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झाड़फूंक से बचें, मिर्गी का समय पर इलाज कराएं
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शामली। मिर्गी एक मस्तिष्क तंत्रकीय विकार है, जिसमें रोगी को बार-बार दौरे पड़ते हैं। इसका संबंध मस्तिष्क से होता है। मस्तिष्क में किसी गड़बड़ी के कारण यह समस्या बनती है। इस समय रहते उपचार कराया जाए तो इस बीमारी से छुटकारा मिल सकता है।
मिर्गी के बारे में जानकारी के अभाव में कुछ लोग लाइलाज बीमारी मानकर उपचार नहीं कराते तो कुछ लोग इसे ऊपरी हवा मानकर झाड़फूंक के चक्कर में पड़े रहते है, जिससे यह बीमारी ठीक नहीं हो पाती। हालांकि पिछले कुछ सालों से अब लोगों में जागरूकता आई है जिससे लोग झाड़फूंक से बचकर उपचार कराने लगे है। यह बीमारी बच्चों से लेकर किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। यह बीमारी न तो आनुवांशिक है और न ही संक्रामक है। मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिका की गतिविधि कुछ समय के लिए बाधित होने पर दौरा या कुछ समय के लिए असामान्य व्यवहार, उत्तेजना या बेहोशी आ जाती है। इस दौरान व्यक्ति का दिमागी संतुलन बिगड़ने के कारण लड़खड़ाने लगता है। इसका प्रभाव चेहरे, हाथ या पैर पर अधिक दिखाई देता है। कुछ मरीजों के दिमाग के एक हिस्से में दौरा पड़ता है तो कुछ मरीजों को दिमाग के पूरे हिस्से में पड़ता है। यह बीमारी लाइलाज नहीं है। समय पर इलाज मिलने पर यह बीमारी ठीक हो जाती है।
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लाइलाज नहीं है मिर्गी
मस्तिष्क में विकार आने पर मरीज को दौरे पड़ने लगते है। इससे घबराना नहीं चाहिए। यह बीमारी लाइलाज नहीं है। समय पर उपचार कराना चाहिए। उपचार कराने से यह बीमारी ठीक हो जाती है। - डा. रमेश चंद्रा, चिकित्साधीक्षक सीएचसी।
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दिमाग में अचानक से स्ट्रोक लगने से दौरा आ जाता है। एक बार में दौरा आने पर मिर्गी नहीं कहा जा सकता, लेकिन जीवन में दो या इससे अधिक बार आता है तो वह मिर्गी का दौरा हो सकता है। यह दो प्रकार का होता है। इसमें एक तो मरीज को पता होता है कि उसके साथ क्या हुआ जबकि दूसरी तरह का वह होता है, जिसमें मरीज को पता नहीं होता उसके साथ क्या हुआ, यह बात उसे दूसरे व्यक्ति से पता चलती है। 90 प्रतिशत मरीज इसी तरह के होते है। इसके लिए चिकित्सक की सलाह लेकर उपचार कराना चाहिए। इसका लगभग तीन साल तक उपचार चलता है और बीच में दवा नहीं छोड़नी चाहिए। अगर बीच में दवा मिस हो जाती है तो दौरा आ सकता है। इसलिए लगातार दवा चलानी चाहिए।
- डा. अरुण कुमार, मनोचिकित्सक।
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लक्षण
अचानक बेहोशी आना, अचानक गिर पड़ना, हाथ-पांव में झटके आना, मांस पेशियों पर नियंत्रण न रहना।
तेज रोशनी से आंखों में परेशानी होना।
कारण
सिर पर चोट लगना, दिमागी बुखार आना, दिमाग में कीड़े की गांठ बनना, ब्रेन ट्यूमर व ब्रेन स्ट्रोक होना, शराब या नशीली दवाओं का ज्यादा सेवन करना।
सावधानी
दौरा पड़ने पर रोगी को सुरक्षित जगह पर एक करवट लेटाएं।
