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चार माह बाद अपने परिजनों से मिलाया
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अपना घर आश्रम ने चार माह बाद अपने परिजनों से मिलाया
शामली। अपना घर आश्रम ने एक प्रभु को चार माह बाद अपने परिजनों से मिलाया है। प्रभु बिहार में अपनी नानी के यहां जाने के लिए निकला था।
नौ दिसंबर को गांव गढ़ीपुख्ता से नंदकिशोर ने एक लावारिस असहाय व्यक्ति को अपना घर आश्रम शामली में प्रवेश दिया था। शुरुआती दौर में असहाय प्रभु अपने बारे में कुछ नहीं जानकारी दी, बाद में अपना नाम सुंदर बताया। आश्रम में जब आए थे उस समय इनके पैर की हड्डी टूटी हुई थी। 25 दिन पहले अपने घर जाने की इच्छा प्रकट की, तो आश्रम कार्यालय द्वारा पता पूछने पर अपना नाम सुरेंद्र पासवान व अपने घर का बिहार होने की जानकारी दी। घर में पत्र भेजा गया। 14 फरवरी को सुरेंद्र पासवान के भतीजे इनको लेने अपना घर आश्रम आए। उन्होंने बताया कि यह पिछले चार माह पूर्व घर से नानी के यहां जाने के लिए निकले थे और रास्ता भटक गए। फिर इनके भतीजे बेचित पासवान ने आश्रम की कार्यालय की कार्रवाई पूर्ण की ओर अपने चाचा को अपने साथ बिहार ले गए।
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शामली। अपना घर आश्रम ने एक प्रभु को चार माह बाद अपने परिजनों से मिलाया है। प्रभु बिहार में अपनी नानी के यहां जाने के लिए निकला था।
नौ दिसंबर को गांव गढ़ीपुख्ता से नंदकिशोर ने एक लावारिस असहाय व्यक्ति को अपना घर आश्रम शामली में प्रवेश दिया था। शुरुआती दौर में असहाय प्रभु अपने बारे में कुछ नहीं जानकारी दी, बाद में अपना नाम सुंदर बताया। आश्रम में जब आए थे उस समय इनके पैर की हड्डी टूटी हुई थी। 25 दिन पहले अपने घर जाने की इच्छा प्रकट की, तो आश्रम कार्यालय द्वारा पता पूछने पर अपना नाम सुरेंद्र पासवान व अपने घर का बिहार होने की जानकारी दी। घर में पत्र भेजा गया। 14 फरवरी को सुरेंद्र पासवान के भतीजे इनको लेने अपना घर आश्रम आए। उन्होंने बताया कि यह पिछले चार माह पूर्व घर से नानी के यहां जाने के लिए निकले थे और रास्ता भटक गए। फिर इनके भतीजे बेचित पासवान ने आश्रम की कार्यालय की कार्रवाई पूर्ण की ओर अपने चाचा को अपने साथ बिहार ले गए।