फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   400 trees uprooted without compensation

बिना मुआवजा दिए उखाड़ दिए 400 पेड़

Thu, 09 Sep 2021 12:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 09 Sep 2021 12:09 AM IST
विज्ञापन
400 trees uprooted without compensation
शामली में गोहरनी के जंगल में पेड़ काटती जेसीबी। - फोटो : SHAMLI
बिना मुआवजा दिए उखाड़ दिए 400 पेड़
विज्ञापन

शामली। गोहरनी के जंगल में बुधवार को शामली बाईपास के निर्माण के लिए तहसील, एनएचएआई और पुलिस की संयुक्त टीम ने बाग के करीब 400 पेड़ जेसीबी से उखाड़ डाले। पेड़ों का मुआवजा दिए बिना इस कार्रवाई का विरोध जताते हुए ग्रामीणों और रालोद नेताओं ने जमकर हंगामा किया। बृहस्पतिवार को बाग मालिकों को मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए तहसील में आने की बात कहकर टीम लौट गई।
गोहरनी निवासी भाई युद्धवीर सिंह और सुधीर कुमार का गांव के जंगल में बाग हैं, जिसमें लीची, नाशपाती और आडू आदि फलों के करीब 400 फलदार पेड़ थे। दो वर्ष पूर्व उनके बाग की भूमि शामली बाईपास निर्माण की जद में आ गई थी। बाग की भूमि का मुआवजा तो उन्हें मिल गया था, लेकिन पेड़ों के मुआवजे की प्रक्रिया अभी लंबित है। बुधवार सुबह उनके पास तहसील से कानूनगो का फोन आया और उन्हें मौके पर बुलाया। तहसीलदार संत कुमार के साथ एनएचएआई के अधिकारी व ठेकेदार भी मौजूद थे, तभी चार जेसीबी और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर पहुंच गए।
विज्ञापन

आरोप है कि जेसीबी से जबरन पेड़ उखाड़े जाने लगे। युद्धवीर सिंह और सुधीर कुमार के साथ उनके परिजनों ने विरोध किया। देखते ही देखते टीम ने करीब 400 पेड़ उखाड़ डाले। सूचना मिलने पर ग्रामीण और रालोद नेता भी मौके पर पहुंच गए। इसके बाद वहां हंगामा हो गया। ग्रामीणों और रालोद नेताओं ने बिना मुआवजा दिए इस कार्रवाई का जमकर विरोध किया। अधिकारियों ने उन्हें समझाबुझाकर किसी तरह शांत किया। पीड़ितों को पेड़ों का मुआवजा दिलाने का आश्वासन देते हुए बृहस्पतिवार को तहसील में बुलाकर अधिकारी वहां से लौट गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

पहले वन विभाग से कराया था मूल्यांकन
बाग मालिकों के प्रशासन ने उनके पेड़ों का मूल्यांकन वन विभाग से कराया था। वन विभाग ने प्रति पेड़ 50 रुपये मूल्य तय किया था। वन विभाग के अधिकारियों ने सिर्फ लकड़ी के आधार पर मुआवजा तय कर दिया था। जबकि फलदार पेड़ों का मूल्यांकन नियमानुसार उद्यान विभाग से कराना था। बाद में उन्होंने इस मूल्यांकन पर डीएम और एडीएम के यहां आपत्ति दर्ज कराई थी। जिस पर उद्यान विभाग ने पेड़ों की उम्र के हिसाब से प्रतिवर्ष 180 रुपये प्रति पेड़ मुआवजा तय किया था। यह भी कम है। उनके पेड़ों की कीमत करीब दो करोड़ रुपये है।
वर्जन
- कानूनी प्रक्रिया पूरी करके जमीन पर कब्जा लेने गए थे। नियमानुसार मुआवजा दिया गया है। यदि मुआवजे को लेकर भूमि मालिकों को कोई आपत्ति है तो वह आर्बिटेशन में जा सकते हैं। - राहुल दुबे, लाइजनर अफसर, एनएचएआई

- भूमि मालिकों को पेड़ के मूल्यांकन पर आपत्ति थी। उनकी शिकायत पर दोबारा मूल्यांकन कराया था। जिसमें मूल्यांकन बढ़ गया, उसके हिसाब से मुआवजा मिलेगा। परियोजना को समय से पूरा करने के लिए भूमि पर कब्जा एनएचएआई को दिलाना था। जिसके लिए तहसील और पुलिस की टीम मौके पर गई थी। - अरविंद कुमार सिंह, एडीएम।

शामली में गोहरनी के जंगल में पेड़ काटती जेसीबी।

शामली में गोहरनी के जंगल में पेड़ काटती जेसीबी।- फोटो : SHAMLI

शामली गोहरनी  के जंगल में कटे पडे   हरे पेड

शामली गोहरनी के जंगल में कटे पडे हरे पेड- फोटो : SHAMLI

शामली गोहरनी  के जंगल में  हरे पेड कटने पर हंगामा करते किसान

शामली गोहरनी के जंगल में हरे पेड कटने पर हंगामा करते किसान- फोटो : SHAMLI

शामली गोहरनी  के जंगल में   तहसीलदार से वार्ता करते किसान

शामली गोहरनी के जंगल में तहसीलदार से वार्ता करते किसान- फोटो : SHAMLI

शामली गोहरनी  के जंगल में  हरे पेड कटने पर जेसीबी  मशीन के सामने लेट कर विरोध करता किसान

शामली गोहरनी के जंगल में हरे पेड कटने पर जेसीबी मशीन के सामने लेट कर विरोध करता किसान- फोटो : SHAMLI

शामली में गोहरनी के जंगल में पेड़ कटने पर जेसीबी के सामने लेट कर विरोध करता किसान।

शामली में गोहरनी के जंगल में पेड़ कटने पर जेसीबी के सामने लेट कर विरोध करता किसान।- फोटो : SHAMLI

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed