मोहल्ला प्रेमनगर निवासी समीम ने एक जनवरी 2022 को भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य कार्यालय नई दिल्ली के कार्यकारी अधिकारी, आंचलिक कार्यालय मेरठ के आंचलिक प्रबंधक और जिला शामली के शाखा प्रबंधक के विरुद्ध परिवाद दायर कराया था। इसमें परिवादी ने बताया था कि उसने 30 सितंबर 2012 को स्वेब योजना के अंतर्गत 50 हजार रुपये ऋण सुविधा ली थी।
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इसको परिवादी ने 28 नवंबर 2018 को 41150 रुपये और 26 नवंबर 2018 को अपने परिचित मोहम्मद मोमीन के खाते से 20 हजार रुपये ट्रांसफर कराकर ऋण खाता बंद करा दिया था। परिवादी के मुताबिक बैंक की बनत शाखा के प्रबंधक ने पत्र भेजकर धनराशि को एक मुश्त समझौता योजना के अंतर्गत समायोजित करने की सूचना दी, जबकि परिवादी ने शाखा प्रबंधक से ली गई ऋण सुविधा 28 नवंबर 2018 को अदा कर दी थी।
पत्र के द्वितीय पृष्ठ पर क्रमांक पांच पर संपर्क करने के लिए कोई कांटेक्ट नंबर अंकित नहीं किया ताकि वह किसी अन्य से संपर्क न कर सकें। परिवादी ने उसी समय शाखा प्रबंधक से संपर्क कर बताया कि उन्हें भेजे गए सूचना पत्र में दिया गया खाता संख्या उनका नहीं है और ऋण पत्रावली की मांग की तो उनकी कोई सुनवाई नहीं की बल्कि उनसे कहा गया कि अगर उन्होंने ऋण जमा नहीं किया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
परिवादी ने शाखा प्रबंधक की तरफ से हस्ताक्षरित हुआ मुहर लगा हुआ पत्र भी दिया गया, जिस पर स्पष्ट लिखा हुआ अकाउंट क्लोजड दिखाया, लेकिन शाखा प्रबंधक हठधर्मिता पर अड़े रहे और अभद्र व्यवहार करते हुए जेल भिजवाने की धमकी दी। शाखा प्रबंधक ने खाते की डिटेल कंप्यूटर में देखने को तैयार नहीं हुए। परिवादी का कहना है कि शाखा प्रबंधक ने 41150 रुपये खाते में जमा न कर गबन कर लिया और उन्हें नुकसान पहुंचाने और अवैध रूप से वसूली करने की कोशिश की गई।
शाखा प्रबंधक के व्यवहार से असंतुष्ट होकर परिवादी ने मेरठ कार्यालय के आंचलिक प्रबंधक से संपर्क किया, लेकिन इस प्रकरण को शाखा स्तर का बताकर निस्तारण करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। इसके बाद उसने अपने अधिवक्ता के माध्यम से बैंक अधिकारियों को 29 नवंबर 2021 को नोटिस भिजवाएं, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया।
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तत्कालिक शाखा प्रबंधक पर अर्थदंड के साथ एफआईआर दर्ज करने के सुनाया आदेश
आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने परिवाद पर सुनवाई करने के बाद भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य कार्यालय नई दिल्ली के कार्यकारी अधिकारी व आंचलिक कार्यालय मेरठ के प्रबंधक को आदेशित किया कि वह परिवादी द्वारा 28 नवंबर 2018 को जमा किए गए 41150 रुपये को बनत शाखा के तत्कालिक शाखा प्रबंधक के वेतन से काटकर व समायोजित करते हुए तत्काल परिवादी को ऋणमुक्ति का प्रमाण पत्र प्रदान करें और उसके सिबिल को सही करें।
तत्कालिक शाखा प्रबंधक को यह आदेश दिया गया कि परिवादी को आर्थिक, मानसिक व शारीरिक क्षतिपूर्ति के रूप में एक लाख रुपये व दस हजार रुपये परिवाद व्यय के रूप में परिवादी को अदा करने के लिए इस आयोग में जमा करें। सेवा में कमी एवं अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए तत्कालिक शाखा प्रबंधक पर एक लाख रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया। अर्थदंड की धनराशि परिवादी को न देकर नियमानुसार राजकोष में जमा की जाएगी। इसके अतिरिक्त तत्कालिक शाखा प्रबंधक द्वारा किए गए आपराधिक न्यास भंग एवं आपराधिक न्यास भंग एवं अपराधिक दुर्विनियोग के अपराध के लिए पुलिस अधीक्षक शामली को भी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किए जाने और उसके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही किए जाने का आदेश जारी किया।
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आयोग ने बैंक अधिकारियों को तत्कालिक शाखा प्रबंधक के वेतन से कटौती कर गबन किए गए 41150 रुपये समायोजित कर ऋणमुक्ति का प्रमाण पत्र जारी करने के साथ 2.10 लाख रुपये जुर्माना और एफआईआर दर्ज किए जाने का आदेश सुनाया।
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कस्बा बनत के मोहल्ला प्रेमनगर निवासी समीम ने एक जनवरी 2022 को भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य कार्यालय नई दिल्ली के कार्यकारी अधिकारी, आंचलिक कार्यालय मेरठ के आंचलिक प्रबंधक और जिला शामली के शाखा प्रबंधक के विरुद्ध परिवाद दायर कराया था। इसमें परिवादी ने बताया था कि उसने 30 सितंबर 2012 को स्वेब योजना के अंतर्गत 50 हजार रुपये ऋण सुविधा ली थी।
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इसको परिवादी ने 28 नवंबर 2018 को 41150 रुपये और 26 नवंबर 2018 को अपने परिचित मोहम्मद मोमीन के खाते से 20 हजार रुपये ट्रांसफर कराकर ऋण खाता बंद करा दिया था। परिवादी के मुताबिक बैंक की बनत शाखा के प्रबंधक ने पत्र भेजकर धनराशि को एक मुश्त समझौता योजना के अंतर्गत समायोजित करने की सूचना दी, जबकि परिवादी ने शाखा प्रबंधक से ली गई ऋण सुविधा 28 नवंबर 2018 को अदा कर दी थी।
पत्र के द्वितीय पृष्ठ पर क्रमांक पांच पर संपर्क करने के लिए कोई कांटेक्ट नंबर अंकित नहीं किया ताकि वह किसी अन्य से संपर्क न कर सकें। परिवादी ने उसी समय शाखा प्रबंधक से संपर्क कर बताया कि उन्हें भेजे गए सूचना पत्र में दिया गया खाता संख्या उनका नहीं है और ऋण पत्रावली की मांग की तो उनकी कोई सुनवाई नहीं की बल्कि उनसे कहा गया कि अगर उन्होंने ऋण जमा नहीं किया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
परिवादी ने शाखा प्रबंधक की तरफ से हस्ताक्षरित हुआ मुहर लगा हुआ पत्र भी दिया गया, जिस पर स्पष्ट लिखा हुआ अकाउंट क्लोजड दिखाया, लेकिन शाखा प्रबंधक हठधर्मिता पर अड़े रहे और अभद्र व्यवहार करते हुए जेल भिजवाने की धमकी दी। शाखा प्रबंधक ने खाते की डिटेल कंप्यूटर में देखने को तैयार नहीं हुए। परिवादी का कहना है कि शाखा प्रबंधक ने 41150 रुपये खाते में जमा न कर गबन कर लिया और उन्हें नुकसान पहुंचाने और अवैध रूप से वसूली करने की कोशिश की गई।
शाखा प्रबंधक के व्यवहार से असंतुष्ट होकर परिवादी ने मेरठ कार्यालय के आंचलिक प्रबंधक से संपर्क किया, लेकिन इस प्रकरण को शाखा स्तर का बताकर निस्तारण करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। इसके बाद उसने अपने अधिवक्ता के माध्यम से बैंक अधिकारियों को 29 नवंबर 2021 को नोटिस भिजवाएं, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया।
तत्कालिक शाखा प्रबंधक पर अर्थदंड के साथ एफआईआर दर्ज करने के सुनाया आदेश
आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने परिवाद पर सुनवाई करने के बाद भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य कार्यालय नई दिल्ली के कार्यकारी अधिकारी व आंचलिक कार्यालय मेरठ के प्रबंधक को आदेशित किया कि वह परिवादी द्वारा 28 नवंबर 2018 को जमा किए गए 41150 रुपये को बनत शाखा के तत्कालिक शाखा प्रबंधक के वेतन से काटकर व समायोजित करते हुए तत्काल परिवादी को ऋणमुक्ति का प्रमाण पत्र प्रदान करें और उसके सिबिल को सही करें।
तत्कालिक शाखा प्रबंधक को यह आदेश दिया गया कि परिवादी को आर्थिक, मानसिक व शारीरिक क्षतिपूर्ति के रूप में एक लाख रुपये व दस हजार रुपये परिवाद व्यय के रूप में परिवादी को अदा करने के लिए इस आयोग में जमा करें। सेवा में कमी एवं अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए तत्कालिक शाखा प्रबंधक पर एक लाख रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया। अर्थदंड की धनराशि परिवादी को न देकर नियमानुसार राजकोष में जमा की जाएगी। इसके अतिरिक्त तत्कालिक शाखा प्रबंधक द्वारा किए गए आपराधिक न्यास भंग एवं आपराधिक न्यास भंग एवं अपराधिक दुर्विनियोग के अपराध के लिए पुलिस अधीक्षक शामली को भी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किए जाने और उसके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही किए जाने का आदेश जारी किया।