कपड़े ढीले करें, खुली हवा में रखे और आसपास भीड़ न लगाए।
सिर के नीचे मुलायम कपड़ा रखे, दौरे के समय मरीज के मुंह में कुछ न डाले।
पर्याप्त सात से आठ घंटे की नींद ले।
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मिर्गी के बारे में जानकारी के अभाव में कुछ लोग लाइलाज बीमारी मानकर उपचार नहीं कराते तो कुछ लोग इसे ऊपरी हवा मानकर झाड़फूंक के चक्कर में पड़े रहते है, जिससे यह बीमारी ठीक नहीं हो पाती। हालांकि पिछले कुछ सालों से अब लोगों में जागरूकता आई है जिससे लोग झाड़फूंक से बचकर उपचार कराने लगे है। यह बीमारी बच्चों से लेकर किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। यह बीमारी न तो आनुवांशिक है और न ही संक्रामक है। मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिका की गतिविधि कुछ समय के लिए बाधित होने पर दौरा या कुछ समय के लिए असामान्य व्यवहार, उत्तेजना या बेहोशी आ जाती है। इस दौरान व्यक्ति का दिमागी संतुलन बिगड़ने के कारण लड़खड़ाने लगता है। इसका प्रभाव चेहरे, हाथ या पैर पर अधिक दिखाई देता है। कुछ मरीजों के दिमाग के एक हिस्से में दौरा पड़ता है तो कुछ मरीजों को दिमाग के पूरे हिस्से में पड़ता है। यह बीमारी लाइलाज नहीं है। समय पर इलाज मिलने पर यह बीमारी ठीक हो जाती है।
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लाइलाज नहीं है मिर्गी
मस्तिष्क में विकार आने पर मरीज को दौरे पड़ने लगते है। इससे घबराना नहीं चाहिए। यह बीमारी लाइलाज नहीं है। समय पर उपचार कराना चाहिए। उपचार कराने से यह बीमारी ठीक हो जाती है। - डा. रमेश चंद्रा, चिकित्साधीक्षक सीएचसी।
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दिमाग में अचानक से स्ट्रोक लगने से दौरा आ जाता है। एक बार में दौरा आने पर मिर्गी नहीं कहा जा सकता, लेकिन जीवन में दो या इससे अधिक बार आता है तो वह मिर्गी का दौरा हो सकता है। यह दो प्रकार का होता है। इसमें एक तो मरीज को पता होता है कि उसके साथ क्या हुआ जबकि दूसरी तरह का वह होता है, जिसमें मरीज को पता नहीं होता उसके साथ क्या हुआ, यह बात उसे दूसरे व्यक्ति से पता चलती है। 90 प्रतिशत मरीज इसी तरह के होते है। इसके लिए चिकित्सक की सलाह लेकर उपचार कराना चाहिए। इसका लगभग तीन साल तक उपचार चलता है और बीच में दवा नहीं छोड़नी चाहिए। अगर बीच में दवा मिस हो जाती है तो दौरा आ सकता है। इसलिए लगातार दवा चलानी चाहिए।
- डा. अरुण कुमार, मनोचिकित्सक।
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लक्षण
अचानक बेहोशी आना, अचानक गिर पड़ना, हाथ-पांव में झटके आना, मांस पेशियों पर नियंत्रण न रहना।
तेज रोशनी से आंखों में परेशानी होना।
कारण
सिर पर चोट लगना, दिमागी बुखार आना, दिमाग में कीड़े की गांठ बनना, ब्रेन ट्यूमर व ब्रेन स्ट्रोक होना, शराब या नशीली दवाओं का ज्यादा सेवन करना।
सावधानी
दौरा पड़ने पर रोगी को सुरक्षित जगह पर एक करवट लेटाएं।
कपड़े ढीले करें, खुली हवा में रखे और आसपास भीड़ न लगाए।
सिर के नीचे मुलायम कपड़ा रखे, दौरे के समय मरीज के मुंह में कुछ न डाले।
पर्याप्त सात से आठ घंटे की नींद ले।